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संगवारी हो, हम ये ठीहा म कला, साहित्‍य अउ संस्‍कृति के संगें संग, छत्‍तीसगढ़ सासन के ताजा समाचार ल घलो देहे के उदीम करत हन. आप मन ल पसंद आही त हम येला सरलग चलाबों.

कहानी

दूसरइया बिहाव

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन

कहानी : पछतावा

एक गाँव में एक झन बुधारू नाम के मनखे राहे ।वोहा बचपन से अलाल रहे।ओकर दाई ददा ह ओला इस्कूल जाय बर अब्बड़ जोजियाय ।त

वर्ष 2008 से निरंतर संचालित इस साईट में छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के लगभग 180 रचनाकारों के 7000 पेज की रचनायें और 50 किताबें संग्रहित हैं. इस अवधि में तीन बार साईट हैक हो जाने के कारण इस साईट में संग्रहित लगभग सभी रचनायें नष्ट हो गई थी.
छत्तीसगढ़ के पत्र पत्रिकाओं के संपादकों से अनुरोध है कि इस साईट में संग्रहित रचनाओं का यदि आप पुर्नप्रकाशन कर रहे हों तो कृपया गुरतुर गोठ डॉट काम का उल्लेख कर हमारे कार्य का भी प्रचार करें. - संपादक.

हमर उदीम मेकराजाला म छत्तीसगढी भाखा के रचना मन ला धरनहा राख के एके जघा सकेले के हावय. हमर छत्तीसगढ के रहइया मन ला तो हमर भाखा के साहित्य के भंडार ल झांके बर मिल जाथे, फेर इहां ले बाहिर रहइया हमर भाखा के परेमी मन बर अपन महतारी भाखा ला पढे अउ सुने के ये ह सुघ्घर साधन आय. गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम कइसे लागिस हमला बताहू.

अनुवाद

दूसरइया बिहाव

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन