बम बम भोले

हर हर बम बम भोलेनाथ के , जयकारा लगावत हे । कांवर धर के कांवरिया मन , जल चढाय बर जावत हे । सावन महिना

कान्हा मोला बनादे : सार छंद

पाँख मयूँरा मूड़ चढ़ादे,काजर गाल लगादे| हाथ थमादे बँसुरी दाई,मोला किसन बनादे | बाँध कमर मा करधन मोरे,बाँध मूड़ मा पागा| हाथ अरो दे करिया

चल ना रे कांवरिया

चल ना रे कांवरिया, चल कांवर ल धरले। सिका-जोंती चुकिया में,गंगा जल भरले।। चल ना रे कांवरिया……………………. सावन के महीना हावै,शिव शंभु दानी के। कर

किसान

रदरद रदरद गिरगे पानी, चूहे परवा छानी । ठलहा काबर बइठे भइया, आगे खेती किसानी । ये गा किसान, कर ले धियान चलव खेत चलव

भोले बाबा : सार छंद

डोल डोल के डारा पाना ,भोला के गुन गाथे। गरज गरज के बरस बरस के,सावन जब जब आथे। सोमवार के दिन सावन मा,फूल दूब सब

हमर हरेली तिहार

हमर हिन्दू धरम मा बच्छर भर के पबरित महीना सावन ला माने गे हे। भक्ती, अराधना, आस्था अउ बिसवास के पावन महीना सावन हा कहाथे।

बरसात : गीतिका छंद

आज बादर बड़ बरसही,जाम कस करियाय हे। नाच के गाके मँयूरा ,नीर ला परघाय हे। भर जही अब ताल डबरी,एक होही खोंचका। दिन किसानी के

ररुहा सपनाये …….

सरग म बरम्हा जी के पांच बछर के कारकाल पुरा होगे । नावा बरम्हा चुने बर मनथन चलत रहय । सत्ताधारी इंद्र अपन पारटी अऊ

गुरतुर गीत

बम बम भोले

हर हर बम बम भोलेनाथ के , जयकारा लगावत हे । कांवर धर के कांवरिया मन , जल चढाय बर जावत हे । सावन महिना

ररुहा सपनाये …….

सरग म बरम्हा जी के पांच बछर के कारकाल पुरा होगे । नावा बरम्हा चुने बर मनथन चलत रहय । सत्ताधारी इंद्र अपन पारटी अऊ

गदहा मन के मांग

एक दिन गदहा मन के गांव म मंझनिहां बेरा हांका परिस- गुडी म बलाव हे हो- ढेंचू , जल्दी जल्दी सकलावत जाव हो ढेचू। सुनके

अपन अपन रुख

रुख रई जंगल के , बिनास देख , भगवान चिनतीत रिहीस । ओहा मनखे मन के मीटिंग बलाके , रुख रई लगाये के सलाह दीस

दसवा गिरहा दमांद

जोतिस के जानकार मन ल नौ ले उपरहा गिनतीच नइ आवय। तेकर सेती जोतिस म नौ गिरहा माने गे हे। फेर लोकाचार म दस गिरहा

जुग जुग पियव

भरे गरमी म , मंझनी मंझना के बेरा । जंगल म किंजरत किंजरत पियास के मारे मरत रहय भोलेनाथ । बियाबान जंगल म , मरे

सवच्छ भारत अभियान

गांव ला सवच्छ बनाये के सनकलप ले चुनई जीत गे रहय । फेर गांव ला सवच्छ कइसे बनाना हे तेकर , जादा जनाकारी नी रहय

बियंग : बरतिया बाबू के ढमढम

बिहाव के गोठ छोकरी खोजे ले चालू होथे अऊ ओखरो ले पहिली ले दुल्ही-दुल्हा दुनो घर वाला मन हा गहना-गुट्ठा बिसा डारे रथे। फेर अऊ