मोर भाखा संग दया मया के सुघ्घर हवय मिलाप रे..

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संजीव तिवारी
संपादक

संपादकीय : मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू

ST1111संगवारी, गुरतुर गोठ के हमर उदीम इंटरनेट (मेकराजाला) म छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ल आघू लाये के हे। हम ये वेब साईट म 2008 ले छत्तीसगढ़ी के रचनाकार मन के रचना सरलग डारत आवत हावन। हम चाहत हावन के हमर भाखा के जादा ले जादा साहित्य इंटरनेट म आवय। ये खातिर हम जमो संगी मन संग गिलोली करथन के, आप अपन ब्लॉग या बेवसाईट बना के अपन अउ अपन संगी साथी मन के रचना घलव ला डारव। हम सब जुरमिल के उदीम करबोन त हमर साहित्य सहजे म इंटरनेट के माध्यम ले हमला पढ़े-गुने ल मिल जाही।
मोर एके ठन अउ गिलौली हावय के ये बेवसाईट या कोनो ब्लॉग म एक पईत छपे रचना ला घेरी बेरी इंटरनेट म छापे के बजाए नवा रचना ल इंटरनेट म डारव। येखर ले हमर भाखा के साहित्य इंटरनेट म घलव बने पोठ होही अउ पाठक मन ल घलव बने रकम-रकम के बिसय पढ़े ल मिलही। ये बेवसाईट के रचना ल कापी करके कहू आप अपन ब्लॉग या बेव साईट म डारहू त पाठक ल नवा का मिलही। आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर सिरतोन म मया करथव त नवा रचना अपन बेव साईट या ब्लॉग म डारव। ये साईट के कोनो रचना ल आप कहूं अपन ब्लॉग या बेवसाईट म डारना चाहत हव त बने होही के हमर साईट के पूरा रचना डारे के बजाए, हमर साईट म छपे रचना के लिंक ल अपन म लगा लव। येखर ले पाठक ल आपके वेब साईट या ब्लॉग के रचना के संगें संग हमरो साईट के रचना पढ़े ल मिलही।
आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर अपन असल मया देखाव, अउ इंटरनेट म हमर भाखा के भंडार ल भर दव। मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू। मोर मिहनत ले बनाए ये साईट के रचना मन ल अपन साईट म छापे के बजाए आप छत्तीसगढ़ी के ई पेपर (भास्कर, पत्रिका, हरिभूमि) अउ आरकाईव म चल देहे देशबंधु मड़ई के रचना मन ल अपन साईट म जघा देहू तभो छत्तीसगढ़ी बर बड़का काम हो जाही। एखरो ले आप ल संतोस नई होही त हम तो पहिलीच ले कहत हन संगी, आवव, आप सम्हाल लव ये गुरतुर गोठ के बाना ल। हमर मेर अपन दाई भाखा बर काम करे के अड़बड़ अकन बुता बांचे हे।
पाछू कुछ हप्ता ले बने रमके ये साईट म सरलग रचना छापत रहेंव, अब मन खट्टा होगे। अब ये साईट म जइसे मोला उसरही रचना छापहूं, सरलग हप्ता-महीना के बंधना नई राखंव।
जय छत्तीसगढ़, जय छत्ती‍सगढ़ी।
संजीव तिवारी
संपादक: गुरतुर गोठ डॉट कॉम