अजय साहू “अमृतांशु” के दोहा : इंटरनेट

छागे इंटरनेट हा, महिमा अपरंपार।
घर बइठे अब होत हे, बड़े-बड़े व्यापार।।

बिन खरचा के होत हे, बड़े-बड़े सब काम।
दउड़े भागे नइ लगय, अब्बड़ हे आराम।।

नेट हवय तब सेट हे, दुनिया के सब रंग।
बिना नेट के लागथे, जिनगी हा बदरंग।।

रात-रात भर नेट मा, झन कर अतका काम।
चिंता कर परिवार के, कर ले कुछ आराम।।

घर मा बइठे देख लव, दुनिया भर के रीत।
आनी बानी गोठ अउ, अब्बड़ सुग्घर गीत।।

लइका मन पुस्तक पढ़य,घर बइठे अभ्यास।
होत परीक्षा नेट मा, तुरते होवय पास।।

का कहना हे नेट के करथे, अबड़ कमाल।
येमा सोशल मीडिया, देवत है सब हाल।।

अजय साहू “अमृतांशु”
भाटापारा, छत्तीसगढ़



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