असल जिनगी म तको ‘नायक’ हाबे मनु फिल्म मेकर

manu nayakछत्तीसगढ़ी भासा म बने एतिहासिक फिलिम ‘कहि देबे संदेश’ ह सन् 1965 म बने हाबे। ओ बखत स्वेत/स्याम के जमाना रिहिसे, मनोरंजन के माध्यम सिमित रिहिस, माने घरों-घर टीवी नइ पहुंचे रिहिस। ओ समे छत्तीसगढ़ी भासा म फिलिम के सिरजन ह सिरतोन म छत्तीसगढ़ के कला अउ छत्तीसगढ़ी भाखा के इतिहास ल पोट्ठ करथे। रायपुर जिला के खरोरा तिर के गांव कुर्रा (बंगोली) के कुर्मी परिवार म 1937 म जनमे मनु नायक ह अपन कारज के बल म समाज, गांव अउ राज बर सिरतोन म एक नायक बनके उभरिस। मनु नायक के जिनगी ह आन मनला तको सीख देथे अपन गांव देश अउ समाज खातिर कुछू करे के। छत्तीसगढ़ के इतिहास म नवा रद्दा गढ़त छत्तीसगढ़ी के नायक मनु ह ये ठऊर ल सुभित्ता म नइ पाहे बल्कि ओकर पहिली सिरजन ‘कहि देबे संदेशÓ ह भारी दुख-पीरा ल झेलत लट्टे-पट्टे म बने हाबे।
पहिली तो फिलिम के कहानी ह अडघा रिहिस बाद म बजट के अड़चन आइस, कलाकार मन बीच म बिदग जाय, अइसने गजब अकन अऊ अड़चन ल सहत साहस अउ हिम्मत ले मनु नायक जी ह फिलिम ल पूरा करिस। जेखर हिरदे म माटी के करजा चुकाए के जिद होथे, ओमन बखत के मार ल जबर छाती म सहिथे, जेठ के भोंभरा अउ सावन के सुररा का, संसा के चलत ले जनम भूमि बर जीथे। फिल्म मेकर मनु नायक ह कइसे ढंग ले छत्तीसगढ़ी म फिलिम बनाये के जोंगिस, कइसे अउ कहां बितिस नानपन अउ माया नगरी कइसे पहुंचगे जानथन ओखरे सो-
• नानपन म मनु
हमन कुर्रा बंगोली के रहइया आन। तीन साल के उमर के रहेव तभे मोर पिता जी बितगे। हमर घर के परिस्थिति बहुत खराब रिहिस। कहू पोसइया नइ रिहिस, खेती मजदूरी म ए गांव ले ओ गांव, अइसने जिनगी चले। तभे हमर कका ह मय पढ़ाहू येला कहिके मोला लान के रायपुर के लक्ष्मीनारायण दास मंदिर म भरती करा दीस। कका ह कहि दे हावव किके मंदिर म भरती करा दिस, मोला ये बात बने नइ लागिस कुछ दिन बाद मय ओ ठउर ल छोड़ देवं। फेर मोला मोर रिस्ता म भाई लाग हाबे तेन ह ये लइका के ये साल ह बेकार हो जही कइके अपन घर लान लिस। मय नानपन ले खुल्ला सोच-विचार के रेहेव, मन म अइस के मय इखरो मन उपर बोझ तो नइ होवथवं। भले ओमन नइ किहिन के मय अपन दूसर बेवस्था बनके उहों ल छोड़ देवं। मय राष्ट्रीय स्कूल म पढ़व अउ रेहे बर मंदिर मन ठउर ठिहा राहय, कभू मंदिर म खाना खावं कभू भोजनालय म। अइसे ठउर-ठिहा बदलत-बदलत मय मेट्रिक तक के पढ़ाई करेवं ओकर बाद काम के तलास म निकलगेवं।
• माया नगर म मनु
मय बम्बई ये सोच के नइ गेवं के मोला फिलिम लाइन म जाना हाबे। मोला पेट रोजी चलाये बर नौकरी चाही रिहिसे। सबो कोति कोसिस करेवं फेर एक ठी फिलिम कंपनी संग जूरेवं। उहां चाय पानी पियाय के काम ल लेके अउ आन सबो काम ल करेवं। उहां काम तो बहुत हाबे फेर आसानी ले मिलय नही, कोसिस करते रेहे ले काम मिलथे। मय फिलिम कंपनी म हर किसम के काम करे हाबवं। बम्बई म सब कुछ किसमत ले मिलथे अउ मस किसमत के धनी रेहेवं तेन पायके आज ये मुकाम म हाबवं।
• मनु के पहिली फिलिम
छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी भाखा बर कुछ करे के मन आइस अउ अपन फिलिम कंपनी के कुछ साथी मन संग मिलके छत्तीसगढ़ी भासा म फिलिम बनाये के विचार राखेव। येमा कुछ अऊ पाटनर रिहिस जेखर मन संग मय एग्रिमेंट करे रेहेवं। बम्बई म सबो तियारी करे के बाद उहां के 15-20 कलाकार ल धर के रायपुर पहुंचेवं। इहां आते ही मोर तो हालत खराब होगे। जेन पाटनर मनके बल म इहां आये रेहेवं तेने मन भोसकगे। मोर जेब म सिरिफ 100 रूपिया रिहिसे अउ मोर संग म बम्बई के 15 कलाकार, सोचव मोर का हालत रिहिस होही। मय कुछू भी काम करे के सुरू करथवं तव ओकर तियारी आगू ले कर लेथवं। इहूं म पाटनर मनले बात होय रिहिसे के ओमन फिलिम के पूरा बजट अउ सबो के जोखा उही करही फेर मोर ले आगू उही मन हिम्मत हारके भागगे। जेन दिन ले मय ‘कहि देबे संदेश’ बनाये के घोसना करेवं तेने दिन ले मोर संग रोज कोनो न कोनो घटना होवे। तभो ले अकेल्ला हिम्मत करके फिलिम ल बनाके टाकीज तक लानेवं।
• मनु के मददगार
जब मय कलाकार मनला धरके रायपुर आये रेहेवं तव स्टेसन म अचानक मोर मुलाकात दाउ बृजलाल वर्मा जी संग होइसे। पुराना परिचित तको रिहिसे दाउ जी मोला देख के पुछथे- का होइसे नायक जी तोर फिलिम के, गजब पेपर म आवथे के तै छत्तीसगढ़ी फिलिम बनावत हस। मय दाउ जी ल अपन संग होय सरी घटना ल बतायेव। दाउ जी किथे मोर गांव ल देखे हस का। मय कहेवं देखे तो नइ हवं फेर कहू मोर कलाकार मनके रेहे खाए के बेवस्था हो जही तव मय फिलिम ल बना लेहू, गांव कइसनो राहय। किसमत ल देख अचानक ही दाउ बृजलाल वर्मा जी संग मोर भेट होइसे खड़े-खड़े दाउ ह मोर मदद करे बर तियार होगे अउ ओकर गांव पलारी म मोर फिलिम कहि देबे संदेश के पुरा सूटिंग होइसे। बृजलाल वर्मा जी मोर मदद नइ करतीस तव तो ये फिलिम शायदे बन पाय रितिस।
• कहि देबे संदेश के कहानी मनु के आंखन देखी
‘कहि देबे संदेश’ के कहानी जातिवाद जइसन सामाजिक कुरीति उपर बने हाबे। ओमा जोन घटना हाबे ओइसने हमर गांव म होय हाबे, दाउ मन आन समाज के मनला बनावे, कुछ मन तो कई झिन बाई राखे राहे। इही सब ल देखेवे त मोर मन म जातिवाद जइसन बिसे म बनाये के विचार होइसे। सुरू म तो भारी विरोध होइसे। काबर के येकर कहानी बाम्हन अउ सतनामी समाज ले गढ़े गे रिहिसे तेन पाके बाम्हन समाज के मन गजब विरोध करय। मोला तो कतकोन गुमनाम चिट्टी मिलय जेमा लिखाय राहय के ये फिलिम ल झन बना नहींते तोला मारिच डारबो। मोला मारे-पिटे के धमकी फिलिम के सुरूच ले चालू रिहिस जोन हा फिलिम के पूरा होये के बाद तको मिलते रिहिसे। फेर मय कोनो ले नी डर्रायेव, अपन काम म लगे रेहेवं।
• राष्ट्रीय क्षितिज म मनु के किरती
‘कहि देबे संदेश’ रिलीज होय के बाद सेंसर बोर्ड वाले मन मोला चिट्ठी लिखिस के तोर फिलिम के भारी विरोध होवथाबे। सब सांसद मन तोर फिलिम ल देखही तोर फिलिम के प्रिंट पठो। महू अपन कोत ले चिट्ठी लिखेव- काबर के येहा छत्तीसगढ़ी भासा म हाबे अउ छत्तीसगढ़ के मुददा आए तेन पाके छत्तीसगढ़ के जम्मो सांसद मनला बलाके फिलिम देखाय जाए। ओ बखत मिनी माता जी, बघेल जी मन मोर समर्थन करिस। मोर फिलिम ल देखे खातिर बाबू जगजीवन राम जी ह तको पहुंचे रिहिन हाबे। फिलिम ल देखे के बाद मान. इंदिरा गांधी जी किहिन के ये तो सामाजिक बुराई उपर बने हाबे, अइसना फिलिम म प्रतिबंध लगाना ठीक नइहे। मिनी माता जी ह इंदिरा गांधी सो मोला मिलवइस अउ फेर पूरा देस म ‘कहि देबे संदेश’ के संदेश बगरिस।
• मनु के बेवहार म भारी परिस रूपिया
मनु नायक जइसन रोज कमइया रोज खवइया करा फिलिम बनाये के पुरती पइसा कहां रिही, मय तो उधार म रूपिया लेके ‘कहि देबे संदेश’ ल बनाये रेहेवं। अपन कंपनी म संगी-साथी मन संग जोन बेवहार बनाये रेहेवं ओकरे बदला म मोला लोगन उधारी देवय। सिरतोन मानो कतकोन कलाकार मन तो बिगर पइसा के काम करे हाबे, सिरिफ बेवहार के सेती। कहि देबे संदेश म मय सबले आगू सलिम जावेद ल हीरो अउ माधवी ल हिरोइन ले रेहेवं फेर कोनो करन से ओमन नइ आ पाइस। केऊ झिन बड़का कलाकार इहां के फिलिम विरोधी मनके सेती भाग-भाग गे। तभो ले मय हार नइ मानेवं। ओ समे पूरा फिलिम ल बनाये म लगभग सवा लाख रूपिया लागे रिहिसे जेकर कर्जा छुटत दू साल लागिस।
• मनु के परिवार
मोर पूरा परिवार ह बम्बई म रिथे। दू लड़का अउ तीन लड़की हाबे जेमा बड़े नोनी ह कालेज म प्रोफेसर हाबे अउ मंझली नोनी ह इहे हाबे रायपुर म हांडी पारा के परगनिहा परिवार म बिहा के आये हाबे। छोटे नोनी ह तको बम्बई म रिथे उहंचे लाइब्रेरीयन हाबे अउ दमांद बम्बई पुलिस म हाबे। लड़का मन ह नोनी मनले छोटे हाबे बड़े लइका हा मोबाइल कंपनी म रिजनल मेनेजर हाबे, बहु हा रिलाइंस कंपनी म काम करथे। छोटे बेटा ह जर्मन कंपनी म साफ्टवेयर इंजिनीयर हाबे अउ बहु ह इहंचे रायपुर ले गे हाबे। सबो झिन बम्बई म बढ़िया कमात-खात हाबे।
• मनु के घर म अऊ दूसर ‘नायक’ नइहे
मोर परिवार म लइका मनला खुदे मय जेन लाइन म हाबवं उहां नइ आवन दे हाववं। येकर गजब अकन कारन हाबे, पहिली तो उहां गजब संघर्ष करे बर परथे। हर मा-बाप चाहथे के ओकर औलाद मन सुख म राहय। महु भगवान सो अरजी करेवं के मय जोन दुबर दिन देखे हवं मोर लइका मन झिन देखे। इही पाके लइका मनला अलग-अलग लाइन धराये हाबवं। अऊ आगू फिलिम लाइन छोटे रिहिसे गिने-गिनाय तो स्टूडियो रिहिसे। बने काम नसीब वाला मनला मिले काबर के कतकोन ह लाइन म खड़े रिथे। अब टीवी अउ धारावाहिक के जमाना आये म कुछ काम ह जरूर बाड़हे हाबे, आगू मोर काम ल आगू बढ़ाने वाला नायक आही के नइ आही यहू ल नसीब उपर छोड़ देहवं।
Jayant Sahuअतका संघर्ष भरे अपन जीवन के कहानी ल फिल्म मेकर मनु नायक जी ह बड़ आत्म विस्वास के संग फिल्मकार चंद्रशेखर चकोर, डॉ. पुनीत सोनकर अउ अभिनेता शिव चंद्राकर, घनश्याम वर्मा संग म जयंत साहू संपादक अंजोर छत्तीसगढ़ी मासिक पत्र संग जाहिर करिस। ओकर कहानी ल सुनके हर कोई मनु नायक जी ल असल जिनगी म तको नायक मानत ओकर कारज के बड़ई करत हाबे। छत्तीसगढ़ी भासा खातिर जोन काम ल ओमन 1965 म करे हाबे ओकर मुकाबला कोनो नइ करे सकन। छत्तीसगढ़ के सिनेमा जगत अउ साहित्य बर इतिहास बनगे कहि देबे संदेश।
• संकलन- जयंत साहू
पता- डूण्डा वार्ड 52, पो./थाना सेजबहार रायपुर छ.ग. 492015
मो.- 9826753304
Email-jayantsahu9@gmail.com

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