आवा बचावव लोक कला ल : डॉ. सोमनाथ यादव



बिलासा कला मंच के संस्थापक अउ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्‍मानित डॉ. सोमनाथ यादव कला अउ कलाकार मन ल बढ़ावा देहे बर जाने जाथे। मंच ह कला के संरक्‍छन के दिसा मं काम करे के संग अइसे रचनाकार मन के किताब ल छापे हवै, जउन ल कोनो नई जानयं। उनखर काम ल देख के शासन हं डॉ. यादव ल छत्‍तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य बनाए रहिस। डा. यादव तिर अनुपम सिंह के गोठ. 

भास्‍कर : बिलासा कला मंच ल बने २२ बरस हो गे हवै। अतेक साल मं छत्तीसगढ़ी लोककला के स्थिति मं का परिवर्तन देखथव?

डॉ. सोमनाथ यादव : उपभोक्तावादी संस्कृति के परभाव जम्मो देस के लोक कला मं पड़े हावे। ऐखर परभाव हमरो राज के कला मं देखे जा सकत हे। गांव-जंगल के कला ल बचाए के कोसिस सहर मं करे जात हवय। जम्मो परदेस मं कई ठन अइसे संस्था बनाए गे हवय जउन लोककला ल बचाए के काम करत हवय। सरकार कति ले भी उंखर काम ल प्रोत्साहित करे जात हवय।

भास्‍कर : लोक कला के अस्तित्व ऊपर खतरा दिखथ हवय। गांव-गंवई के कला अब समारोह-आयोजन मं भर दिखथे। ऐखर संरक्षन कइसे करे जाए?

डॉ. सोमनाथ यादव : लोक कला के सुरक्षा बर ओखर मूल मं जाए बर परही। सुरक्षा के उपाय गांव-जंगल ले करे बर परही। अइसे जगह मं मनखे मन लं चेताए के काम करे के जरूरत हावय। फेर स्कूल-कालेज मं कला के पढ़ाई के संग अलग से कला ल बढ़ावा देहे बर स्कूल खोले जाएं। युवा मनखे ल कला के संरक्षन ले जोड़े बिना कला लं बचाए के विचार नई करे जा सकय। मंच हं दू सौ ले जादा किताब नवां लेखक मन ल प्रोत्साहन देहे बर छापे हावय।

भास्‍कर : मंच ह अरपा बचाओ अभियान चलाए रहिस, एखर का उद्देस्य रहिस।

डॉ. सोमनाथ यादव : अरपा बचाओ अभियान चलाए के पीछू अरपा के तट मं रहैया मनखे लं चेताना रहिस। उद्गम से लेके संगम तक मंच से जुड़े सब्बो संगी पदयात्रा करे रहिन। गांव-गांव मं सभा करके सब ल बताए गे रहिस के अरपा ल बचाए बर का काम करना चाही। आज ए काम ल सरकार अरपा विकास प्राधिकरण बना के करत हवय। फेर बिलासा कला मंच अपन काम ल कर देहे हावय। एइसने एक ठन काम बिलासा मइया के नांव मं सराब बेचे के विरोध बर करे गे रहिस।

भास्‍कर : छत्तीसगढ़ी ल राजभासा बनाए के अभियान चलत हवय। आपके मत का हावै।

डॉ. सोमनाथ यादव : छत्तीसगढ़ी ल राजभासा बनाए के समर्थन मं रहैया दू करोड़ मनखे करत हावय। छत्तीसगढ़ी भासा के मिठास दूसर राज के अइसे मनखे घलउ ल प्रभावित करथे, जउन मन काम-बूता करे बर इहां रइथें। ए राज के मनखे, भासा के असर अइसे हवै के आए के बाद कोनो दूसर जगह नई जाना चाहे। फेर प्राथमिक स्कूल मं छत्तीसगढ़ी ल पढ़ाई कराए के संग लइकन ल छत्तीसगढ़ी लोक कला, संस्कृति के जानकारी भी देहे जाए।


डॉ. सोमनाथ यादव जी के रचना मन ला आप उंखर ब्‍लॉग सुहई म पढ़ अउ सुन सकत हावव.
संगवारी, दैनिक भास्कर, बिलासपुर ले साभार

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