एकमई राखव परवार ला

आज घर ईंटा, पखरा, छड़, सीरमिट, रेती, गिट्टी, माटी, लकड़ी जइसन आनी-बानी के जीनिस ले बने ला धर लीच अउ परवार उजड़े ला धर लीस। परवार अइसन कोनो जीनिस ले नइच बनय। परवार पियार, मया, दुलार ले, भरोसा, आदर सम्मान ले बनथे। घर मा रहइया छोटे-बड़े के भाव ला समझे अउ समझाय ले परवार बनथ अउ चलथे। परवार सिरिफ चार-छै झन के सँघरा रहे के नाँव नो हे। एके सँघरा एके कुरिया मा रहे ले का होही जब इँखर बीच मन मा कोनो सोच विचार के मेल-मिलाप नइ रहय। मन मा मान-सम्मान के जघा गरब गुमान हा घर बनाय बइठे रथे जेमा खुद के छोड़ काखरो बर थोरको जघा नइ राहय। पहिली परवार के मतलब एकमई रहना हा होवय। आज एक घर मा तो रहिथन फेर एकमई नइ राहन का परवार इही हरय?
आजकाल एकमई परवार के जघा अकेला परवार के चलागत चलत हे। अकेला रहे के कतको कारन हे जइसे-: दुरिहा रहीके पढ़ई-लिखई फेर नौकरी अउ उपर ले बर-बिहाव। नवा बहुरिया के पहिली पसंद नान्हें परवार होथे। अइसन अकेल्ला जिनगी जीये ले समाज मा जीवन मूल्य मन हा नंदावत जावत हे। नैतिक सिक्छा गवाँवत जावत हे। लइका मन ला बड़े-बुजुर्ग मन के अनुभव के लाभ नइ मिल पावत हे। सियान के सिखोना अब कोनो नइ धरत हें काबर सब छदर-बदर रहत हें संग मा नइ। समाज मा सुमता हा छरियाय-छरियाय दिखथे। समाज नैतिक मूल्य के होवत कमी ले आनी-बानी के अपराध सरलग बाढ़ते जावत हे। घर परवार के अलग रहीके आज के जवनहा मन अपन लइका ला बड़ बने ढ़ंग ले पाल-पोस लेबो कहीके सोंचथे। बात तो सिरतोन हे के छोटे परवार ला पाले-पोसे मा जादा झंझट नइ होय फेर सिक्छा के संग संस्कार के अनमोल ग्यान एकमई परवार मा ही मिल पाथे अउ कहूँ नहीं। नैतिक जीवन मूल्य अउ संस्कार के पाठशाला एकमई परवार हा ही होथे। इही संस्कार के कमी के कारन आज सिक्छा सिरिफ पेट-रोजी कमाय के साधन बनके रहीगे हे। एक अच्छा इंसान के कमी समाज मा बाढ़तेच जावत हे। एखर एक कारन छोटे परवार के चलन।
आज के समे मा लइका के लालन-पालन सबले बड़े जिमेदारी हे। अपन ये जिमेदारी के निरवहन आज के जवहना मा खूब करत हें। अकेल्ला रहीके सिक्छा तो लइका ला देवत हें फेर एक जिमेदार आदमी नइ बना पावत हें। समाज मा बाढ़त अनैतिक कारज के कारन परवार के टूटना हा हरय। बाढ़त अपराध मा आज सबले जादा लइका मन सामिल होवत हें। चोरी, छिनाझपटी, हत्या, बलात्कार, मया-पिरीत के गलत मतलब, इस्कूल मा पढ़ई के बेरा मोबाइल, दाई-ददा के कहना नइ मानना आज समाज मा आम बात होवत जावत हे। इही बात ला धियान मा राखत संयुक्त राष्ट्र अमेरिका मा 1994 ला “अंतरराष्ट्रीय परिवार वर्ष” घोषित करे रहीन अउ 1995 ले सरलग मनावत आवत हें। संयुक्त राष्ट्र संघ हा घलो सन् 2015 मा हर बछर 15 मई के “विश्व परिवार दिवस” मनाये के निर्णय ले हे। एखर ए उदिम ले समाज मा परवार के महत्तम हे तेला समझे जाय, जाने जाय।
हमर भारत देश मा अकेल्ला रहे के बेमारी जादा संचरे नइ हे। आज घलो गाँव-गवँई अउ छोटे शहर मा अइसन कतको एकमई परवार हे जेमा कई पीढ़ी ले सँघरा रहत हें एकमईहा चूल्हा एकठन रंधनी मा जलथे। कम से कम एक बेरा के जेवन सबो सँघरा सुग्घर बइठ के खाथें। बिदेशी देखा-सीखी मा अकेल्ला परवार के चलन बाढ़त जावत हे। बिदेश मा दाई-ददा जइसन सियान मन बर तो वृद्धाश्रम के चलागत बाढ़त हे। उहाँ तो लइका जाने-समझे के लाइक होथे तहाँ अलग कमरा मा अलगिया देथे अउ आया के बेवसथा कर देथें। लइका अपन बाप महतारी के मया दुलार पाये बर तरस जाथे अउ एखरे परिणाम होथे परवार मा बिखराव। भले परवार समाज के सबले छोटे ईकाई हरय फेर एहा मिलजुल के एकमई रहे के, जुरमिल के सुमता ले समसिया के समाधान सिखोथे। एकमई परवार मा रहे ले एहू सुरता आथे के ए सरी संसार हा घलाव एकठन बड़का परवार हरय। सुमता, सलाह, सहजोग अउ सुरक्छा के भाव एकमई के सबले बड़े धरोहर हरय। ए धरोहर ला आज हर हाल मा सिझो के राखे के खच्चित जरुरत हावय।
भारत देश गाँव-गवँई के देश हरय अउ गाँव-गवँई मा परवार बसथे। इही परवार हमर भारत देश के पहिचान हरय। परवार के बिन भारतीय समाज के कल्पना करना बड़ मुसकुल बुता हरय। समाज मा सबो मनखे कोनो ना कोनो परवार ले जुड़े रथें। परवार मनखे के मूल हरय। समे के मार ले परवार टूटथे अउ बनथे घलाव फेर ए मूल संरचना मा कोनो फरक नइ पड़ीस हे। कतको विचारधारा समाज मा फूलीन-फरीन फेर परवार के विचार ला बदल नइ पाइन ना बदलै। हाँ एखर रंग-रुप भले एकमई ले अकेल्ला हो सकथे। परवार समाज के मूल हरय। परवार हर उमर के ला सुख, शांति अउ सुरक्छा देथे। एक असल परवार पति पत्नी अउ लइका के जिमेदारी तय करथे। बेटा बाप के संग आज्ञाकारी, महतारी संग अंतस के गोठ अउ सुवारी संग मया दया के भाखा एकमई परवार मा करथे। परवार सँघरा रहे के, सबके उछाह अउ उमंग के बँधना होथे। अकेल्ला रहई ला परवार नइ कहे जाय। परवार मा अधिकार के संग कर्तव्य अउ जिमेदारी हे। ए ला सबला अपन-अपन बाँटा के हिसाब ले निभाय ला परथे तभे परवार एकमई रही पाथे। आज टूटत परवार के मान अउ सम्मान ला बचाय के जरुरत हावय। अपन गरब गुमान ला तियाग के परवार के जिमेदारी उठाय ले परवार के अस्तित्व बाँचे रही। इही जिमेदारी के सुरता देवाय खातिर हर बछर 15 मई के “विश्व परिवार दिवस” मनाय जाथे।

कन्हैया साहू “अमित”
शिक्षक भाटापारा (छ.ग)
संपर्क 9200252055

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