कइसे होही छत्तीसगढ़िहा सबले बढ़िहा?

   

”सतरूहन या सतरोहन नाव त इसकूल म गुरुजी ह सुधार के शत्रुघन या शत्रुहन लिख देथे। अउ एक ठन छत्तीसगढ़ी नाव के राम नाम सत्त कर देथे। आज तक कोनो अइसना नाव लिखइया मनखे छत्तीसगढ़ म नई हे। भावना के छोड़ कोनो दूसर बात नो हे।”

 

छत्तीसगढिहा ल भाखा के रूप म प्रतिष्ठित करे बर बहुत कुछ करना बाकी हे।

सबसे पहिली तो हमला ये करना पड़ही के जइसे हमन बोलथन वइसने लिखन घलोक। सब्द मन म हिन्दी के परभाव ले सुधार करत जाबो त छत्तीगसढ़ी भाखा के भलई नइ होय। अभी हमर मन के दिमाग म नाव ल सुधार के लिखे के मानसिकता जरा जमाय हाबे। तेखरे सेती इस्कूल में जब मां-बाप मन अपन लइका के नाव लिखाय बर आथें अउ कथें मोर टुरा के नाव सतरूहन या सतरोहन हाबे तो गुरूजी मन अइसना कभू नइ लिखे, ओला सुधार के शत्रुघन, शत्रुहन नहीं ते शत्रुघ्न लिख देथे अउ एक ठन छत्तीसगडढ़ी नाव के ‘राम नाम सत्त’ कर देथे। मोर जानकारी में आज तक कोनो अइसना नाव लिखइया मनखे छत्तीसगढ़ म नई हे। ये हमर हीन भावना के छोड़ कोनों दूसर बात नो हे। बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु अउ कतको भाखा वाले के नावे ले पता चल जाथे के वोहर कोन परदेस के रहवइया आय। इहां हमन अपन आप ल छत्तीसगढिहा कहाय बर शरम करथन। तब हमर छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रतिष्ठा कइसे होही? ये बहुत बड़े सवाल हे। इहां मेंहर अउ दू- चार ठन नाव देवत हौं, जेन ला सुधार के लिखे के कारण छत्तीसगढ़िहा मन के चिन्हारी मुस्कुल हो जाथे। जइसे- लछिमन, हनमान, जुरजोधन, या दुरजोधन, बिसून। साक्छरता अभियान म घलोक जब हमन नव साक्छर मन ल नाव लिखे बर सिखाथन तो ‘विष्णु’ च लिखे बर सिखाथन।
एक ठन बात अउ हे, हमन कई ठन फालतू के बात म घलोक ओरझ जाथन। जइसे बहुत झन मन छत्तीसगढ़ी भाखा के लिपि बनाए के बात करथें। फेर मोर मानना हे के छत्तीसगढ़ी के अलग लिपि बनाय के कोनों जरूरत नइहे। अभी तक छत्तीसगढ़ी के जम्मो साहित्य देवनागरिच लिपि में लिखे गे हे। छत्तीसगढ़ी वर्णमाला के संख्या में जरूर अंतर हो सकथे।
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ ए, ओ औ, अं कुल 11 स्वर अउ क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, स, ह, ड़, ढ़ कुल 30 बियंजन। ये तरह ले वर्णमाला के 41 अक्छर ले छत्तीसगढ़ी के काम चल सकथे। तो आवव हम जम्मो छत्तीसगढ़िहा मन इही बात ल धियान में रख के छत्तीसगढ़ी ल प्रतिष्ठित करे बर सकला जान अउ सिरतोन के छत्तीसगढ़िहा सबले बढ़िया बनन।
जोहार छत्तीसगढ़।
दिनेश चौहान
शीतलापारा,
नवापारा-राजिम

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3 comments

  • हम तो पूरी बात ना समझ पईन का कहे ab

  • संगी हो,गुरतुर गोठ मा बड सुग्घर गोठ चलत हवे, लेखक मन से मोर डंडा सरन प्रिराथाना हवे,आप मन अपन लेख के संगे मा कठिन छात्तिस्गादी सब्द के हिंदी मायने भी लिखे के प्रयास करहु ता हमर दुसर भासा के संगी मन हा घलोक समझ सकते,निर्मला जी के तिपनी ला पधेवं ता सुरता आइस ,ये भासा के परचार बर बने होही ,अऊ आपके संदेस ला सब झन समझही ,
    आपके
    ललित शर्मा

  • शकुन्तला शर्मा

    ललित भाई ह बने बात ल उठाए हे , हमीं मन जब छत्तीसगढी बोले बर लजाबो तव कोन हर छत्तीसगढी बोलही भला ? फेर मोला दिखथे ग के छत्तीसगढी के भविष्य ह उज्जर हे । अइसे समय आने वाला हे के हमर छत्तीसगढी हर दुनियॉं भर म जाने जाही माने जाही अउ संहराए जाही ।

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