कबिता: न ते हारे न में जीतेंव

सनीमा वाला
बरसात मा
‘आग ही आग’ लगाथे
जड़कला मा
‘हिमालय के गोद मा बिठाथे
गर्मी मा’
‘बिन बादल बरसात’ ल कराथे
टोकबे त कहिथे
ऐमा तोर ददा के का जाथे!
स्टेशन मास्टर
स्टेशन मा लिखाये रहिथे
फलाना गाड़ी कब आही
अऊ कब जाही
ये रहिथे पहिली से सेट
कभू गाड़ी ह हो जाथे लेट
त पूछबे त कहिथे
टाइम टेबल नहीं रही
त तेंह कइसे जानबे
गाड़ी ह राईट हे या लेट
हरखराम पेंदरिया ‘देहाती’
श्रीराम मंदिर रोड
महासमुन्द

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