करगा – [लघु-कथा संग्रह ] समीक्षा

छत्तीसगढी – महतारी ला धनी – मानी बनाए के उजोग मा कतेक न कतेक वोकर सेवक मन लगे हावैं । वोमन साहित्य के जम्मो विधा म अपन लेखनी ला चलावत हावैं । एकरे गुरतुर फल देखे बर मिलत हे कि आज छत्तीसगढी – भाखा म साहित्य – लेखन के जम्मो विधा म , एक ले आगर एक कृति – मन छपत जात हावैं , फेर आज के जुग हर ” स्मार्ट – जुग ” ए , जतका छोटे मा परफॉरमेंस मिल जावय , वोतके बढिया लागथे । जादा पढे बर नई परय फेर मजा ओतके आ जाथे । एकरे सेती आज, साहित्य मा ‘हाइकू’ – ‘लघु- कथा’ के चलन हर बढत जात हावय । आघू पढ़व

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