कविता : नोनी बर फुल





नोनी बर फुल ….
घर के अंगना म फुले हे कनेर के फुल
पिअर -पियर दिखत हे डाली म झुलत हे
नोनी ह देख के दाई ल पुचकारत हे
खिलखिलाके हांस के बेलबेलावत हे
अंचरा ल दाई के खिंच – खिंच के फुल ल बतावत हे
दाई भुइंया म बैठ के दही ले लेवना निकालत हे
दाई नोनी के इसारा ल समझ नई पावत हे
नोनी अंगना म घूम -घूम के फुल ल बतावत हे
नोनी स्कुल जाए के बेरा म बेनी ल बतावत हे
दाई के सुध आगे अंगना म फुले कनेर म
देखत -देखत नोनी ल समरावत हे
घर के अंगना म फुले कनेर के फुल ल
ओटी म टोर दारिस नोनी के बेनी म फुंदरा कस गुथ दारिस
नोनी होगिस खुश नोनी चलिस सरपट स्कुल
फुल रे फुल
नोनी बर फुल

– लक्ष्‍मी नारायण लहरे

(बालकवि शंभू लाल शर्मा के किताब ल लेके भाई लक्ष्‍मी नारायण लहरे जी के लिखे कविता)







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