कवित्त

Arun Nigamहमरेच खेत के वो चना ला उखनवाके
हमरेच छानी-मा जी होरा भुँजवात हे
अपन महल-मा वो बैठे-बैठे पगुरावै
देखो घर-कुरिया हमर गुंगवात हे.
जांगर अउ नांगर ला जाने नइ जिनगी-मा
सफरी ला छीये नइ दूबराज खात हे
असली सुराज के तो मँजा इहि मन पावैं
सपना सुराज के हमन ला देखात हे..

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग [छत्तीसगढ़]

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