कान्हा मोला बनादे : सार छंद

पाँख मयूँरा मूड़ चढ़ादे,काजर गाल लगादे|
हाथ थमादे बँसुरी दाई,मोला किसन बनादे |

बाँध कमर मा करधन मोरे,बाँध मूड़ मा पागा|
हाथ अरो दे करिया चूड़ा,बाँध गला मा धागा|

चंदन टीका माथ लगादे ,ले दे माला मूँदी|
फूल मोंगरा के गजरा ला ,मोर बाँध दे चूँदी|

हार गला बर लान बनादे,दसमत लाली लाली |
घींव लेवना चाँट चाँट के,खाहूँ थाली थाली |

दूध दहीं ला पीयत जाहूँ,बंसी बइठ बजाहूँ|
तेंदू लउड़ी हाथ थमादे,गाय चराके आहूँ|

महानदी पैरी जस यमुना ,कदम्ब कस बर पीपर |
गोकुल कस सब गाँव गली हे ,ग्वाल बाल हे घर घर |

बाग बगीचा लगे मधूबन,हे जंगल अउ झाड़ी|
बँसुरी धरे रेंगहूँ मैंहा ,भइया नाँगर डाँड़ी|

गोप गुवालीन संग खेलहूँ ,मीत मितान बनाहूँ|
संसो झन तैं करबे दाई,सँझा खेल के आहूँ|

पहिरा ओढ़ा करदे दाई ,किसन बरन तैं मोला|
रही रही के कही सबो झन,कान्हा करिया मोला|

पाँव ददा दाई के परहूँ ,मिलही मोला मेवा |
बइरी मन ला मार भगाहूँ,करहूँ सबके सेवा|

कदम्ब बिरवा मा चढ़ दाई ,बँसुरी मीठ बजाहूँ |
दया मया ला बाँटत फिरहूँ ,सबके भाग जगाहूँ|

जीतेंद्र वर्मा “खैरझिटिया”
बालको (कोरबा )


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