काम काजी छत्तीसगढ़ी, स्वरूप, अउ संभावना

Sharma

शुरूवात ला पहिले देखे जाये तो छत्तिसगढ़ ला अलग राज बनाये खतिर बहुत पसीना बहाइन, जउन मन मेहनत करीन अपन सब काम काज, घर गृहस्थी के व्यवस्था ला छोड़-छोड़ के। आखिर सफल होइन अउ छत्तिसगढ़ राज्य बना के दम लेइन।

अब ध्यान गेइस राज भाषा बनना चाही, उहू हमर सियान मन के प्रयास से आखिर बन गे। इहॉं तक कि छत्तिसगढ़ राजभाषा आयोग छत्तिसगढ़ शासन के गठन भी होगे। ऐ हर तो ओखर दर्पण जैसे स्वरूप बन के तैय्यार होगे।

स्वरूप के दर्पन ला खाली देखे में काम नई चलय, ऐखर सच्चा स्वरूप ला लाय बर प्रचलन अउ व्यवहार बर बहुत मेहनत करे बर परही सुरूवात कैसे कइसे करबो? पहला गुरू मा होथे। लइका मन ला नान पर से घर में छत्तिसगढ़ी बोल-बोल के आदत डाले बर परही। काबर के बहुत झन दाई ददा मन गांव से शहर घर ले हाबय कोनो काम काज, नौकरी खातिर तो सियान मन, नाती पोता के दुलार सेती। लइका पढ़ावत हे अंग्रेजी स्कूल, में। रहात हे शहर में बोलत हैं अंग्रेजी अउ हिन्दी। छत्तिसढ़ी भाशा गवा गे। तो पहली बात घर में दाई-ददा ला छत्तिसगढ़ी बोलना है। दूसरी बात जब भी हमन आपस में बात करबो ऑफिस में, बाजार में, मोबाइल में तब हमन राजभाषा छत्तिसगढ़ी में गोठियाबो, लोक लाज या अपन झिझक ला भूला के। एक नवा प्रतिज्ञा या जवाबदारी समझ के। आप देखत हो हू कि मराठी, तेलगू, पंजाबी, सिन्धी भाई मन एक दूसर से अपने भाषा में गोठ बात करथे। अउ हमन बोकोर-बोकोर ओखर डाहर देखत रहिथन। यहॉं तक कि मैं अपन नौकरी मे समय में देखेव बी.आर.पी. भिलाई में कुछ उद्घाटन के कार्यक्रम रहिस ओमा रूस के पहुना आय रहिस ओ हा अपन भासन रूसी भाषा में देवय अउ संगे-संगे एक जन भाई लोग हा हिन्दी, अंग्रेजी में ओला समझावत जाय। ऐ ला कइथे भाषा प्रेम, वो हर चाहतीस तो अंग्रेजी या हिन्दी में भी बोल सकत रहिस हे। तौ स्वरूप ला सुंदर बनाय खातिर बोलना, संभव होइस तो लिखना अउ ऐखर गहराई में शब्द कोश, हाना, ददरीया, सूआगीत, गौरा गीत बिहाव गीत, समधीगारी ऐला प्रचलन में लाय बर परही। अब तो प्रचार प्रसार बर मिडिया, समाचार पत्र, केसिड सबो आ गेहे।

आयोग ला अपन काम करन दौ। हमन तो ओखर हाथ पाव अन, हमी मन सुन के, पढ़ के सुत जबो तो पिछड़ जबो। माला ला बनाय बर एक-एक फूल ला गूथना पड़ थे। वैसनहा हम सब के प्रयास हो ही तब छत्तिसगढ़ी भाषा के सुंदर स्वरूप ला चमक लगही। बत आगे संभावना बढ़त जाही। ओड़िस में मैं देखेव कछेरी में ऑफिस में ओड़िया भाषा में अक्षर ला देखेव तो सीधा जलेबी अउ उल्टा जलेबी असन लिखाय रहाय नोट शीट, अउ सबो कागज ओड़िया भाषा मा लिखा पढ़ी हो थे। हमरो इहॉं धीरे धीरे छत्तिसढ़ी भाषा में काम-काज हो ही। अउ प्रचलन मा आही। जब प्रचलन में आ जही तब ऐखर स्वरूप ला जगमगावत देखे बर मिलिही। शुरू में सब काहय येखर शब्द कोश नई ये, ऐखर प्रचलन में व्यवहारिक कठनाई हाबय अब लौ शब्द कोश बन गे। अब कोनो ला बोले के मौका नईये।

जब आगे कोनो ला बोले के मौका नईये। जब आगे-आगे छत्तिसढ़ी भाषा के सरकारी काम-काज साथ मा गैर सरकारी संस्था में प्रयोग, हमन मन के लेख, पत्र कारिता, बोल चाल, हा गति पकडही तब येखर संभावना के भंडार हा समझ में आ ही संभावना के सागर में अभी तो शुरूवात ये। आगू-आगू जाव सफलता के जोत हा कतका अंजोर हो ही। तब सब कहहीं – छत्तिसढ़ीया – सब ले बढ़ीया।

रामनारायण शर्मा
मैनेजर (मॉडर्न मेडिकल इंस्टिट्यूट, रायपुर)
क्वार्टर नंबर 14/बी,स्ट्रीट – 18 सेक्टर 7
भिलाई नगर, भिलाई
फोन नं. – 0788 – 2222348

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