गज़ल : छत्‍तीसगढ़ी गज़ल संग्रह “बूड़ मरय नहकौनी दय” ले 4

बाबा हर सरकार ल रामलीला ले चुपे-चुप चेताइस हे
जनतंत्र के महत्व ल गॉंधी के भाखा म समझाइस हे।

बाबा तैं अकेला नइ अस देश तोर संग ठाढे हावय
देश ह सत्याग्रह ल आज तोरेच कंठ ले गाइस हे ।

बाबा तैं फिकर झन कर जनता जाग गए हावय
जयप्रकाश के ऑंदोलन हर आज रंग लानिस हे ।

राज करत – करत आज शासन हर दुस्शासन होगे
मिश्र सरिख माहौल आज हमर भारत म आइस हे ।

‘ शकुन ‘ जा तहूँ हर गेरुआ टोपी ल पहिर के आ जा
करिया अंग्रेज ल बिदारे ब गॉंधी गेरुआ पहिरे आइस हे ।

शकुन्तला शर्मा , भिलाई [ छ ग ]
shaakuntalam.blogspot.com

“बूड्र मरय नहकौनी दय” (छत्‍तीसगढ़ी गज़ल संग्रह) से

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