गीत : सारी

मोर सारी परम पियारी गा

र‍इपुरहिन अलग चिन्हारी गा

कातिक मा ज‍इसे सियारी गा

फ़ागुन मा ज‍इसे ओन्हारी गा

हाँसय त झर-झर फ़ुल झरय

रोवय त मोती लबारी गा ॥

एक सरीं देह अब्बड दुब्बर

झेलनाही सोंहारी जस पातर

मछरी जस घात बिछ्लहिन हे

हंसा साही उज्जर पाँखर

चर चर ल‍इका के महतारी

फ़ेर दिखथय जनम कुँवारी गा ॥


लेवना साँही चिक्कन दिखथे

कोयली साँही गुरतुर कहिथे

न जुड सहय न घाम सहय

एयर कन्डीसन म र‍इथे

सरदी म गोंदा फ़ुल झँकय

गरमी म भाजी अमारी गा ॥

आँखी म क्लोरोफ़ार्म हवय

विन्टर मा घलो वार्म हवय

नुरी पिक्चर के हिरो‍इन

साँही जौंहर के चार्म हवय

अपने घर सेंट इतर चुपरय

महकय चार दुवारी गा ॥

दानेश्वर शर्मा

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