गुरतुर गोठ (गीत) सुकवि बुधराम यादव

तोला राज मकुट पहिराबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा
तोला महरानी कहवाबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा
तोर आखर में अलख जगाथे भिलई आनी बानी
देस बिदेस में तोला पियाथे घाट-घाट के पानी
तोर सेवा बर कई झन ऐसन धरे हवंय बनबासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

रयपुर दुरुग ले दिल्ली तक झंडा तोर लहराथे
साँझ बिहनिया बिलसपुरिहा डंका तोर बजाथे
आज नहीं तो कल भले फेर मन के मिटे निरासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

रायगढ़ सारंगढ़ सरगुजा जसपुर के जमींदारी
कोरबा कोरिया चांपा जांजगीर तोर जबर चिनहारी
कबीरधाम के सत में अरझे अढाई करोड़ के आसा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

अम्बिकापुर बैकुंठ के अम्बर अड़बड़ घहराथे
हमरे मनखे बैरी बन हमरे घर दवां लगाथे
अंगरी पकडत पहुंचा पकडीन बेंदरा करिन बिनासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

नांदगांव के नाव बुडे झन आवा मंतर साधी
मानपुर मोहला मा लाये परही जोरहा आंधी
बैलाडीला के पक्का लोहा जइसन बिस्वासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

धनवंता धमतरी बन्धाइस महानदी गंगरेल
रायपुर महासमुंद हबरथे पानी रेलमपेल
बूंद-बूंद मा जेकर समाये गरीब दुबर के स्वांसा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

कांकेर बस्तर दंतेवाडा पसरे सुघर हरियारी
भटके भुलाए ला रद्दा देखाबों सुमता मा संगवारी
उंकर मन आए भरम के करबोन हम निकासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

रतनपुर के महमाया अउ डोंगरगढ़ बमलाई
दंतेवाड़ा के बनदेवी संबलपुर समलाई
शिवरीनारायण पीथमपुर पलटे किस्मत के पासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

अरपा हसदेव पैरी खारुन इन्द्रावती के धारा
शिवनाथ के तीर में निसदिन गूंजे तोर जयकारा
अर्ध कुम्भ राजिम मा आके देवतन भरे हुलासा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

तैं गुरतुर तोर आखर ले जानव मधुरस चुचवाथे
बोलईया छत्तीरसगढिया के सिधावापन बड़ भाथे
असली हीरा देवभोग के नोहय पीतल कांसा
ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

सुकवि बुधराम यादव

बिलासपुर

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    शिवनाथ के तीर में निसदिन गूंजे तोर जयकारा
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    ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

    तैं गुरतुर तोर आखर ले जानव मधुरस चुचवाथे
    बोलईया छत्तीरसगढिया के सिधावापन बड़ भाथे
    असली हीरा देवभोग के नोहय पीतल कांसा
    ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा….

    सिरतोन म छत्तीसगढ़ अउ एखर बोलवैया मन ला समर्पित ….
    सादर प्रणाम “सुकवि” अउ गुरतुर गोठ ला.

  • मोर भाषा के मान बढईया, मोर हिरदे म परेम जगईया अउ मोर मुकुट के लाज रखईया ये कबिता मोर अंतस मा भींजे जात हे …..

    प्रणाम आदरणीय, आपके ये कबिता हमर मन में जोस ला दूना चउगूना बढा दीस

  • छत्तीसगढ़ के साहितकार आदरणीय लखन विश्वकर्मा जी तिफरा बिलासपुर ले नेट पतरिका “गुरतुर गोठ” बर अपन जौन बिचार रखे हें जस के तस आदर सहित इंहा परस्तुत हवे…
    ” अबड़ सुघर लागिस देखे अउ जाने में के इन्टरनेट में छत्तीसगढ़ पत्रिका “गुरतुर गोठ” शुरू हो गे हे. छत्तीसगढ़ राज अउ छत्तीसगढ़ राजभाषा बने के येही कहिन तव सहीं फायदा आय. आज के बिग्यान के जमाना में रेडियो, टीवी, अउ कंप्यूटर ले आदमी के गोठ बात अउ बिचार जमो के जुडाव जरुरी हे . तभे समे के संग बिकास होये पाही . भाई संजीव तिवारी अउ भइया बुधराम यादव लोक गीतकार अपन भाखा अउ माटी के जबर सेवा के भाव राखैया मन बहुत बधाई के भागी हवंय. जौन के जबर बड़ कारज करेबर जोम धरे हवंय.”

  • जम्मो छ्त्तीसगढ के आसा ,हमर छ्त्तीसगढी भाषा ॥

    स‍इघो कविता सुघ्घर है कोन ल‍इन ला लिखे जाये !!बस पवन दिवान जी के लाईन याद आगे कि

    घोर अंधेरा भाग रहा है छ्त्तीसगढ अब जाग रहा है !!

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