चउतरा सेठ

dinesh chaturvediसंगवारी हो दुनिया म गजब गजब के मनखे रइथे। कोनो बड़ सिधवा होथे त कोनो बड़ टेड़वा। टेड़वा मनखे के मति के कोनो ठिकाना नइ रहय। कभू भी कहूं ल ठग देथे। चउतरा मनखे ह भगवान घलो ल नइ छोड़य। एकबार एक चउतरा सेठ ह डोंगा म बइठके बेपार खातिर यातरा करत रहिस। यातरा के बेरा डोंगा जब नदी के ठीक बीच म पहुंचिस तिहा जोरदार हवा गर्रा सुरू होगे। अब तो डोंगा म बइठइया मन के जी उड़ियागे। कइसे बांचबो कइसे बाचबो कहे लगिस। डोंगा अभी पानी म डुबे नइ रहिस ओखर पहिली जमो के जमो संसो म डुबगे। जेन ल मरे के बेर जादा डर लागथे ओहा जादा पापी होथे। काबर के पापी ल ए जनम म तो पाप करे के बेर बड़ आनंद आय रहिथे लेकिन जब मरे के बाद ओखर पाप के फल भोगे के बारी आथे त जी ह कांप जाथे। चउतरा सेठ ल मरे ले डर सब ले जादा लागत रहिस। मरनी के बेर भगवान ह बड़ सुरता आथे। आय देखिस न ताय अऊ जमो के बीच म आकास कति देखके सेठ कहिस के हे भगवान मोर परान बचाने वाला सिरफ तंइ दिखत हस। हे परभु में किरिया खावत हौं अब कुछु बइमानी नइ करव अऊ मोर घर दुवार ल बेचके जतका पइसा मिलही सब तोर मंदिर म दान दे दिहा अऊ तोर भजन करत जिनगी fजंहा। सेठ भगवान ल मनाय के पुरा परयास करिस। अचानक हवा गर्रा रूक जाथे तिहां सेठ मने मन परसन होथे के मैं बांचगे। डोंगा म बइठे मनखेमन सेठ ल कहिस के सेठ जी तू किरिया खाय ह के घर दुवार ल बेचे के बाद जतका धन दऊलत मिलही जमो ल दान दिहुं। सेठ तो अब पछताय लागिस के किरिया खाय ब तो खा देहे लेकिन अब काय करौं। घर दुवार नइ बेचहूं त गांव वाला मन लड़ही अऊ बेंचहू त मोर का होही। दु तीन दिन ले सोचे के बाद चऊतरा सेठ के मन म एकठन गजब के उपाय आइस। गांव के मनखे मन गांव म हाक पार देहे रहिस के सेठ अपन घर दुवार बेचके दान पुन करही। सेठ गांव अऊ तीर तखार के सहर म गोहार लगवा दिहिस के मेंहर अपन घर के बोली करइया हौं। जेन लेना चाहत हे आ जाय। बड़ दूरिहा दूरिहा के मनखे मन बोली लगाय आय रहिस। सेठ अपन घर के फइका मेर एकठन बिलाइ घलो ल बांध दिहिस। जमो अकबकाय रहिस के बिलाइ ल सेठ दुकान म काबर बांधे हे। बोली सुरू होय के पहिली सेठ सरत रखिस के मोर घर के भाव दस रूपिया ले सुरू होही अऊ दुवार म जे बिलाइ हे ओखर भाव एक लाख रूपिया ले सुरू होही अऊ लेवइया ल दूनो लेहे बर परही अकड़ा नइ मिलय। जमो के जमो बोली लगइया मन आंखी फारके देखत रहिन के ए सेठ ह बइहा गेहे का। बोली सुरू होइस आऊ चार लाख चालिस रूपिया म घर बेचा गिस। सेठ मंदिर म जाके चालीस रूपिया दान म दे दिहिस अऊ चार लाख ल बेंक म जाके जमा कर दिहिस। गांव वाला मन कहिन के सेठ तोर घर तो चार लाख चालीस रूपिया म बेचाय हे अऊ दान सिरफ चालीस रूपिया करे हस ए तो अनियाव ए। सेठ गांव वाला मन ल कहिस के देखा भाई मोर घर तो चालिस रूपिया के होइस अऊ मोर बिलाइ ह चार लाख रूपिया के। मैं किरिया खाय रहें के मोर घर जतका भाव म जाही ओ सबला दान देहूं। बिलाइ के बात मैं नइ करे रहेंव। चऊतरा सेठ मनखे तो मनखे भगवान घलो ल ठग दिस।
संगवारी हो आज जमाना बदल गेहे। कलिजुगी मनखे कोकरो नइ होय। कोकरो भरोसा करना अपन आप ल ठगना ए। एखरे सेति लिखथौं –
‘‘घर घर के घुरवा ले देखा जघा जघा कचरा होगे
सरधा भक्ति ल ढोंग खादिस देवता मन पखरा होगे
समझ म नइ आवत हे जमाना अतेक बदलगे जी
काकर करिन भरोसा संगी अबके हरिसचंद लबरा होगे।’’

दिनेश रोहित चतुर्वेदी
खोखरा, जांजगीर

परिचय

1 नाम :- दिनेश कुमार चतुर्वेदी
2 पिता का नाम :- रोहित कुमार चतुर्वेदी
3 व्यवसाय :- नौकरी (व्याख्याता पं.)
4 उम्र :- 26 साल
5 पता :- मु़. पो.- खोखरा, तह. – जांजगीर, जिला – जांजगीर
चांपा (छ. ग.)
6 मो. नंबर :- 9617905417 ¼what’s up no- 8120528100½
7 ई मेल :- dineshmahraj@gmail.com
8 अघ्ययन मे रूचि :- साहित्यिक पुस्तके, पत्र पत्रिकाएं।
9 किन लेखको की किताबे पढ़ चुके है:- कबीर, सुर , तुलसी, घनानंद, जयशंकर, निराला, पंत, महादेवी, अज्ञेय, मुक्तिबोध, भीश्म साहनी, प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ, धर्मवीर, मोहन राकेश, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद, पूर्णसिंह आदि।

10. रचनाएं यदि प्रकाशित हो:- हरिभूमि के चौपाल, नवभारत के अवकाश अंक, पत्रिका के पहट, भास्कर के संगवारी, पंचायत की मुस्कान, ज्वाज्वल्या पत्रिका, छत्तीसगढ़ स्पेक्ट्रम आदि पत्र पत्रिकाओं मे छत्तीसगढ़ी व हिन्दी कविता, लेखो का प्रकाशन।
11. कोई पुरस्कार :- मिनीमाता नारी गौरव अवार्ड, ज्वाज्वल्यदेव साहित्य सम्मान, बैरिस्टर छेदीलाल सम्मान।

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One comment

  • सुनिल शर्मा "नील"

    अड़बड़ सुग्घर अउ सन्देश देवत कहिनी हे भाई…बधाई हो

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