चरभंठिया को गोठ

‘जब ठाकुर मरीस तहन ठकुरइन ऐके झन होगे दू झन लइका इंकरो मया मोला धर खइस रे। तब ठकुरइन एक दिन मोला किहिस तेहा मोर खेत खार सबो ल सम्हाल मेहा एकर बदला में तोला दू एकड़ खेत दुहु।’
गरमी के दिन राहय बिहने ले झऊंहा, रापा, कुदारी अउ पेज ल धर के बिरझू माटी डारे बर ठकुरइन के खेत म जात हे ओला देख के पेट पोसवा नौकर ह कथे बबा तेहा रोज दिन माटी डारे बर जाथस तोला ठकुराइन ह दूसर काम नई बताय बिरछू बबा ह कथे मोला काय काम बताही रे मेहा तो इंकर घर कमात-कमात बूढ़ा गेंव। जवानी के मेछा के रेख नई फूटे रिहिस तब के इंकर घर नौकर लगत हो पहिली के काम म बड़ मजा आय रे अब तो नौकर चाकर मन सुखीयार होगे। गोठ बात करत बिरछू बबा अउ पेट पोसवा टुरा ह रेंगत-रेंगत माटी खने बर चल दीन अउ खेत ल खनत-खनत गोठ बात चलत रहय पेट पोसवा टुरा ह कथे बबा बड़े ठाकुर ह कब के मरे हे ग? बिरछू बबा ह कथे झन पूछ बाबू ओहा भरे जवानी म मरे हे। रोज दिन मंद मऊंहा ताय। दू झन लइका होइस ठकुराइन ह एक झन टुरी अउ एक झन टुरा। ठीबीक ठाबक रेंगत रिहिस तब के मरे हे। पेट पोसवा कथे बबा ठकुराइन ह अउ नई बनइस ग। नई बनअस रे अतिक खेती खार ल छोड़ के बनातीस ते कइसन घर मिलतीस न बइसन, नई बनइस रे। पेट पोसवा कथे बबा बड़े ठकुराइन अभी ले बड़ सुन्दर हे ग। बबा कथे सुन्दर तो हावे रे। तभे तो मेहा आज ले कमात हो। पेट पोसवा कथे वा… बबा…
बिरछू कथे नौकर नई कमात हो कारे। पेट पोसवा कथे बबा पहिली बड़ महिनत करव न ग। हव रे पहिली के कमई ल आज के सुखीयार मन नई कर सकव। कइसे बबा। झन पूछ रे चार बजे रातकुन दौरी फांदन, दौरी हांकत, हांकत पहा जाय। भाड़ा भुसाड़ा बेखत मुंधियार हो जाय गाड़ा लात ले। पांच के बजत ले गोबर कचरा, पानी, कांजी सब हो जाय रे। अब के सुखीयार मन ल चार बजे उठाबे ते नई उठे। नवा बाई आहे सुतन दे कही। मोला आज ले ठकुरइन ह नई तियारीस, पेट पोसवा कथे बबा तोला ऊपराहा बनी दे होही। बबा कथे ओला झन पूछ रे अकल लगा के कमाबो तब मिलबे करही, मालकीन ह घलो हमला पूछे बिगर आड़ी के काड़ी नई करे। कहीं कुछु बने असन खाय पिये के बने तब मोला पक्का देतीस। अउ काबर नई दिहि रे। महु तो ओकर सबो काम ल पुरा करंव। पेट पोसवा कथे बबा तेहा इंकरेच घर नौकर लगत लगत बुढ़ा गेस दुसर ठाकुर घर काबर नई लगेस ग। बिरछू कथे ओला काला बतावो रे। जब ठाकुर मरीस तहन ठकुरइन ऐके झन होगे दू झन लइका इंकरो मया मोला धर खइस रे। तब ठकुरइन एक दिन मोला किहिस तेहा मोर खेत खार सबो ल सम्हाल मेहा एकर बदला में तोला दू एकड़ खेत दुहु किहिस। अउ ठकुरइन पहिली ओसने गोरी नारी बड़ सुन्दर रहय रे। तब मेहा काबर दूसर ठाकुर खोजतेंव अतिक सुख ठकुरइन ह देत हे तेला लात मार के दुसर घर मरे बर थोड़े जातेंव रे। पेट पोसवा कथे सही बात आय बबा, बड़ सुख भोगे हस तेहा। बिरझू कथे मेहा धन के गरीब रेहेंव, तन के गरीब नई रेहेंव रे। मोर जवानी में जब खुड़वा खेले जान। त मोर तीर में आयबर डर्राय रे। छै फिट के काया, जेहा, तीर में आय, वोहा फरक नई खाय, पेट पोसवा कथे बबा तेहा ठकुरइन ल घुमाय बर लेगस नहीं ग। अरे झन पूछ रे। तीर तार के गांव के एको मढ़ई मेला नई बांचे हे। पहिली चापड़ा वाले गाड़ी बइला म घांघरा, अउ जिल्ला बांध के जब मेहा बइला हांको त। बइला ह भागे खन-खन, खन-खन ठकुराइन अब लइका मन पिछू म बइठे रहय पहिली बइला गाड़ी के घलो अब्बड़ मजा आय रे। अब तो कही जाना हे तामोटर में भुर… के नहीं तो अब तो घरो घर फरफट्टी आगे फेर हमर सही मजा मोटर वाले मन कहां पा हे रे। पेटपोसवा कथे सही बात आय बा। ठकुरइन ह कीाू खाय ल दे तब दार में ठोमा भर घींव ल डार दे। दहेल के किल्लो भर भात खा जावो। फेर ओइसने कमावों घलो भई। अब के सुखीयार मन कहां पाहू रे। धान लगाय बर मिशीन आगे, मिंजे बर मिशीन आगे, इहां तक उड़ाय बर घलो मिशीन आगे पहिली अइसन कहां पाबे। पहिली बर बिहाव होय चार दिन ले अऊ बरात घलो गाड़ा बइला में जान नहीं ते रेंगत-रेंगत पहा जाय। अब तो एक दिन में बिहाव, बरात जाय बर मोटर गाड़ी सब काम चोखा। मोला तो लागथे रे अब तुम्हर खाय बर घलो मिशीन आ जाही तइसे लागथे। पेट पोसवा कथे सही बात आय बबा बिरछू बबा कथे।
तेला अपन शान शाकत म हावे गुरूर।
त मोला अपन गरीबी मनाज हे॥
शेख चंद मेरिया ‘चरभंठिया’
सड़क नं. 1 मकान 64
महाराष्ट्रमण्डल के सामने
कसारीडीह दुर्ग

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