चिरई चिरगुन बर पानी निकालव





मनखे जनम बड़ भागमानी आय।चौरासी लाख योनी म इही जनम ल पुन पाय के भाग मिलथे। पुन कमाय बर जादा मिहनत करेबर नई परय।हमर बेद पुरान म सुघ्घर ढंग ले संदेस देय हावय भूखे ल भोजन, पियासे ले पानी अऊ सगासोदर के मानगऊन अतका म अबड़ेच पुन मिल जाही। मनखे मन के संगवारी म गाय गरु, कुकुर बिलई संग चिरई चिरगुन घलाव आय। घाम पियास के दिन आ गेहे। गरमी के सेती रुख राई के पाना सुखाके झरगे। दूसर कोती कुंआ बाऊली नंदावत जावत हे,अऊ जेन हावय ओखर पानी अटावत हे।तरिया सुखावत हे। अइसन मे मनखे अपन खाय पीये बर कहिचो ले पानी के बेवस्था कर डारथे फेर संग में रहईया गाय गरु, कुकुर बिलाई ल फेंकावत पानी ल दे देथे। फेर सबले जादा दुख चिरई चिरगुन ल हो जाथे।पहट बिहनिया ले दाना पानी बर निकले रथे । रुख राई के छईहां नई पावय त हमर घर के छानी ओरछा म आ के थिराथे बईठथे। इही बखत पानी मिल जाथे त ओकर जी हरिया जाथे। भगवान के बनाय जीव ल पानी पियात देखथे त ऊपर वाला के आसीस मिलथे। छोटे मोटे बहुत अकन जीव ह मनखे के आसरित आय।अपन डेरौठी,छज्जा, बारी बखरी म टुटे फूटे बरतन म चिरई चिरगुन बर पानी जरुर निकालव।

हीरालाल गुरुजी”समय”
छुरा, जिला- गरियाबंद






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