छत्तीसगढ़ी गज़ल

सब्बो मतलबी यार होगे।
तब्भे तो बंठा – धार होगे।

मनखे मन मनखे ला मारिस
इज्जत हर तार-तार होगे।

धर लिन रद्दा बेटा मन सब
परिया खेती – खार होगे।

सावन, भादो, कुँवार निकले
बादर हर अब बीमार होगे।

कुतर-कुतर के खा लेव जम्मो
मुसवा हमर सरकार होगे।

साधु बबा हर जेल म चल दिस
गाँव – गली म गोहार होगे।

बलदाऊ राम साहू
9407650458



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