छत्तीसगढ़ फिलिम के दर्सक ग्रामीण

छत्तीसगढ़ी फिलिम पीटावत काबर हे? ये सवाल खड़े हावय- काय निर्माता निर्देशक मन स्तर के फिलिम नई बनावत हे? हमर निर्माता निर्देशक मन बहुत बढ़िया गीत, संगीत, कथा, पटकथा, हास्य, रचनावत हे। उच्च तकनिक के उपयोग होवत हे। कोरी-कोरी कलाकार अभिनय म सर्व सम्पन्न हे। सोचे के विषय आय।
छत्तीसगढ़ी भासा ल राजभासा के दरजा पाय के बाद घलो आज साहर के लोगन मन हा छत्तीसगढ़ी म नइ बोलत हे एखर कई कारण हो सकत हे जइसे ओमन ला छत्तीसगढ़ी बोले म सरम आवत होही या हो सकथे ओमन हा सार्वजनिक जघा कार्यालय दुकान म छत्तीसगढ़ी बोले म असहजता के अनुभव होवत होही, हो सकत हे वो मन खुद छत्तीसगढ़ी बोलत होही फेर आघू वाला मनखे मन वोला बोले म संग नइ देवत होही। जादातर अइसनहे मोर संग होथे तेखर सेती अनुमान लगावत हावंव। अइसना भी हो सकथे कि ओमन ला छत्तीसगढ़ी बोले बर आतेच नइ होही, चारो खुंट ले छत्तीसगढ़िया मन ले घेराये साहर मन म ये बात होइच नइ सकय। माने सब छत्तीसगढ़ी बोले बर जानथे सबो छत्तीसगढ़ी समझथे तब ये छत्तीसगढ़ी फिलीम मन धड़ाधड़ तरी-ऊपर पीटावत काबर हे सवाल हे मंच महु बात ला नइ मानंव कि निर्माता निर्देशक मन स्तर के फिलिम नई बनावत हे? हमर निर्माता निर्देशक मन बहुत बढ़िया गीत, संगीत, कथा, पटकथा, हास्य, रचनावत हे। एखर संगे संग उच्च तकनिक के उपयोग होवत हे। छत्तीसगढ़ी फिलिम इंडस्ट्री म लगभग दर्जनों अऊ कोरी-कोरी कलाकार हे जउन मन अभिनय म सर्व सम्पन्न हें। फिलीम अभिनेता अनुज शर्मा ले जब मंय बात करेंव त ओमन कहिथे कि चम्पेश्वर जी खाली बुध्दिजीवी वर्ग के आलोचना ले काम नई चलय मजा तो तब आही जब वोमन हा टाकीज म टिकिट बिसाके फिलीम देखही तेखर बाद कुछ गोठियाही। आज कोनो भी छत्तीसगढ़ी फिलीम म कतकोन बढ़िया काम कर लेवंय फेर एमन ला पता हे कि येखर मन के अन्नदाता कहां हे येखर मन के अन्नदाता पूरा-पूरा ग्रामीण जन हे मजदूर वर्ग हे अउ यहु एक कारन फिलीम म अन्ते-तन्ते गीत भरे के हो सकथे निर्देशक मन के इही मानना हे कि जे दिन साहर के सेंट परसेंट छत्तीसगढ़िया मन छत्तीसगढ़ी भासा के जनइया मन टाकी म तिरागे उही दिन कोनो भी निर्माता हा हांसत हांसत अपन थैली ला ढिल्ला कर दीही अउसबो कलाकार मन के घलो थैली हा भरा जाही। इहीच बात म मन हा थोरिक भुसभुसाथे एक बीच कुछु फिलीम हा तो सुपर डुपर हिट होथेच हे त ए फिलमी कलाकार मन तो रूपिया ल धर नइ सकत होही नहीं भलुक अउ बपरा-बपरी मन हा धरम संकट म पटगे कि अब तो नाम वाले होगेन अउ पइसा घलो नई हे। अइसन म दूसर करा काम कइसे मांगन। निर्माता निर्देशक कलाकार के पोषक बनय ना कि शोषक, भरे पेट म काम म घलो मन लगािे अऊ हिरदे हा आशीर्वाद तको देथे त भई त निर्माता मन धियान राखव हमर कलाकार मन के।

चम्पेश्वर गोस्वामी

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