छत्‍तीसगढ़ी रचना कोश

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[bscolumns class=”one_half”]पं. सुन्दरलाल शर्मा

पं. सुन्दरलाल शर्मा जो स्वाधीनता संग्रामी थे, वे उच्च कोटी के कवि भी थे। शर्माजी ठेठ छत्तीसगड़ी में काव्य सृजन की थी। पं. सुन्दरलाल शर्मा को महाकवि कहा जाता है। किशोरावस्था से ही सुन्दरलाल शर्मा जी लिखा करते थे। उन्हें छत्तीसगड़ी और हिन्दी के अलावा संस्कृत, मराठी, बगंला, उड़िया एवं अंग्रेजी आती थी। हिन्दी और छत्तीसगढ़ी में पं. सुन्दरलाल शर्मा ने 21 ग्रन्थों की रचना की। उनकी लिखी “छत्तीसगढ़ी दानलीला” आज क्लासिक के रुप में स्वीकृत है। पं. सुन्दरलाल शर्मा की प्रकाशित कृतियाँ – 1. छत्तीसगढ़ी दानलीला 2. काव्यामृतवर्षिणी 3. राजीव प्रेम-पियूष 4. सीता परिणय 5. पार्वती परिणय 6. प्रल्हाद चरित्र 7. ध्रुव आख्यान 8. करुणा पच्चीसी 9. श्रीकृष्ण जन्म आख्यान 10. सच्चा सरदार 11. विक्रम शशिकला 12. विक्टोरिया वियोग 13. श्री रघुनाथ गुण कीर्तन 14. प्रताप पदावली 15. सतनामी भजनमाला 16. कंस वध। पं. सुन्दरलाल शर्मा का देहान्त 28 दिसम्बर 1940 में हुआ था। स्वतन्त्रता सेनानी पं. सुन्दरलाल शर्मा जी देश को आज़ाद नहीं देख पाए।

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[bscolumns class=”one_half”]हेमनाथ यदु
जन्म 1924 में रायपुर में. रचनायें – 1) छत्तीसगढ़ के पुरातन इतिहास से सम्बंधित, 2) लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य, 3) भक्ति रस के साहित्य – छत्तीसगढ़ दरसन. अनुदित- मोंगरा, श्री मां की वाणी, श्री कृष्ण की वाणी, श्री राम की वाणी, बुद्ध की वाणी, ईसा मसीह की वाणी, मुहम्मद पैंगबर की वाणी.
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[bscolumns class=”one_half”]भगवती सेन
जन्म 1930 में धमतरी के देमार गांव में. रचनायें – ‘नदिया मरै पियास’, ‘देख रे आंखी सुन रे कान’
1981 में देहान्त.
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[bscolumns class=”one_half”]लाला जगदलपुरी
जन्म 1923 में बस्तर में. रचनायें ‘हल्बी लोक कथाएँ’ हल्बी साहित्य में इनका योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है.
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[bscolumns class=”one_half”]नारायणलाल परमार
जन्म 1927 में गुजरात में. रचनायें – उपन्यास – प्यार की लाज, छलना, पुजामयी, काव्य संग्रह – काँवर भर धूप, रोशनी का घोषणा पत्र, खोखले शब्दों के खिलाफ, सब कुछ निस्पन्द है, कस्तूरी यादें, विस्मय का वृन्दावन, छत्तीसगढ़ी साहित्य – सोन के माली, सुरुज नई मरे, मतवार अउ, दूसर एकांकी, उनकी मृत्यु 2003 में हुई.
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[bscolumns class=”one_half”]डॉ. पालेश्वर शर्मा
जन्म 1928 में जांजगीर में. ‘छत्तीसगढ़ के कृषक जीवन की शब्दावली’ पर पी.एच.डी.रचनायें – 1) प्रबंध पाटल 2) सुसक मन कुररी सुरताले 3) तिरिया जनम झनि देय (छत्तीसगढ़ी कहानियाँ) 4) छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परंपरा 5) नमस्तेऽस्तु महामाये 6) छत्तीसगढ़ के तीज त्योहार 7) सुरुज साखी है (छत्तीसगढ़ी कथाएँ) 8) छत्तीसगढ़ परिदर्शन 9) सासों की दस्तक – इसके अलावा पचास निबंध और 100 कहानियाँ। डॉ. पालेश्वर शर्मा ने ‘छत्तीसगढ़ी शब्द कोश’ की रचना की है।
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[bscolumns class=”one_half”]केयूर भूषण
जन्म 1928 में दुर्ग जिले में रचनायें- लहर (कविता संकलन) कुल के मरजाद (छत्तीसगढ़ी उपन्यास) कहाँ बिलोगे मोर धान के कटोरा (छत्तीसगढ़ी उपन्यास) कालू भगत (छत्तीसढ़ी कथा संकलन) छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियाँ। केयूर भूषण जी छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ संदेश साप्ताहिक सम्पादन करते हैं।
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[bscolumns class=”one_half”]दानेश्वर शर्मा
रचनायें ‘बेटी के बिदा’
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[bscolumns class=”one_half”]डॉ.विमल कुमार पाठक
पिता : स्‍व.सुन्‍दर लाल पाठक, माता : स्‍व.दीपकंवर पाठक, धर्मपत्‍नी : स्‍व.पुष्‍पा पाठक, जन्‍मतिथि : 06.01.1938, शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (हिन्‍दी), विशेष : सन् 1955 से छत्‍तीसगढ़ी हिन्‍दी काव्‍य लेखन (दस पुस्‍तकें प्रकाशित) छत्‍तीसगढ़ी लोकमंच, लोककला, संस्‍कृति के विकास में अप्रतिम योगदान। छत्‍तीसगढ़ राज्‍य आन्‍दोलन के नेतृत्‍वकर्ताओं में प्रथम पंक्ति के व्‍यक्तियों में से एक।
निवास : खुर्सीपार जोन 1, मार्केट सेक्‍टर 11, पावर हाउस, आईटीआई के पीछे, भिलाई 490011., मोबाईल : 093028-31304
‘मोर घर परिवार, मुहल्ला अउ समाज म पूरा छत्तीसगढ़ी वातावरण रहिस। छत्तीसगढ़ी के बोलबाला रहिस। गोठियाना, गीता गाना, लड़ना-झगड़ना, खेलना-कूदना, जमों छत्तीसगढ़ी मं करत आयेंव, सुनत आयेंव। ठेठ छत्तीसगढ़ी संस्कार तब ले परिस लइकइच ले सामाजिक-पारिवारिक संस्कार मन के एकदम लकठा में आगेंव। छुट्ठी बरही ले लेके बिहाव तक के लोकगीत सुन सुनके धुन मन के मिठास ल सुनके गुनके मैं बिधुन हो जात रहेंव। सोहर ले लेके, चुलभाटी, तेलभाटी, बिहावभाटी, विदा, नेवरात, गौरा, सुवा, भोजली, ददरिया, करमा अउ किसिम-किसिम के गीत सुनना अउ ओमन ल गाना मोर आदत बनगे रहिस।’
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[bscolumns class=”one_half”]विद्याभूषण मिश्र
रचनायें ‘छत्तीसगढ़ी गीतमाला’ ‘फूल भरे अंचरा’ तथा हिन्दी में ‘सतीसावित्री’, ‘करुणाजंलि’, ‘सुधियो के स्वर’, ‘मन का वृन्दावन जलता है’
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[bscolumns class=”one_half”]प्रभजंन शास्त्री
रचनायें ‘बिन मांड़ी के अंगना’, भगवत गीता के अनुवाद तथा “कौसल्यानंदन”
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[bscolumns class=”one_half”]डॉ. विनयकुमार पाठक
रचनायें छत्तीसगढ़ी में कविता, खण्डकाव्य – सीता के दुख तथा छत्तीसगढ़ी साहित्य और साहित्यकार, छत्तीसगढ़ी लोक कथा (1970 ) छत्तीसगढ़ के स्थान-नामों का भाषा वैज्ञानिक अध्ययन (2000 )
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[bscolumns class=”one_half”]नंदकिशोर तिवारी
छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘लोकाक्षर’ रचनायें भरथरी, पंडवानी पर किताबे प्रकाशित हुई हैं
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[bscolumns class=”one_half”]बिसंभर यादव
छत्तीसगढ़ में जन कवि, उपनाम ‘मरहा’, जन्म बघेरा गांव में हुआ था।
‘जवानी लिखथव मैं जवानी लिख वर सन् 1944 ले शुरु करेंव।’ कारगिल के ऊपर उनकी कविता ‘सुनव हाल लड़ाई के’ बहुत लोकप्रिय है।
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[bscolumns class=”one_half”]रघुवीर अग्रवाल पथिक
‘जइसे उर्दू में रुबाई होथे, हिन्दी म मुक्तक होथे, वइसन छत्तीसगढ़ी में चरगोड़ीया नाम से नवा विद्या के सिरजन करे के श्रेय आप ला हवय’ रचनायें  ‘जले रक्त से दीप’ – छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह एवं लोक कथा के मुख्य विषय है राष्ट्रप्रेम, भुख, गरीबी, त्याग, बलिदान, पीरा, व्यंग्य, प्रकृति।
1999 में उन्हें आदर्श शिक्षक का सम्मान दुर्ग जिला हिन्दी साहित्य सम्मेल से मिला।
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[bscolumns class=”one_half”]रामेश्वर वैष्णव
हास्य व्यंग्य के कवि रचनायें छत्तीसगढ़ी गीत, पत्थर की बस्तियाँ (गज़ले), अस्पताल बीमार हे (व्यंग्य), नोनी बेंदरी (छत्तीसगढ़ी हास्य व्यंग्य), खुशी की नदी (गज़ले), जंगल में मंत्री, छत्तीसगढ़ी महतारी महिम
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[bscolumns class=”one_half”]कवि मुकुंद कौशल
गजल, गीत, कविताये रचते हैं। रचनायें छत्तीसगढ़ी कविता संकलन ‘भिनसार और हिन्दी कविता संग्रह’, ‘लालटेन जलने दो’
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[bscolumns class=”one_half”]डॉ. निरुपमा शर्मा
छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला साहित्यकार हैं। छत्तीसगढ़ी और हिन्दी, दोनों में लिखती हैं।
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[bscolumns class=”one_half”]शकुन्तला तरार
रचनायें छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह ‘बन कैना’] बस्तर के लोकगीत, लोक कथा, बाल गीत
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[bscolumns class=”one_half”]डॉ.परदेसी राम वर्मा
रचनायें छत्तीसगढ़ी नाटक में ‘बइला नोहव’
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[bscolumns class=”one_half”]भावसिहं हिरवानी
कहानी उनका मुख्य माध्यम है रचनायें ‘अउ तिजहारिन’ उनकी छत्तीसगढ़ी कहानी है जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया है। और हिन्दी में ‘रो के दीप’, ‘रोता जंगल’, ‘सुलगती लकड़ी’ पुरस्कार प्राप्त है। अंधविश्वास, अंधपरम्परा के खिलाफ अपनी कहानियों के माध्यम से लड़ते रहे हैं।
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डॉ.रमेश चंद्र महरोत्रा
जन्म – 17.8.1934, मुरादाबाद (उ.प्र.) शिक्षा – एम.ए. (हिन्‍दी) 1956, आगरा
एम.ए. (भाषाविज्ञान) 1956, आगरा, फैलोशिप (लिंग्विस्टिक्स) 1959, पूना
पी-एच.डी.(लिंग्विस्टिक्स) 1963, सागर, डी.लिट् (भाषाविज्ञान) 1980, आगरा (सर्वश्रेष्ठ शोधकार्य हेतु स्वर्णपदक सहित)
विश्वविद्यालयीन सेवा – असिस्टेंट प्रोफेसर (भाषाविज्ञान) सागर (17.11.1959 से 19.7.1966) रीडर (भाषाविज्ञान) रायपुर (20.7.1966 से 12.8.1978) प्रोफेसर (भाषाविज्ञान) रायपुर (13.8.1978 से 31.7.1994) सेवानिवृत्ति के बाद से अवैतनिक मानसेवी प्रोफसर, रायपुर
प्रकाशित पुस्तकें – 1- भाषैषणा, अरोरा प्रिटिंग प्रेस प्रकाशन, रायपुर (1968) 2- हिन्‍दी ध्वनिकी एवं ध्वनिमी, मुंशीराम मनोहरलाल, नई दिल्ली (1970 पुनः 2000) 3- A Classified Collection of One Thousand words for Undertaking Field-work on Indian Languages, ‘Psyco-Lingua’ Raipur-Agra 1971 4- Distance among Twenty Two Dialects of Hindi Depending on the Parellel Forms of the Most Frequent Sixty-Two words of Standard Hindi, Bhashika Prakashan, Raipur 1976 पुन: 1980 5- HINDI PHONOLOGY (A Synchronic Description of the Contemporary Standard). Raipur 1980 6- अशुद्ध हिन्‍दी: विशेषकर छत्तीसगढ़ के संदर्भ में (मन्नू लाल यदु सहलेखक), भाषिका प्रकाशन, रायपुर (1980), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (पुनः 2000) 7- हिन्‍दी में अशुद्धियाँ, मीनाक्षी प्रकाशन, मेरठ (1983), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (पुनः 2000) 8- हिन्‍दी का नवीनतम बीज व्याकरण (चित्तरंजन कर सहलेखक), पहचान प्रकाशन, रायपुर (1986)
राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (पुनः 2004) 9- मानक हिन्‍दी का शुद्धिपरक व्याकरण, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली (1988, पुनः 1992, पुनः 2004) 10- हिन्‍दी का शुद्ध प्रयोग, ओऽम प्रकाशन, रायपुर (1992) 11- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-1 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (1996, पुनः 2000) 12- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-2 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (2000) 13- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-3 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (2000) 14- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-4 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (2000) 15- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-5 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (1996, पुनः 2000) 16- भाषिकी के दस लेख (हीरालाल शुक्ला सहसंपादक), आलोक प्रकाशन, रायपुर (1969) 17- भाषाविज्ञान का सामान्य ज्ञान (मन्नू लाल यदु सहसंपादक), भाषिका प्रकाशन रायपुर (1981) 18- छत्तीसगढ़ी-संदर्भ-निदर्शनी (भागवत प्रसाद साहू सहसंपादक), रविशंकर विश्वविद्यालय (1982)
19- छत्तीसगढ़ी-शब्दकोश (प्रेमनारायण दुबे सहसंपादक), भाषिका प्रकाशन रायपुर (1982) 20- Ravishankar University Research Abstract 1981-’82 (Chief Editor), Ravishankar University, Raipur (1983) 21- रविशंकर विश्वविद्यालय भाषाविज्ञान-शोधसार 1968-’85 (भागवत प्रसाद साहू सहसंपादक), रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर (1985) 22- कोशविज्ञान: सिद्धांत और प्रयोग (आचार्य रामचंद्र वर्मा जन्मशती ग्रंथ) (हरदेव बाहरी के साथ संपादक), विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी (1989) 23- छत्तीसगढ़ी-मुहावरा-कोश (भागवत प्रसाद साहू आदि सहसंपादक), नेशनल पब्लिfशंग हाउस, नई दिल्ली (1991, पुनः 2002) 24- छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी: भाषायी कार्य (संपादक), पं.रविशंकर वि.वि., रायपुर (1993) 25- 30th Anniversary Year-1994 SOVENIR (Editor, et al.), Pt.Ravishankar University, Raipur (1994) 26- मानक हिन्‍दी लेखन-नियमावली (पुस्तिका), fनःशुल्क वितरण प्रकाशन, रायपुर (1995), (पुनर्नव) अपनी हिन्‍दी सुदृढ़ कीजिए, वैभव प्रकाशन, रायपुर (2003) जनशाला दर्शन, साक्षरता भवन, दुर्ग (2003)
श्री गुजराती शिक्षण-संघ, राजनाँदगाँव (2003) 27- अॅ के प्रयोग के लिये अपील: औचित्य और सूची (अपुस्तिका), डगनिया, रायपुर (1996) 28- तमिल भाषा का इतिहास (अनुवादक)(टी.पी.मीनाक्षीसुदरन् लेखक), म.प्र.हिन्‍दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल (1974) 29- टेढ़ी बात (चित्तरंजन कर संपादक), श्री प्रकाशन, दुर्ग (1996), आड़ी-टेढ़ी बात (चित्तरंजन कर संपादक), विद्या विहार, नई दिल्ली (2003)प्रभात प्रकाशन वाले ही 30- टेढ़ी-बात पर खूबसूरत नज़रें (संपादक), शोध एवं अनुसंधान विकास केन्द्र, रायपुर (1996) 31- लवशाला (रमेश नैयर संपादक) महेश fप्रंटर्स प्रकाशन, रायपुर (1997) 32- लवशाला का मूल्यांकन (संपादक), शोध एवं अनुसंधान विकास केन्द्र, रायपुर (1997) 33- अच्छा बनने की चाह, खंड-1, सच, बड़ा सच और संपूर्ण सच, नंदन प्रकाशन, लखनऊ (1997) 34- अच्छा बनने की चाह, खंड-2, सुख, समृद्धि की राहें, नंदन प्रकाशन, लखनऊ (1998) 35- सुख की राहें (रमेश नैयर संपादक), ज्ञान गंगा, दिल्ली (2000), प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली (2003) 36- सफलता के रहस्य (रमेश नैयर संपादक), ज्ञान गंगा, दिल्ली (2000), प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली (2003) 37- छत्तीसगढ़ी: परिचय और प्रतिमान, वैभव प्रकाशन, रायपुर (2001 पुनः 2002)
38- छत्तीसगढ़ी को शासकीय मान्यता, वैभव प्रकाशन, रायपुर (2001 पुनः 2002) 39- एक दिल हज़ार अफसाने (संपादन)(रमेश नैयर संकलन एवं रूपांतर), शताक्षी प्रकाशन, रायपुर (2001) 40- छत्तीसगढ़ी-हिन्दी-शब्दकोश (संपादन-सहयोग)(पालेश्वर प्रसाद शर्मा संपादक), बिलासा कला-मंच, बिलासपुर (2001) 41- छत्तीसगढ़ी मुहावरे और लोकोक्तियाँ, सत्साहित्य प्रकाशन, दिल्ली (2002) प्रभात प्रकाशन वाले ही 42- मानक हिन्‍दी का (व्यवहारपरक) व्याकरण, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (2005) 43- छत्तीसगढ़ी लेखन का मानकीकरण, वैभव प्रकाशन, रायपुर (2002) 44- मानक छत्तीसगढ़ी का सुलभ व्याकरण (सुधीर शर्मा सहलेखन), छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, रायपुर (2002) 45- मानक हिन्‍दी के शुद्ध प्रयोग-6 (खंड1, खंड 2), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली (2000)
निर्देशन में पूर्ण करवाए गए शोधकार्य और उपाधिधारी
डी.लिट् – डॉ. विनय कुमार पाठक, डॉ. चित्तरंजन कर, डॉ. ए.एस.झाड़गांवकर, डॉ. मंजु अवस्थी, डॉ. यज्ञ प्रसाद तिवारी
पी-एच.डी. – 39, एम.फिल.- 24, परियोजनाएँ – 6
विद्वज्जनोचित संस्थाओं से विविधस्तरीय न्यूनाधिक संबद्धता- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, संघ लोकसेवा आयोग, केन्द्रीय हिन्‍दी निदेशालय, वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली का स्थायी आयोग -परामर्शदात्री समिति, राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र परिषद्, केन्द्रीय हिन्‍दी शिक्षण मंडल, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, लिंग्विस्टिक सोसायटी आफ इंडिया, हिन्‍दी साहित्य सम्मेलन, उत्तर प्रदेश हिन्‍दी संस्थान, भारत सरकार कर्मचारी चयन आयोग (मध्य क्षेत्र), भारतीय भाषा परिषद, हरियाणा साहित्य अकादमी, बिहार राज्य सहायक सेवा चयन मंडल, राजस्थान लोक सेवा आयोग, मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा अनुदान आयोग, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, मध्य प्रदेश हिन्‍दी ग्रंथ अकादमी-प्रबंधक मंडल एवं कार्यसमिति, मध्य प्रदेश साहित्य परिषद्, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम, मध्य प्रदेश भाषाविज्ञान परिषद्, आकाशवाणी परामर्शदात्री समिति, 22 विश्वविद्यालयों के शोध-अनुभाग
प्राप्त अलंकरण और सम्मान – भारत सरकार की हिन्‍दी साहित्यकार विवरणी में छत्तीसगढ़ के केवल दो लेखकों और हिन्‍दी प्रचारकों में से एक (1991), Linguistics and Linguistics : Studies in Honour of Ramesh Chandra Mehrotra (ISBN 81-900249-3-0 pp363), Linguistic Sosiety of India, Poona, SEAL OF HONOUR, XXth All India Conference of Linguists, Lucknow (1996), शब्द सम्राट, हिन्‍दी अकादमी, हैदराबाद (1996), छत्तीसगढ़-विभूति-अलंकरण, महाकवि कपिलनाथ साहित्य-समिति, बिलासपरु (1997), महाकोशल कला परिषद् सम्मान, रायपुर (1998), मायाराम सुरजन फाउंडेशन सम्मान, रायपुर (1998), विद्यासागर (मानद् डी.लिट्.), विक्रमशिला हिन्‍दी विद्यापीठ, भागलपुर (1999), बिलासा साहित्य सम्मान, बिलासा कला मंच, बिलासपुर (2000), नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) कोलकाता सम्मान (2001), राज्य स्तरीय प्रथम विश्वविद्यालयीन शिक्षक-सम्मान, रायपुर (2001), संस्कार भारती साहित्य सम्मान, रायपुर (2002), हिन्‍दी गौरव सम्मान, रायपुर (2003), पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान, छत्तीसगढ़ राज्य शासन, 2 लाख रु.सहित, रायपुर (2007),


[bscolumns class=”one_half”]कपिलनाथ कश्यप
कपिलनाथ कश्यप का जन्म 1906 में बिलासपुर जिले के ग्रामीण अंचल में हुआ था, १९८५ में उनकी मृत्यु हुई है। कपिलनाथजी रामचरितमानस का छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद किया। उनकी छत्तीसगढ़ी और हिन्दी भाषा में कई रचनाएं हैं – 1 ) रामकथा, 2 ) अब तो जागौ रे, 3 ) डहर के कांटा, 4 ) श्री कृष्ण कथा, 5 ) सीता के अग्नि परीक्षा, 6 ) डहर के फूल, 7 ) अंधियारी रात, 8 ) गजरा, 9 ) नवा बिहाव, 10 ) न्याय, 11 ) वैदेही-विछोह।
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[bscolumns class=”one_half”]बद्रीविशाल परमानंद
बद्रीविशाल परमानंद छत्तीसगढ़ के जाने माने लोक कवि हैं जिनके बारे में हरि ठाकुरजी लिखते हैं – “परमानन्द जी छत्तीसगढ़ के माटी के कवि हैं। छत्तीसगढ़ के माटी ले ओखर भाषा बनथे, ओखर शब्द अउ बिम्ब लोकरंग अउ लोकरस से सनाये हे। ओखर रचना हा गांव लकठा में बोहावत शांत नदिया के समान हे जउन अपने में मस्त हे।” उनका जन्म गांव छतौना में 1917 में हुआ था। रायपुर में उनकी बनाई हुई भजन मंडली ‘परमानंद भजन मंडली’ के नाम से जाने जाते हैं और करीब 70 भजन मण्डली अभी भी चल रहे हैं। 1942 में आजादी की गीत गागाकर भजन मण्डली, लोगों में नई जोश पैदा करता था। उनके कई सारे गीत अत्याधिक लोकप्रिय हैं। उनकी मृत्यु 1993 में हुआ था, जिन्दगी के आखरी सांस तक वे न जाने कितने कष्ट उठाये और अन्त में हस्पताल में अकेले पड़े रहे और आखरी सांस लिये।
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[bscolumns class=”one_half”]हरि ठाकुर
हरि ठाकुर का जन्म 1926 में रायपुर में हुआ था। उनकी मृत्यु सन् 2001 में हुई। वे रायपुरवासी थे। न सिर्फ साहित्यकार, गीतगार थे हरि ठाकुर बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के आन्दोलन में डॉ. खूबचन्द बघेल के साथ थे। स्वाधिनता संग्रामी ठाकुर प्यारेलाल सिंह के पुत्र होने के नाते हरिसिंह की परवरिस राजनीतिक संस्कार में हुई थी। छात्रावास में वे छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके थे। उन्होंने बी.ए.एल.एल.बी. की थी। वे हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी, दोनों भाषाओं में लिखते थे। उनके हिन्दी काव्य – 1 ) नये स्वर, 2 ) लोहे का नगर, 3 ) अंधेरे के खिलाफ, 4 ) मुक्ति गीत, 5 ) पौरुष :नए संदर्भ, 6 ) नए विश्वास के बादल। छत्तीसगढ़ी काव्य – 1 ) छत्तीसगड़ी गीत अउ कविता, 2 ) जय छत्तीसगढ़, 3 ) सुरता के चंदन, 4 ) शहीद वीर नारायन सिंह, 5 ) धान क कटोरा, 6 ) बानी हे अनमोल, 7 ) छत्तीसगढ़ी के इतिहास पुरुष, 8 ) छत्तीसगढ़ गाथा। हरि ठाकुर सुशील यदु को एक साक्षात्कार में कहते हैं – “छत्तीसगढ़ के नवा पीढ़ी के साहित्यकार मन ला चाही के उन छत्तीसगढ़ के समस्या ला लेके जइसे छत्तीसगढ़ के अस्मिता, शोसन, गरीब, प्रदूषण, अपमान, उपेक्षा जइसे विषय ला लेके अधिक ले अधिक लेखन काम करें। जउन लेखन ले जन-जागरण नइ होवय, जनता के स्वाभिमान नइ जागय, छत्तीसगढ़ के पहिचान नइ बनय, वइसन लेखन हा आज कोनो काम के नइ हे।”
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[bscolumns class=”one_half”]श्यामलाल चतुर्वेदी
श्यामलाल चतुर्वेदी का जन्म सन् 1926 में कोटमी गांव, जिला बिलासपुर में हुआ था, वे छत्तीसगढ़ी के गीतकार भी हैं। उनकी रचनाओं में “बेटी के बिदा” बहुत ही जाने माने हैं। उनको बेटी को बिदा के कवि के रुप में लोग ज्यादा जानते हैं। उनकी दूसरी रचनायें हैं – “पर्रा भर लाई”, “भोलवा भोलाराम बनिस”, “राम बनबास”। वे पत्रकारिता भी करते हैं। “विप्रजी” से उन्हें बहुत प्रेरणा मिली थी। और बचपन में अपनी मां के कारण भी उन्हें लिखने में रुची हुई। उनकी मां नें बचपन में ही उन्हें सुन्दरलाल शर्मा के “दानलीला” रटा दिये थे। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ी साहित्य के मूल, छत्तीसगढ़ की मिट्टी, वहाँ के लोकगीत, लोक साहित्य।
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[bscolumns class=”one_half”]कोदूराम दलित
कोदूराम दलित का जन्म सन् 1910 में जिला दुर्ग के टिकरी गांव में हुआ था। गांधीवादी कोदूराम प्राइमरी स्कूल के मास्टर थे उनकी रचनायें करीब 800 (आठ सौ) है पर ज्यादातर अप्रकाशित हैं। कवि सम्मेलन में कोदूराम जी अपनी हास्य व्यंग्य रचनाएँ सुनाकर सबको बेहद हँसाते थे। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ी लोकोक्तियों का प्रयोग बड़े स्वाभाविक और सुन्दर तरीके से हुआ करता था। उनकी रचनायें – 1. सियानी गोठ 2. कनवा समधी 3. अलहन 4. दू मितान 5. हमर देस 6. कृष्ण जन्म 7. बाल निबंध 8. कथा कहानी 9. छत्तीसगढ़ी शब्द भंडार अउ लोकोक्ति। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ का गांव का जीवन बड़ा सुन्दर झलकता है।
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[bscolumns class=”one_half”]प्यारेलाल गुप्त
साहित्यकार एवं इतिहासविद् श्री प्यारेलाल गुप्तजी का जन्म सन् 1948 में रतरपुर में हुआ था। गुप्तजी आधुनिक साहित्यकारों के “भीष्म पितामाह” कहे जाते हैं। उनके जैसे इतिहासविद् बहुत कम हुए हैं। उनकी “प्राचीन छत्तीसगढ़” इसकी साक्षी है। साहित्यिक कृतियाँ – 1. प्राचीन छत्तीसगढ़ 2. बिलासपुर वैभव 3. एक दिन 4. रतीराम का भाग्य सुधार 5. पुष्पहार 6. लवंगलता 7. फ्रान्स राज्यक्रान्ति के इतिहास 8. ग्रीस का इतिहास 9. पं. लोचन प्रसाद पाण्डे । गुप्त जी अंग्रेजी, हिन्दी, मराठी तीनों भाषाओं में बड़े माहिर थे। गांव से उनका बेहद प्रेम था।
“प्राचीन छत्तीसगढ़” लिखते समय गुप्तजी निरन्तर सात वर्ष तक परिश्रम की थी। इस ग्रन्थ में छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य को प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक की भूमिका में श्री प्यारेलाल गुप्त लिखते हैं – “वर्षो की पराधीनता ने हमारे समाज की जीवनशक्ति को नष्ट कर दिया है। फिर भी जो कुछ संभल पाया है, वह हमारे सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक उपादानों के कारण। नये इतिहासकारों को इन जीवन शक्तियों को ढूँढ़ निकालना है। वास्तव में उनके लिए यह एक गंभीर चुनौती है”
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[bscolumns class=”one_half”]पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र
पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी जी का जन्म सन् 1908 में बिलासपुर में हुआ था। शुरु से ही उन्हें छत्तीसगढ़ के लोक परंपराओं और लोकगीतों में रुची थी। शुरु में ब्रजभाषा और खड़ी बोली में रचना करते थे। बाद में छत्तीसगढ़ी में लिखना शुरु किये। उनकी प्रकाशित पुस्तके हैं – 1. कुछू कांही 2. राम अउ केंवट संग्रह 3. कांग्रेस विजय आल्हा 4. शिव-स्तुति 5. गाँधी गीत 6. फागुन गीत 7. डबकत गीत 8. सुराज गीता 9. क्रांति प्रवेश 10. पंचवर्षीय योजना गीत 11. गोस्वामी तुलसीदास (जीवनी) 12. महाकवि कालिदास कीर्ति 13. छत्तीसगढ़ी साहित्य को डॉ. विनय पाठक की देन। विप्रजी प्रेम, ॠंगार, देशभक्ति, हास्य व्यंग्य सभी विषयों पर लिखी है।
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[bscolumns class=”one_half”]पं. बंशीधर शर्मा
पं. बंशीधर शर्मा जी का जन्म सन् 1892 ई. में हुआ था। छत्तीसगढ़ी भाषा के पहले उपन्यासकरा के रुप में जाने जाते हैं। उस उपन्यास का नाम है “हीरु की कहिनी” जो छत्तीसगढ़ी भाषा में पहला उपन्यास था। सुशील यदु, अपनी पुस्तक ” लोकरंग भाग-2 , छत्तीसगड़ी के साहित्यकार” में लिखते हैं – ” जइसे साहित्य में पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हा तीन कहानी लिखकर हिन्दी साहित्य में प्रतिष्ठित होगे बइसने बंशीधर पाण्डे जी 1926 में एक छत्तीसगढ़ी लघु उपन्यास ‘हीरु के कहानी’ लिखकर छत्तीसगड़ी साहित्य में अमर होगे। आज उन्हला पहिली छत्तीसगड़ी उपन्यासकार होय के गौरव मिले है।” बंशीधर पांडे जी साहित्यकार पं. मुकुटधर पाण्डेजी के बड़े भाई और पं. लोचन प्रसाद पाण्डेजी के छोटे बाई थे। उनका लिखा हुआ हिन्दी नाटक का नाम है “विश्वास का फल” एवं उड़िया में लिखी गई गद्य काव्य का नाम है “गजेन्द्र मोक्ष”
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[bscolumns class=”one_half”]कवि गिरिवरदास वैष्णव
कवि गिरिवरदास वैष्णव जी का जन्म 1897 में रायपुर जिला के बलौदाबाजार तहसील के गांव मांचाभाठ में हुआ था। उनके पिता हिन्दी के कवि रहे हैं, और बड़े भाई प्रेमदास वैष्णव भी नियमित रुप से लिखते थे। गिरिवरदास वैष्णव जी सामाजिक क्रांतिकारी कवि थे। अंग्रेजों के शासन के खिलाफ लिखते थे ।
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