छत्‍तीसगढ़ी नाचा के जनक : दाउ दुलारसिंह मंदराजी

Mandaraji Dauराजनांदगांव ले सात किलोमीटर दूरिहा रवेली गांव हे। रवेली गांव के दाउ बाड़ा के बड़का अंगना म बड़े पेट वाला नान्‍हे लईका दुलार खेलत रहय, उही समे मा लइका ने नाना सगा के रूप म आइस। नाना ह देखिस बाड़ा के अंगना म तुलसी चौंरा म माढ़े उडगुड़हा पथरा के मद्रासी भगवान कस अंगना म खेलत पेटला लइका हर दिखत हे। त ओ बबा ह नाती ला मजाक म ‘मद्रासी’ कहि दीस। लइका दुलारसिंह ला घर के मन मजाक म मद्रासी कहे लागिन। गांव म मद्रासी सब्‍द ह बिगड़त बिगड़त मंदराजी होगे अउ दाउ दुलासिंह के नाव संग मंदराजी जुरगे।लइका दुलारसिंह के बचपने ले गीत – संगीत म लगन रहिस। वो ह गांवे म पांचवी तक पढ़ई करिस तहा ले अपन धियान ला गीत-संगीत म लगा लीस। छुटपन ले तबला अउ चिकारा बजाए ल सीख गे। गांव म होवइया भजन, रमायन अउ लीला मन म दुलारसिंह बढ़-चढ़ के हिस्‍सा लेहे लागिस। बाप के बरजे के बाद घलव दुलार ह तीर-तखार म होवइया नाचा म चिकारा, तबला बजाये बर चल दय। मदराजी दाउ के बेटा रहिस उखंर मन मेर रवेली गांव म अड़बड़ अकन खेती-खार रहिस। दुलारसिंह के पिताजी ह देखिस के बेटा के खेती-पाती कोती धियान नइ हे नचई गवई म बिधुन हे। त लइका सुधरही कहिके 14 बरिस के उम्‍मर म मंदराजी के बिहाव कर दिस। बिहाव के बाद घलव दुलारसिंह अपन नाचा के परेम ला नइ छोडिस। जइसे पता चलतिस के कोनो गांव म नाचा होवइया हे, दाउ के छकड़ा गाड़ी फंदा जावय। रात-रात भर दाउ नाचा देखय अउ समे परय त नाचा म चिकारा बजावय। वो समय रात म खड़े साज के नाचा होवय, जउन म गम्‍मतिहा मन लकड़ी के मसाल म भभक्‍का बार के अंजोर करय। ढ़ोलक, तबला चिकारा ला कनिहा म बांध के खड़े-खड़े जम्‍मो नाच-गम्‍मत ला करयं। नाचा के कलाकार मन एके गांव के नइ रहंय। अलग-अलग गांव के रहइया कलाकार मन मातर-मड़ई म सकलावय त रात कन नाचा के कार्यक्रम रखे जाय। अभी जइसे देखे ला मिलथे तइसे नाचा कलाकार मन के संगठित पार्टी ओ समय म नइ रहिस। कलाकार मन अपन रोजी-रोटी कमावत अलग-अलग गांव म बगरे रहिन तउन ला दाउ दुलारसिंह हा सकेलिस। दाउ दुलारसिंह हा पहिली बार छत्‍तीसगढ़ म रवेली साज नाच पार्टी बनाइस।
दाउ जी ह गम्‍मत के माध्‍यम ले समाज म छाये बुराइ ला भगाये खातिर, ओखर असल रूप ला प्रस्‍तुत करय। जेखर ले जनता सीख लेवय अउ ओ बुरइ ला छोड़े के उदीम करय। दाउ के रवेली साज नाचा पार्टी के जम्‍मो गम्‍मत मन सिक्‍छाप्रद अउ समाज म संदेसा देवइया रहिस। दाउजी अपन गम्‍मत म हांसी-ठठ्ठा, बियंग अउ समाज के पीरा ला देखावय। इंखर ‘मेहतरिन’ गम्‍मत के सोर अड़बड़ रहिस। येमा समाज म छाये छूवा-छूत अउ कट्टर बाम्‍हनवाद के हांसी-बियंग म जब्‍बर विरोध रहिस। ‘इरानी’ गम्‍मत म हिन्‍दू मुसलमान भाईचारा अउ परेम के संदेसा रहिस, बुढ़वा अउ बालविवाह के विरोध म घलव इमन ह एक ठन नकल खेलय तउन ह भरपूर हांसी-बियंग संग संदेसा देवय। इखर इही नकल ला पाछू हबीब तनवीर जी ह ‘मोर नाव दमाद मोर गांव के नाव ससुरार’ नाम ले खेलिस तउन हा देस-बिदेस म अड़बड़ पसंद करे गीस। दाउजी ह अपन गम्‍मत म उही समय के समाज के स्तिथि ला देखावय, इखंर ‘मरारिन’ नकल म देवर भउजी के बीच दाई बेटा कस परेम ला बतावत रहिसे त ओ समय स्‍वतंत्रता आन्‍दोलन ल बढ़ाये खातिर देसभक्ति के नकल तको करे जावय जेन म अंग्रेज मन बर कड़ा ले कड़ा पाठ बोले जाए। दाउजी के अंग्रेज मन के बिरोध म गम्‍मत खेलइ के कारन कुछ दिन ले इंखर गम्‍मत म अंग्रेज सरकार ह प्रतिबंद लगा दीस तभो ले दाउजी अपन रंग म रंगे गांव-गांव जाके नाचा खेलत रहिस।
दाउजी ह नाचा म फिलमी प्रभाव ले होवत बेढ़गापन ला रोके बर अउ नाचा म छत्‍तीसगढ़ के पारंपरिक स्‍वरूप ला बचाए राखे काम करिन । दाउ मंदराजी ह हमर पारंपरिक नाचा के बढ़ोतरी खातिर येमा विकास तको करिन। खड़े साज के नाच पार्टी म मसाल के जघा गैसबत्‍ती लवइया, चिकारा के जघा हरमोनियम अउ गोहर पार के पाठ बोलई के जघा माइक ला बउरइया दाउ मदराजी रहिन। महिला के पाठ करइया पुरूस कलाकार के जघा म देवरनिन टूरी मन ला नाचा म लाये के साहस तको दाउ मंदराजी मेर रहिस जउन ह समाज के ठेकेदार मन के मीन मेख निकलई ला ठेंगा देखावत फिदाबाई, रेखा बाई, बसंती बाई जइसे छत्‍तीसगढ़ माटी के सोना मन ला नाचा के मंच देवइस। खड़े साज के नाचा ले आज के आधुनिक नाचा अउ लोकनाट्य के बड़का नागर रूप म लाये के पाछू दाउ मंदराजी के प्रयास ये। पहिली बार दाउ मंदराजी ह रायपुर जइसे बड़े सहर म टिकिट लगाके अपन रवेली रिंगनी साज के नाचा ला एक-डेढ़ महीना ले पाल-परदा सहित पेस करिन। तेखर पाछू सबे छोटे बडे नाच पार्टी मन दाउजी के नकल करत रहिन। दाउ मदराजी अपन उम्‍मर भर नाचा के संग जीइस। उंखर खेती-खार सब परिया पर गे नइ तो नाचा के आयोजन बर होये खरचा बर बेंचा गे। धीरे-धीरे दाउ मंदराजी के जम्‍मो जमीन बेंचा गे फेर दाउजी अपन नाचा के धुन ल नइ छोडिन। नाचा के अभी जउन रूप हम देखत हावन तउन ह दाउ मदराजी के समरथ ले, उंखर पंदोली देहे ले पाये रूप आय। नाचा म दाउ मंदराजी के योगदान ला सदा-सदा ले सुरता राखे जाही।
संजीव तिवारी

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