जइसे खाबे अन्न तइसे बनही मन

‘सेठ ह कहिथे- महंतजी, मे ह चोरी के बाहना बिसाय रहेंव व वोमा मोला अड़बड़ फायदा होइस तेकरे सेती में ह मंदिर म दान दे रहेंव। महंत जी वो अनाज के प्रभाव ल समझिस’
हमर खवई पिययि ह हमर मन का बनाथे- बिगाड़थे एकरे सेती हमर सास्त्र-पुरान ह खाय-पिये म पबरित रहय। अइसे बताय हे। जेन धन ले अनाज बिसाय गे हे वोकरो असर ह मनखे के मन ल परभावित करथे।
वृन्दावन (उ.प्र.) के घटना आय- एक मंदिर म एक झन महात्मा रहत-रहय। एक रात के घटना आय वो ह खा पी के सुतिस त वोकर मन म लालच के भाव आगे वो उठिस अउ भगवान के गहना ल समेट के भाग गे। बिहनहा जब वो ह नहा धो के पूजा म बइठिस त वोकर मन ह पबरित हो गे रहय।वोला अपनी करनी ऊपर पस्चाताप होइस अउ वापिस मंदिर डहर चल दिस।
वोति मंदिर म चिलपों माचे रहय। महात्मा ऊपर कोनो ल सुभा नि होवत रहय के बा ह गहना ल चोराय होही। उही टेम के महात्मा ह मंदिर म पहुंच गे अऊ सबे बात ल मंदिर के महंत ल बता दिस अउ यहु बता दिस के रात के खाना खाय के बाद वोकर मन म अइसना बिचार उठिस अउ ये करनी ल कर डारिस। महंत जी ह रात के जेन खाना बनाय रहय तेला बलाइस अउ पूछिस के काल रात के खाना ह कउन अनाज के बने रहिस? वो ह बतइस के नगर के एक झन सेठ ह भंडारा बर जेन चाऊंर भेजे रहिस हे वोही ल रांधे गे रहिस। त वो महंत ह वो सेठ ल बलाके पूछथे के सेठ मैं कइसे भडारा बर चाउंर ल भेजे रहे। सेठ ह कहिथे- महंतजी, मे ह चोरी के बाहना बिसाय रहेंव व वोमा मोला अड़बड़ फायदा होइस तेकरे सेती में ह मंदिर म दान दे रहेंव। महंत जी वो अनाज के प्रभाव ल समझिस अउ महला ल कहिस- के तुम्हर ये जेन कुविचार आइस तेन अन्न के परभाव के कारन होइस।
कहे के सार के हमाना खान-पान म बिसेस सावधान रहना चाही। जहां-तहां खा ले म मन के दोस के सभावना बने रथे।
राघवेन्द्र अग्रवाल

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