जिनगी के रद्दा

जिनगी के रद्दा अड़बड़ लम्भा दू ठिन हमरे चरन
गोड़ ला कहाँकहाँ हमन धरन
चले पुरवहिया सनन सनन्
बिजहा रे डारेन नाँगर चलाएन
धाने के नेवता माँ बादर ला बलाएन
किंजरकिंजर के बरसौ रे बादर, तुंहरे पंइया परन
सावन भादों मां ठंऊका रे बरसिस पानी झनन झनन
चले पुरवहिया सनन सनन्
अगहन मां बड़े रे बिहनिया नहाएन
धाने लूएन करपा ला बाँधि के ले आएन
मन हर चिरई असन फुदकै अऊ नाचै भुँइया गगन
ब्यारा मां बइला मन दंऊरी फँदाए दंऊड़ै घनन घनन
चले पुरवहिया सनन सनन्
धाने ला बेचे बर जावत हवन मंडी
कऊनो ओढ़े कथरी ते कऊनो ओढ़े अंडी
कऊनो छाँड़य ददरिया ते कऊनो बपुरा गावथे भजन
गाड़ा के बइला के टोंटा के घन्टी बाजै टनन टनन्
चले पुरवहिया सनन सनन्
भइया के बिहाव माढ़िस खोजी खोजी
पुतरा असन भइया, पुतरी कस भऊजी
रात दिने भइया लुहुरटुहुर भऊजी मुसकावै हो के मगन
भऊजी के सॉटी छम छम बोलै, चूरी बाजै खनन खनन्

चले पुरवहिया सनन सनन्

मुकुन्‍द कौशल

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One comment

  • टीकाराम देशमुख

    कॊशल जी के रचना ह बड़ निक लागथे

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