डबरी झन बनय डबरा – गुड़ी के गोठ

आधुनिकता के चकाचौंध म चौंधियाये हमन जेन गति ले अपन परम्परा, संस्कृति अउ जीवन जीए के ढंग ल बिसरावत जावत हवन, उही गति ले कई किसम के समस्या घलोक हमर मन के आगू म अभरत जावत हवय। चाहे वो विकास के बात होवय ते सुख- समृद्घि के जम्मो म एकर पाछू विनास अउ पीरा के आरो मिल जाथे।
आधुनिकता के नाव म जबले हमन अंध औद्योगीकरण ल बढ़ावा दिए हवन तबले खेती-किसानी, जंगल-झाड़ी, डोंगर-पहार अउ तरिया-नंदिया मन के दुरगत मातगे हवय। हमर जानती म छत्‍तीसगढ़ म 60 ले 70 इंच तक बरसा होवय। असाढ़-सावन म कतकों पइत अइसन होवय के झड़ी-झखर के सेती हफ्ता-हफ्ता भर तक सुरज नरायण के दरसन मुसकुल हो जाय। जम्मो नंदिया-नरवा मन म बइहा पूरा अउ उड़ेरा पूरा आ जावय। जिहां के मनखे तिहें सुकुरदुम सपटे रहि जाय। फेर आज के पीढ़ी ”झड़ी-झखर” काला कहिथे तेनो ल बने गतर के नइ जान पावत हे। एकर कारन आय-बरसा के कमतियाना अउ वोकर कारन हे पर्यावरण के विनास। जेन छत्‍तीसगढ़ के अस्सी प्रतिशत भू-भाग म कटाकट जंगल रिहीसे जिंहा के मैदानी भाग के गांव मन म तको जंगल मुंहा झबड़ी अउ खेत के मेड़ मन रिहीन हें, उहां अब चारों मुड़ा उजार बरोबर नजारा दिखथे।
इही सबला देख-सुन के प्रदेश सरकार के चेत ह अब थोरिक जागे अस लागत हे, एकरे सेती अक्ती के दिन ले पूरा राज भर के तरिया-नंदिया मन के कोड़ई-खनई के बुता चालू करे गे हवय। ए अच्छा बात आय के बरसा के पानी ल चारों मुड़ा ले रोके-छेंके के बेवस्था करे जाय। फेर मोला लागथे के बरसा के कम होवत मात्रा ल बढ़ाए के घलोक उदिम करे जाय। अउ अइसन तभे हो सकथे जब औद्योगिक प्रदूषण ल कम कर के पर्यावरण संरक्षण के बुता ल आगू बढ़ाए जाय।
मोला अइसे लागथे के अइसन जम्मो किसम के बुता खातिर सिरिफ सरकार के मुंह ल देखना बने बात नोहय। एकर खातिर जनता ल घलोक अपन सख भर उदिम करे बर लागही। काबर ते अइसन कतकों पइत देखे गे हवय, जब सरकार तो अपन बुता ल करथे, फेर जनता के सहयोग अउ चेतना के अभाव म वो बुता ह अपन लक्ष्य ल पाए नइ सकय। छत्‍तीसगढ़ के पहिली कांग्रेसी सरकार के बखत जेन ”जोगी डबरी”के नाव म अभियान चलाए गे रिहीसे वोकर दुरदशा ल जम्मो प्रदेश देखे हे। जे किसान मन अपन-अपन खेत म जोगी डबरी बनवाए रिहीन हें, उहू मन अब बो ”डबरी” ल ”डबरा” बना डरे हें, जबकि उन चाहतीन त ‘डबरी’ ल बड़का रूप देत ‘तरिया’ के आकार दे सकत रिहीन हें। कहूं वो बखत चालू करे गे ‘डबरी’ अभियान ल आज तक चालू रखे गे रहितीस त आज जेन भू-जल स्तर अउ पर्यावरण के चिंताजनक रूप देख जावत हे वइसन देखे ले कम से कम अभी तो नइ मिलतीस।
सुशील भोले
41191, डॉ. बघेल गली
संजय नगर, टिकरापारा, रायपुर

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