तोर मया

जड़कल्ला म गोरसी आगी कस,
पंडवानी के रंगधरी रागी कस
जोर जुलूम में बिदरोही-बागी कस,
बडे-बुजुरूग में नेवत पै लागी कस,
रुस-रुस लागथे तोर मया॥
धपकाला म करसी पानी कस,
चन्दा के ओग्गर जवानी कस,
सुघ्घर राज के रजधानी कस
लाल-लाल कलिन्दर चानी कस,
गुरतुर लागथे तोर मया॥
करमा के मांदर थाप कस
ददरिया के तान अलाप कस
नवां घर म चढ़त सिलाप कस
घर पहुंचे म बांचे धाप कस
सुर-सुर लागथे तोर मया॥
बर-बिहाव में भड़ौनी गीत कस
पुरइन पत्ता म ठाहरे शीत कस
बड़ दुरिहा के लागमानी हित कस
देवता-धामी के पावन चरित कस
फुर-फुर लागथे तोर मया॥

आत्माराम कोशा ‘अमात्य’
अध्यक्ष,
छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति जिला इकाई
राजनांदगांव

Related posts:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *