दूसर हो जाथे





जे हर पर के प्रान बचाथे
तेकर से इस्वर सुख पाथे
बुधमता मन सिरतो कहिथे
वनिजेच मां लछमी बसथे
मनखे-मनखे होथे अंतर
कोनो कीरा कोनो कंकर
दुनों दिन ले बिनसिन पांड
हलुवा मिलिस मिलिस नई माड़
दू कौरा जब जाथे भीतर
तभे सूझते देंवा-पीपर
मनखे ला जब बिपदा आथे
तब अपनो दूसर हो जाथे

सुकलाल प्रसाद पाण्डेय



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