देवारी तिहार के बधई

Arun Nigam
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अँधियारी हारय सदा , राज करय उजियार
देवारी मा तयँ दिया, मया-पिरित के बार ||
नान नान नोनी मनन, तरि नरि नाना गायँ
सुआ-गीत मा नाच के, सबके मन हरसायँ ||
जुगुर-बुगुर दियना जरिस,सुटुर-सुटुर दिन रेंग
जग्गू घर-मा फड़ जमिस, आज जुआ के नेंग ||
अरुण कुमार निगम
http://mitanigoth.blogspot.in
[/bscolumns][bscolumns class=”one_half_last_clear”](देवारी=दीवाली,तयँ=तुम,पिरित=प्रीत,नान नान=छोटी छोटी,नोनी=लड़कियाँ, “तरि नरि नाना”- छत्तीसगढ़ी के पारम्परिक सुआ गीत की प्रमुख पंक्तियाँ, जुगुर-बुगुर=जगमग जगमग,दियना=दिया/दीपक,जरिस=जले, सुटुर-सुटुर=जाने की एक अदा,दिन रेंग=चल दिए,फड़ जमिस=जुआ खेलने के लिए बैठक लगना,नेंग=रिवाज)देवारी (सं० दावाग्नि) कछारों में दिखाई देनेवाला लुक। छलावा। उदा०: जानहुँ मिरिग देवारी मोहे (जायसी) स्त्री०=दीवाली (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)[/bscolumns][bscolumns class=”clear”][/bscolumns]

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