धान बेचई के करलई

किसान के पीरा ह जग हँसई होगे।
मंडी म धान के बेचई करलई होगे॥
अधरतिहा ढिलाइस बईला-गाड़ी।
जुड़ म चंगुरगे हाथ-गोड़ माड़ी॥
झन पूछ भूख, पियास नींद के हाल।
चोंगी, माखुर तको जइसे, होगे बेहाल॥
होटल के गरम वोहा दवई होगे।
मंडी म धान के बेचई, करलई होगे॥
लोग हे मंडी म धान के ढेरी।
खचित हे हमर पर होही गा देरी॥
नोनी के दई ह बने त केहे रिहिस।
दू ठन चाउर के चीला, चटनी संग जोरे रिहिस॥
ऊहू गठरी कती गिरिस, मोर रोवई होगे।
मंडी म धान के बेचई, करलई होगे॥
किसान के दु:ख-पीरा कोन ह समझीही।
कोन ह ओखर संही, दु:ख ल सइही॥
तभो ले संतोष हे तियाग अऊ तपस्या म।
अन्नदाता नांव धराय हे तभे त दुनिया म॥
हमरे त जांगर म, पर के बड़ई होंगे।
मंडी म धान के बेचई, करलई होगे॥
गणेश राम पटेल
साहित्य सेवक
ग्राम व पो. बिरकोनी
जि. महासमुंद (छ.ग.)

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  • Mandi me dhan bhechai ke karlai to ye kavita le jada he .. dham beche bar ja auv tukur tukur dekhat la seth man la .. ek baar tor dhan mandi me chal dis taahan vo dhan tor nohe, badhe adhatiya auv seth man ke daya kripa se jo bhi bhav milage vola dhar ke aaja ..
    ye kavita ha to dhan bheche ke karalai ke keval jhanki pesh kare he .. pura picture la dekhana he te mandi me jaake ek baar dhan bhechel laagahi ..

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