नवा बछर म करव नवा शुरुआत




हमर भारत म बारो महिना तिहार अऊ खुसी के दिन आवत रथे, फेर अंग्रेजी कलेंडर के एक चक्कर पुरे के बाद फेर एक जनवरी आथे अऊ ओला हमन नवा बछर के रुप म अब तिहार असन मनाये ल धर ले हन। येकर चलन हा अभी-अभी बाढ़ीस हवय, अऊ अब दिनो दिन बाढ़ते जावत हे। पहिली के मनखे मन चैत्र महिना में नवरात्रि के पहिली दिन आने वाला हिन्दी नवा बछर ल पारंपरिक ढंग ले मनाये अऊ ओला बड़ माने।
अंग्रेजी हिन्दी दुनो नवा बछर के अपन-अपन ठऊर म अलग-अलग महत्ता हवय। फेर मोला लागथे मनखे मन हा ओला भुला के दिखावा करत हवय। नवा बछर मनाये बर देस परदेस म इक्कतिस तारीख के रतिहा कोरी खेरखा फटाका फोरही अऊ कतको जगा तो फटाका फोरे के रिकार्ड बनाये म घलो लगे रथे। रिकार्ड के मतलब मोर हिसाब ले अइसन बुता करके देखाना होथे जेखर मनखे अनुसरन करके अपन जिनगी म नवा मुकाम बना सके, कुछु सिख के अपन अऊ अपन देस के नाव ल आघू बढ़ा सकय। फेर आधा घंटा, एक घंटा, दू घंटा ले लगातार फटाका फोरे म रिकार्ड असन का बात होवत हे मोला समझ नई आवय। अऊ फेर अइसन अतलंगहा फटाका फोरे ले पईसा अऊ पर्यावरण के नुकसानी कतका होवत हे ते बात ल सबो जानत हव। ऐखर ले आने हिन्दी नवा बछर हा हमर मन बर सोजहे कलेंडर पलटे के बेरा नई राहय। ये बेरा हा हमर मन के धार्मिक अऊ समाजिक बुता काम ल करे के बेरा रथे, इही बेरा म हमर मन के बर-बिहाव असन पोठ बुता घलो होथे। अऊ जतका गोठीयाबो गोठ हा पुरते रही। फेर अभी अभी अंग्रेजी कलेंडर के गोठ होना चाही।
सरकारी काम बुता हो चाहे बिहाव के कारड हो अऊ चाहे कोनहो मनखे के जनम तारीख बताना हो जम्मों बर अंग्रेजी कलेंडर के तारीख अऊ दिन ल सुरता राखे जाथे। अऊ अब तो हमन ल हिन्दी महीना के जानकारी घलो नई राहय। अंग्रेजी कलेंडर हा लोगन ल सरल लागथे अऊ सबो झन एक बिचार ले येला अपना घलो डरे हे। ते पाय के येकर नवा बछर सबो झन बर बड़ मायने घलो राखथे।
एक जनवरी ले नवा बछर के शुरुआत मान के कतको झन नवा बुता शुरू करथे कतको झन गाडी बिसाथे ये सबो मानथे कि जिनगी भर ये तारीख मन सुरता रही अऊ उमंग उल्लास संग म ये बेरा ल सुरता करत बनही। अऊ कतको झन के जनम दिन, बिहाव होय रथे तेन दिन, काखरो छट्ठी, घर पूजा, दुकान के शुरुआत, सबो ल मनखे मन अंग्रेजी कलेंडर के तारीख ल देख के मनाथे। लईका के स्कूल म भर्ती अऊ ओकर बिहाव करे के ऊमर होगे यहू ल तय करे के आधार इही हरे। अऊ कतको झन के रिटायर होना, अऊ बीमा के दिन पुरना अऊ हिसाब-किताब जम्मों बुता इही तारीख मन के भरोसा म होवत हवय।
जनवरी महीना के एक तारीख ल घलो अब के मनखे मन तिहार असन मानथे। अऊ अब तो मोबाईल म बधाई संदेस भेजईया अऊ अपन प्रचार के बहाना खोजईया नेता मन बर घलो ये मऊका हा बने सुहाथे। हर बखत गोठ होथे की हमर देश हा दू सौ बछर ले गुलाम रीहिस त ओखर काय असर अभीच ले दिखथे। त मोर मानना हे अंग्रेजी कलेंडर ल जगा देना अऊ अतका मानना ये बात के सबले बडे चिन्हा हरे। अऊ कोनहो गलत समझे चाहे सही ये अंग्रेजी कलेंडर ल बऊरे बर अब नई छोड़ सकय।
अब नवा बछर ल मनाना कईसे चाही ये गोठ ल करबे त जतकी मुहु ओतकी गोठ होही। फेर नवा बछर में पिकनिक, पार्टी, फटाका, बधाई भेंट ( उपहार, ग्रिटिंग कार्ड), डी.जे. लगा के नाचना, कार्यक्रम करवाना सरीखे कई ठन नवा उदीम हा जम्मों झन के धियान अपन कोती करे हावय। ये बेरा म आने-आने कंपनी हा अपन समाना के किमत म छुट देके ग्राहक ल रिझाय के जतन घलो करथे अऊ कतको कंपनी हा अपन कर्मचारी मन ल बोनस अऊ बेतन बढोतरी असन उपहार घलो देथे।
ये सब तो नवा बछर ल माने के अपन-अपन ढंग हरे। फेर एक ढंग अईसे हवय जेहा हमर समाज ल पाछू ढकेल देथे, अऊ जम्मों मनखे के घेरी-बेरी आलोचना के बाद घलो दिनो दिन बाढतेच हे। मेहा बात करत हंव नशा अऊ जुंआ के। नवा बछर में कतको झन मंदीर के सिढीया चढना अऊ देवधामी जाके पुजापाठ करना बने समझथे। फेर बने देखबे त अईसन मनखे कम दिकथे अऊ नशा करईया आंय-तांय गाडी चलईया अऊ जुआं खेलईया मन के आरो ये दिन ज्यादा मिलथे।
अब हिन्दी नवा बछर हो चाहे अंग्रेजी कलेंडर के नवा बछर, ये सब बुता कोनहो बछर के कोनहो दिन नई फबे। फेर हिन्दी म एक ठन कहावत हे ना “पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए”। त मोर कहना हे कि मनखे पीये बर बहाना तो कर डारथे फेर अपन जिनगी गढे के लईक बेरा ल सोजहे म गंवा डारथे। फेर एक ठन गोठ ल अऊ माने जाथे कि नवा बछर के पहिली दिन जेन बुता करबे अऊ जइसन रहिबे वइसनहे बछर भर रेहे ल मिलथे। अऊ ये बात ल जम्मों मनखे जानथे तभो ले अपन आदत ले बाज नई आवय। मंद, कुकरी, बोकरा, जुंआ, अऊ आंय-तांय गाडी चला के झपईया मन ना अपन सरीर बर नई सोंचय, ना परवार बर अऊ ना समाज ना पर्यावरण अऊ ना अपन देस बर सोंचय। ओ मन ल तो बस अपन मस्ती हा बने लागथे।
अऊ मोर तो ईही मानना हे की जेन दिन हमन अपन धरम-करम ल जानबो, देस बर हमर का सेवाबुता हे तेला समझबो, समाज अऊ परवार बर का जिम्मेदारी हे तेला जानबो, पर्यावरण जिनगी बर कतका जरूरी हे तेला जान के प्रकृति के रक्छा करबो उही दिन हमर बर सबले अच्छा नवा बछर के शुरुआत होही। मनखे चाहे त हिन्दी नवा बछर हो चाहे अंग्रेजी कलेंडर के जनवरी महीना ले ये बुता मन के शुरुआत कर सकत हे। अऊ मोर दावा हे कि अइसन करे ले आत्मा ल जेन खुसी मिलही ओ आने तरीका ले नवा बछर मनाये म नई मिलय।

ललित साहू “जख्मी” छुरा
जिला-गरियाबंद (छ.ग.)
9993841525







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