नानपन के होरी





नानपन म होरी खेले म अड़बड़ मजा आवय,
खोर गली के चिखला म, जहुंरिया मन घोन्डावय।

पहिली संझा होली के लकड़ी घर घर ले लावन।
सियान संग पूजा करके होली हमन जलवावन।
अधरतिया ले नंगारा बजाके अंडबंड गीत गावन।
कभू कभू परोसी घर के, झिपारी, लकड़ी चोरावन।

उठ बिहनिया बबा संगधरके होली डांड़ जावन।
लकड़ी छेना नरियर डारन ऊद बत्ती जलावन।
बबा पाछू करीस ताहन नरियर ल खोधियावन।
फोरके नरियर खुरहोरी ल झपट-झपट के खावन।

पिचकारी म पानी भरके रेंगईया ऊपर पिचकन।
कनकन पानी दुसर पिचके त एती ओती बिदकन।
चूरीरंग फुग्गा म भरके फेंक फेंक के मारन।
गुलाल लगईया आय ऊंखर में टेहर्रा रंग डारन।

ठेठरी खुरमी अरसा रोटी चोरा लुका के लावन।
संगवारी ल टुहूं देखाके बांट बिराज के खावन।
भांग बरफी संग सरबद पीके जदबद गोठियावन
ककादाई अऊ डोकरा बबा ल हमन भारी तंगावन

नंगारा बजईया मन घर घर जाके बजावय।
पूरा गाना नई आय त आधा आधा गीत गावय।
हमन नाच देखावन त अड़बड़ मजा आवय।
गवईया बजईया मन तभे जादा बिदागरी पावय।
नानपन म होरी खेले म अड़बड़ मजा आवय।

हीरालाल गुरुजी “समय”
छुरा जिला गरियाबंद
9575604169






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