पहुँचगिस संसद

Sitaram Patel1.- मोर ऑंसू झन गिर/ एकर पिवइया/ नी जनमिस हावय वोहर अजन्मा हावय/ ऑंखी मा भरभर भरे र सागर साही/ बोहागे ता दिखबे खाली गागर साही/ कंकड़ के चोट ले/ छलक जाए/ सागर की परिभाशा/ गलत हो जाही/ अउ तोला बोहाय के लत पड़ जाही/ कोन इहें आपन/ कोन हावय पर/ सबो एकेठन दाई/ के हावय जन्माय/ बॉंस एक दूसर ले घिसाके/ पैदा करथे आगि/ सबो जंगल हो जाथे राख/ राख होय हर सबो के नियति हावय/ करम ले फर के सोच अति हावय/ जादा फर के सोच मा / मारा जात हावय मति ईसर मर गिस हावय / या फेर मौत खुद ईसर हावय तभू ले जीना/ या खाली मौत के बारे मा सोचना/ आधा सती हावय/ सती आत्मा/ सत्यात्मा/ आपन पति/ परमेसर ला / नवाजिनगी देथे/ संसार मा सती होय हर कोरा कल्पना हावय/ एक दूसर लाल हाथ मिलाय/ भगवा बस्तर पिहने/ कहत हावय/ राम नांव जपई हावय/ ऑंसू के कीमत / पीने वाला हर समझिही/ कतका मीठ हावय या नूनछूर/ जहर भरे हावय या अमरित/ जिनगी दहकत आगि हावय/ या फेर राख साही बुताय/इ धंधा ला कोन्हों गियानी, बिगियानी ,साधू नी सकीन बताय/ आंसू लुका जा / उछिन्द उढ़िया जा/ तैंहर नचोइया के नाचा साही/ नेतामन के भासन मा समा जाबे/ अमीरमन के महल मा लुका जाबे/ मोर कहना मान जा/ झन जाबे तैंहर हाथ फैलाय नर कंकाल के तीर मा/ इहां तोला कोन्हों नी पूछे/ ढुलकबे, गिरबे/ बोहा जाबे/ जब तैंहर बड़खा घर मा जाबे/ सोन के अक्षर मा तोर नांव लिखाही/ ना ना तिरिया के तीर झन जा/ अंचरा मा पोंछ दिही दाई के तीर जाबे/ ना ना/ चोनहा मा लपेट दिही/ कबि के तीर मा जाबे / सबद मा समेट दिही/ मनई के तीर जाबे/ मानवता के भेंट दिही/ अमीर करा जाबे/ डंडी मार/ सोन के रेट दिही/ गरीब के तीर जाबे/ खाली पेट दिही/ नेता करा जा तैंहर/ कोटि कोटि रूपया मा दूसर देस मा बेच दिही/ भ्रश्टाचारीमन के तिजोरी मा जा तैंहर/ उहॉं तैंहर राज करबे/ बेरोजगार करा जाबे खाली हाथ लहुटबे/ तोर ऑंखि धुंधला जाही/ किसान करा जाबे/ पछीना मा बोहा दिही/ चल निकाल आपन रथ/ अउ पहुंच संसद तीर
अम्बेडकर के तीर जाबे/ संबिधान सुनाही/ तैंहर पहुँच बड़खा मंतरी के तीर/ कइसे कइसे सौदा दिखाही/ जिहॉं तैंहर अराम ले रहि जाबे/मौत के तीर तोला कछु नी मिले/ जिनगी के तीर जा/ तोला जिनगी मिल जाही/ का बात करतहस यार/ मोर पहुँच संसद करा हावय/ मैंहर खुद नी पहुंचे/ फेर तोला खच्चित पहुँचा दिंहा/ अपन के वायदा तो/ कुधरा के लकीर हावय/
दुरपति के चीर हावय/ सुरसा के मुख/ हनुमान के पूँछ/ डूमर के फूल/ अगास के कुसुम/ गांडीब ले निकले तीर नी होइस/ मंजिल पहुँचे हर टेढ़ी खीर हावय/ मया झन समझ येला/ भयानक पीर हावय

2.- अरे का होगिस?/ कोन मोला उल्टा/ बमरी के डगाली मा टॉंग दिस/ अउ कोन मोर सरीर मा/ बिजली के झटका दिस/ मैंहर अधमरा टंगाय हांवव/ चमगिधली साही/ तरी मा बेंत पड़े हावय/ रेंगोइया मन आथें अउ बेंत मार के चल देंथे/ एकझन रेंगोइया/ लानिस हावय तलवार/ मैंहर सोंचत हावौं/ कर देथिस मोर गला मा वार/ फेर ये का करिस?/ वोहर तो डगाली मा बंधाय/ डोरी ला काट दिस/ मैंहर धड़ाम ले गिर गयेंव/ धरती मा/ मैंहर मरत मरत जी गयेंव/ जीयत जीयत मर गयेंव/ वोहर तलवार छॉंड़ रेंग दिस/ मैंहर सरकत सरकत/ तलवार के तीर आंय/ मुंहू मा तलवार धरें/ भूख मरत रहेंव/ मूठ ला चबांय/ तभू ले कुछू नी पांय/ पहिली हाथ के डोरी काटेंव/ जवनी हाथ मा धर के तलवार चूँद डाले गोड़ के डोरी/ फेर कुछू सोचें/ तलवार धर डेरी हाथ मा/ चूँद दे जवनी हाथ के अंगठा/ अउ पहुँच गयेंव/ रोजगार कार्यालय/ उहां पहुंच के जोर से चिंचियाय/ गुरू ये लेवा गुरू दछिना/ जवनी हाथ के अंगठा/ आप मैंहर बिकलांग हावंव/ कार्यालय ने निकलिस/ फटफटहा आवाज/ तैंहर बिकलांग नीही रांग हावस/ अंगठा के बिना कलम कइसे चलाबे/ मैंहर हाथ ले नीही/ मुँहू ले काम चलाहा/ मैंहर नेतामन साही खाली भासन झाड़िहा/ तैंहर वो काम ले घलोक गयेव/ अंगठा बिना ठेंगा कैसे दिखाबे/ भोले भाले जनता मला कइसे फुसलाबे/ तैंहर कुछू लायक नी अस/ तैंहर अफाहिज हस/ टुटे फूटे फ्रिज हस/ मैंहर चपरासी जइसने चापलूस बने गिलास मा भरी जूस बने/ गोठियांय चासनी स्वाद सनाय/ माई बाप हुजूर मालिक/ सबो हावा मोर आप/ मैंहर कहत हावौं साफ/ मैंहर कसम खाय हावौं
करिंहा नौकरी बरदीवाला/ चपरासी बेटर/ वकील कलेक्टर/ पुलिस टीचर/ स्वीपर मिनिस्टर/ बोला एमा कोन ला दिहा सर/ चल भाग साला फटीचर/ ओहर नरियाइस/ मैंहर रीस ले थरथरागे/ आत्महत्या के रास्ता अपनाय/ मैंहर जोर से नरियाय/ आ देख देस के करनधार/ जेहर कलम चलाथे/ अहू हर घलोक चला सकथे तलवार/ तलवार ले तरजनी ला चूँद दे/ फेर ओला दया नी आईस/ मांझा अंगठी ला चूंद दे/ फेर ओहर ऑंसू नी बहाईस/ अनामिका चूंदे हाथ के/ तभू ले बात नी करीस/ चिनी अंगठी काटे रात होगिस/ करिया रतिहा लाली लहू ले नहाइस/ मैंहर पूरा पंजा चूंद दे/ भुजा मा कर वार/ पूरा हाथ चूंद दे/ वो पियास मा मरत रिहीस/ मैंहर पियास मा मरत रहेंव/ नी गम पता रिहीस/ कोन जितबो पासा/ वो पिषाचिनी अउ मैंहर पिषाच/ रकत ग्रुप के करतहन जांॅच/ ए ग्रुप वालामन बाम्हन/ बी ग्रुप वालामन छत्रिय/ एबी ग्रुप वालामन बैस्य/ ओ ग्रुप वालामन सुदर/ देखत हावा बिगियान के बांटे ला/ चारों बरग हर सबो ला मारिस/ जाति जनजाति पिछड़ा सामान्य/ पद्मिनी चित्रिणी षंखिनी हस्तिनी/ षषक मृग वृश अष्व/ धरम अरथ काम मोक्छ/ ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ संन्यास/ बचपन किषोर जवानी बुढ़ापा/ तिरिया तैंहर नर ला जनमा के का पाय/ पिषाचिनी मैंहर क्या सोचे बर लागे/ तैंहर आपन पियास बूझा/ ऑंसू ले नीही / खून ले मोर/ खून ले मोर आंसू जादा कीमत हावय/ काबर कि वोहर पहुँचे हावय उहां/ जेहर देष के पति हावय/ जेहर आपन औरत ला पिंयार नी करके/ करथे बलात्कार/ येकर गहना गहना राखथे/ फेर ओला बेच देथे/ देष के भविस्य मा करिया हस्ताक्षर करथे/ अउ बेस्यामला पिंयार करथे/ देष के धन ओमन करा वार करथे/ वार ले तलवार के धियान आइस/ खट ले गोड़ के अंगठी ला चूंदे/ अंगूठामन घलोक नी बाचिन/ तभो ले बिकलांग नी कहलांय/ आभी ले कोन्हों पुलिस नी आइन/ मैंहर काबर दोख इमनला देंवो/ येमन बिना बजह ड़डा नी चलाइन/ रिष्वत के माल समझ नी खाइन/ जे कुछू पाइन ओइला खाइन/ सबो मा बरोबर छाइन/ येमन सांप्रदायिकता नी फैलाय/ नी करवाय दंगा/ इमन के आस्था ले भारत मा बोहात हावे गंगा/ गंगा मैली नी हावय/ कथे ओमन लफंगा/ शिक्षक घलो नी आइस/ बिना रूपया के षिक्षा नी देइस/ मोला नी किहीस ट्यूसन पढ़ांहा/ परीक्षा मा नकल करवांहा/ बिना पढ़े पास करवांहा/ मैंहर आपन दूनों गोड़ चूंद दें/ चोर डाकू मन के डर ले/ काकरो यहां नी लगे ताला/ आप कोन्हों नी लूटे/ बालामन के बाला/ कोन्हों नी करें किसोरीमन के कौमार्य भंग/ बिभचारीमन हो गे हावें अनंग/ तिरियामन घूमत हावें निसंक/ नी लें नर के संग/ डूबिन हावय समलैंगिकता के रंग/ आप दहेज नी ले सहेज/ एक रात पाछू दुलही के लास को देथे भेज/ पातिब्रत इहां अतका बढ़िस हावय/ पति मला मार मयारू के नसा चढ़िस/ थोर थोर लहू मोर रेंगत रेंगत पहुंचत हावय संसद/ नंगा होंय आइस मोला लाज/ साधू नी हों, नी हों मैंहर गुंडा/ जो घूमत रइथे मैंहर नंगा/ येकरे बर लिंग ला चूंद दे/ हो गयेंव मैंहर हिजड़ा/ कार्यालय ले निकलिस फेर वोईच सिरफोड़ अवाज/ मानव बम के साही/ जो जानथे मैंहर मरिहा/ तभू ले लटकाय रइथे/ हिजड़ा जा भाग/ इस देस ला तोर नीए काम/ जा पी मंदझाला में जाके जाम/ फेर तैंहर जुआ खेल/ नी हावय कोन्हों रेल/ जेहर एक्सीडेन्ट होही/आपन तिरिया ला हार/ आराम ले सूत जा/ तोर इतिहास सिखात हावय/ जुधिस्टिर ले सीख/ जेहर धरमराज कहलाथे/ हाथी अउ गुरूपु़त्र के नांव ला/ भरम मा राख/ तोला आधा सच कहलाथे/ इसन गुरू के सरन मा जा/ जेहर दोरन कहलाथे/ कुछू सिक्षा नी देके/ भीलपुत्र ले अंगठा मांग लेथे/ मैंहर ओकर बात ले / फेर घलोक नी डराय/ मैंहर मरत नी मरंय/ पेट पाप के प्रणयी/ आप होही तोर छयी/ चूंदे आंत बाहिर आ गिस/ ओला पूछे भैया आंत/ तोर होथे कोन्हों जात ओहर नी रहे किहीस/ मैंहर जोर ले थपड़ा मारे/ साला लबारी मारथस/ नेतामन के बड़खा ले बड़खा/ लबारी ला पचा देथस/ मोला कहत लजात हस/ गरीबमन के नान नान लबारी /कहे बर बाज नी आस/ कास ओकर भूख पचा पाथे/ ता ओहर बेमौत काहां मरथिस / फेर नेता काहो लबारी काहां मारथिस/ भूख ले नीही/ बीमारी ले मौत होइस हावय/ गरीबमन के नानू करू सच उगल देथे/ बेचारा बिना बजह मार खाथे/ छाती ला मारे / हिरदे निकलगिस/ मैंहर कहेंव तोर करनी के फर पायेंव/ वोहर झूंझवाइस अउ रोय बर लागिस/ मैंहर सिखाय बर चाहें मया/ सबो ला बतायबर चाहे मया/ मैंहर नी जाने स्वारथ बड़खा हावय/ महाभारत तो हो चुकिस/ महाविश्‍व पड़िस हावय/ ओकर एक झलक हिरोशिमा नागासाकी हावय आभी मगज जुध बाकी हावय/ आपन गला ला काट के देखत हावंव/ आपन महाविष्व/ धरम अधरम/ जय पराजय के लड़ाई/ जहर सदीमन ले/ पीढ़ी दर पीढ़ी/ चलत रिही/ कभू नी होय खतम/ मोर अतका करे के पाछू/ कार्यालय के ऑफीसर आईस/ मोर सिर के आघू सिर नवाइस/ अउ किहीस/ हामन आपन देस के एकझन बने सपूत खो दिस/ दू मिनट मौन रिहीस/ ओकर पाछू बारी बारी ले पूरा विष्व आइस/ अउ मोर खून से नहाइस

3.- आदमी ला चैन ले सोन नी देवा/ अउ गले ले सोन के चैन चुरा लेथा/ मोर चैन संग्रहालय मा पहुंचाइस देस के सहीद मा मोर नांव आइस/ परिवार केमन आपन पेट पाले बर/ दस लाख पाईन/ ददा बेटा ला भुलाइस/ बेटा चैन ले जिनगी चलाइस/ बोहरिया बूढ़ा मा सिर नी खपाइस/ औरत बेचारी जवानी जलाइस/ ओकर करा कुछू नी आइस

4.- जब मैंहर मरे/ सबो आ गिन/ मोर अरथी ला खांध देबर/ नकली आंसू बोहाय बर/ मैंहर खुसी रेहेन/ गिलसरीन ले सही/ आंसू मानिस मोर कहे ला/ वोहर पहुँचगिस आप संसद / आघू पाछू लिखिहा/ मोर फेर जनम होय मा/ गतांक के आघू/ पहुँचगिस संसद

5. – मोर फेर जनम होइस/ हिरदे तीर मा हाथीपांजा रिहीस/ हाथीपांजा ला परोसी लेगिन/ कांटा मोर हिरदे मा गड़त हावय/ मोर भाईमन मोर नांव ला सीताराम रख दिन/ का राम मरजाद के परतीक हावय आज मरजादा लूला खोरवा / घर मा पड़िस हावय एकरेबर चरित्रहीन मनई/ भौतिक सरग के दुवारी मा खड़िस हावय

सीताराम पटेल

Related posts:

Leave a Reply