पितर के दिन आ गे

पितर के दिन आगे संगी , बरा सोहारी बनावत हे।
बिहनिया ले उठ के दाई, हुम जग ला मढ़हावत हे।।
बबा ह आही कहिके , सबो झन ल बतावत हे।
दुवारी ला लीप बहार के , लोटा ला मढ़हावत हे।।

छानही मा कौआ बइठे , काँव काँव नरियावत हे।
डोकरी दाई देख देख के , बबा ला सोरियावत हे।।
बड़ सुरता आवत हावय , नाती ल बतावत हे।
बरा सोहारी राँध राँध के , पितर ला मनावत हे।।

साल भर मे एक दिन , सबके सुरता आवत हे।
हुम जग ला दे के संगी , मन ला मढावत हे।।
फोटू ला मढ़हा के ओकर , बरा ला खवावत हे।
एक लोटा पानी देके , पुरखा ला मनावत हे ।।

प्रिया देवांगन “प्रियू”
पंडरिया छत्तीसगढ़

संघरा-मिंझरा

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