पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा मन के सुरता : नारायणलाल परमार

व्‍हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार मन के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन–

अँखियन मोती

मन के धन ला छीन पराइस
टूटिस पलक के सीप
उझरगे पसरा ओकर
बाँचे हे दू चार
कि अँखियन मोती ले लो ।

आस बुतागे आज दिया सपना दिखत हे
सुन्ना परगे राज जीव अंगरा सेंकत हे
सुख के ननपन में समान दुख पागे हावै

काजर कंगलू हर करियाइस
जम चौदस के रात।
बारिस इरखा आगी में
बेचै राख सिंगार
सहज सुरहोती ले लो
कि अँखियन मोती ले लो ।।
Narayan Lal Parmar
नारायणलाल परमा

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