मेजाई के उपहार

OH‘O’ HENRY
(WILLIAM SYDNY PORTER)
The Gift of the Magi
(1862 – 1910)

संक्षिप्त परिचय
’ओ. हेनरी’ के मूल नाम विलियम सिडनी पोर्टर रिहिस, इंकर जनम 11 सितंबर 1862 अउ निधन 05 जून 1910 म होइस। आप बैंक क्लर्क के नौकरी करत रेहेव। 1894 म 4000 डालर के चोरी के आरोप म आप ल जेल जाय बर पड़ गे। 1901 म छूटे के बाद आप अपन नाम ल बदल के ओ. हेनरी रख लेव। 1903 ले 1906 तक न्यूयार्क वर्ड मैगजीन बर आप हर हफ्ता एक कहानी लिखव।
आपके चार ठन कहानी –
1. द गिफ्ट आफ द मेजाई,
2. द फरनिश्ड रूम,
3. द रेनसम आफ रेड चीफ;
4 ’द लास्ट लीफ’ मन विश्व कथा साहित्य के अनमोल कहानी के रूप म जाने जाथे। इहाँ आपके दू ठन जगजहरित कहानी, The Gift of the Magi(10 अप्रेल 1906 म प्रकाशित) के छत्तीसगढ़ी म अनुवाद देय जावत हे। उम्मीद हे पसंद आही – कुबेर)

The Gift of the Magi
मेजाई के उपहार

एक डालर अउ सत्यासी सेंट। बस, अतकिच्। अउ यहू म साठ सेंट ह तो पेनी के रूप म रिहिस।1 यहू ह तो एक-एक दू-दू पेनी बर, हर बार किराना दुकान वाले ले, साग-भाजी वाले ले अउ कसाई ले, चिकचिक अउ मोल-भाव कर करके बड़ा कंजूसी करके, अउ उँकर ठोसरा सुन-सुन के, मक्खीचूस के आरोप ल चुपचाप सहि-सहि के, बचाय गे रिहिस। तीन घांव ले गिनिस वोला, डेला ह। एक डालर अउ सत्यासी सेंट। अउ अगला दिन क्रिसमस (बड़े दिन) के तिहार हे।
बिलकुल साफ हे कि वोकर पास येकर सिवा अउ कोई चारा नइ हे कि वो अपन छोटकुन सोफा म पड़े-पड़े फड़फड़ाय, रोय अउ चीखे-चिल्लाय। अउ डेला ह इही करत हे। जउन ह मन के भावना ल अउ उद्वेलित करत हे कि वास्तव म जिंदगी ह सिसकइ, रोवइ अउ मुस्कुराहट ले मिल के बने हे; वहू म सिसकइच्-रोवइ ह जादा हे।
घर के मालकिन ह जब धीरे-धीरे पहिली माला से दूसर माला म आइस तब अपन घर के हालत ल देखिस। बीस डालर हर हफ्ता किराया म सजे-धजे फ्लैट। ये न सिरिफ भिखारी मन के वर्णन आय बल्कि गली म भिखमंगा दल के करलई हरे।
खाल्हे ड्यौढ़ी म एक ठन पत्र-पेटी रिहिस, जउन म अब कोनांे चिट्ठी-पत्री नइ डले; एक ठन बिजली-घंटी के बटन हे जेमे अब धोखा म घला कोनों आदमी ह अपन अंगरी ल नइ मड़ाय; अउ अब तक ’मि. जेम्स डिलिंगटन यंग’ नाम ल धारण करने वाला एक ठन पट्टिका घला उपस्थित हे।
पहिली जब संपन्नता के दिन रिहिस, वोकर कमाई हर हफ्ता तीस डालर रिहिस, ’डिलिंगटन’ ह ठंडा हवा म लहरात रहय। अब जब आमदनी ह कम हो के बीस डालर प्रति हफ्ता हो गे हे ’डिलिंगटन’ के अक्षर मन ह धुंधरा गे हे, हालाकि वो मन ह विनीत भाव अउ विनम्रता से सोचथें कि अब ये सिंकुड़ के खाली ’डी’ भर काबर नइ हो जाय। फेर रोज जब ’मि. जेम्स डिलिंगटन यंग’ घर आथे अउ अपन फ्लैट म पहुँचथे, ’मिसेज जेम्स डिलिंगटन यंग’ जेकर परिचय ऊपर डेला के रूप म दिये जा चुके हे, जउन ह बहुत भली हे, वोला कस के पोटार (अपन जबरदस्त आलिंगन म ले) लेथे।
डेला ह अपन रोवई ल बंद करिस अउ अपन गाल मन म पावडर चुपरिस। वो ह खिड़की तीर आ के बइठ गे अउ गुम खाय (अनमना ढंग ले) बाहिर कोती देखे लगिस, एक ठन बिलइ ह आंगन म रेंगत-रेंगत रूँधना कोती जावत रहय। वोला सब जिनिस ह उदसहा अउ सुन्ना-सुन्ना लगिस। (एक भूरी बिलइ ह रेंगत भुरवा आंगन म भुरवा रूँधना कोती जावत रहय।) कल क्रिसमस के तिहार हे, अउ जिम बर उपहार लेय खातिर वोकर तीर केवल एक डालर अउ सत्यासी सेंट हे जउन ल वो ह एक-एक पेनी करके कई महीना ले सकेलत आवत हे। बीस डालर म हफ्ता चलाना बहुत मुश्किल हे। जिम, वोकर प्रिय जिम, के उपहार खातिर केवल एक डालर अउ सत्यासी सेंट हे। जिम बर कोई सुंदर अकन उपहार लेय के योजना बनावत वो ह खुशी के कतरो घंटा गुजार चुके हे। जिम के सम्मान म कोई सुंदर अउ दुर्लभ-खरा चीज; कोई अइसन वस्तु जउन कीमती अउ छँटवा होय, जउन ल जिम ह गर्व से धारण कर सके।
वोकर कमरा के खिड़की के बीचोंबीच एक ठन आदमकद दरपन हे। बीस डालर प्रति हफ्ता के मकान म अइसन दरपन शायदे कोई देखे होही। खीधा खड़ा दर्पण जउन म कोई बहुत नाजुक अउ बहुत दुबला आदमी घला अपन प्रतिबिंब ल बहुत साफ-साफ देख सकथे। डेला जउन अभी भी एकदम छरहरी बदन के हे, ये कला म एकदम उस्ताद हे।
अचानक वो ह खिड़की डहर घूमिस अउ दर्पन के आगू म खड़ा हो गे। मात्र बीस सेकंड के भीतर वोकर आँखी म चमक आ गे फेर वोकर चेहरा के रंग फीका पड़ गे। तुरंत वो ह अपन बाल ल खोल दिस, वोकर बाल ह माड़ी के आवत ले झूल गे।
अब जेम्स डिलिंगटन यंग दंपति के पास खाली दू ठन कीमती चीज हे, जउन दोनों के ऊपर वो मन ल बहुत भारी गरब हो सकथे, पहला – जिम के सोना के घड़ी, जउन ह वोकर पिता अउ दादा से विरासत म मिले हे, दूसरा – डेला के सुंदर बाल जउन ह अइसे हे कि कोई महारानी के हीरा-जवाहरात के गहना मन ल घला फीका कर देय, जउन ल शीबा के महारानी ह देख लेतिस त इरखा के मारे जल-भून के राख हो जातिस, जउन ल डेला ह अपन राजकुमार ल खुश करे बर कभी-कभी खिड़की के बाहिर सुखाय बर लहरा देथे। जिम के घड़ी जेकर सामने बादशाह सोलोमन के संपूर्ण खजाना ह घला तुच्छ लगतिस अउ जिम ल वो ह घड़ी ल पहिरे देख्तिस तब वो ह इरखा के मारे अपन दाढ़ी के बाल ल नोच लेतिस।
अउ अब डेला के बाल ह पूरा खुला हे; अइसे लगत हे कि भूरा रंग के झरना वोकर शरीर म सुंदर चमकत अउ लहरावत झर-झर करत बोहावत हे। डेला के बाल जउन ह वोकर कीमती गहना हे, वोकर माड़ी के खाल्हे तक झूलत हे। अउ तब हताशा, उदासी अउ जल्दबाजी म वो ह अपन बाल ल एक घांव अउ देखिस। उदासी म वो ह छिन भर बर एक घांव लड़खड़ाइस, अउ वोकर आँखी ले दू बूंद आँसू निकल के पुराना लाल कालीन ऊपर टपक गिस।
वो ह अपन भूरा रंग के पुराना जैकेट ल पहिरिस, भूरा रंग के पुराना हैट ल पहिरिस। अतका तेजी लेे घूमिस कि वोकर स्कर्ट ह चकरी कस घूम गे। वोकर आँखी म अब तक जोरदार चमक हे। वो ह उत्ताधुर्रा मुहाटी ले बाहर निकलिस अउ सीढ़िया उतर के गली म आ गिस।
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जिंहा वो ह रूकिस, दुकान म लिखाय रिहिस ’मेडम सोफ्रोनी, बाल के सब प्रकार के समान’। एके सांस म दंउड़त वो ह सिढ़िया चढ़ के दूसर मंजिल म पहुँच गे, अपन आप ल संभालिस, वो ह जोर-जोर से हफरत रहय। मेडम सोफ्रोनी ह चकरित खा के वोला देखे लगिस।
’’का आप मोर बाल ल खरीदहू?’’ डेला ह पूछिस।
’’मंय ह बालेच ल खरीदथंव,’’ मेडम ह किहिस – ’’अपन हैट ल उतार, देखंव भला तोर बाल ह कइसे हे।’’
अउ भूरा झरना ह झर-झर करत लहरा गे।
’’बीस डालर,’’ अपन अभ्यस्त हाथ म वोकर घना केश ल उठावत मेडम ह किहिस।
’’जल्दी मोला दे दे।’’ डेला ह किहिस।
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वाह, अउ अगला दू घंटा तक, मानो गुलाबी पंख म सवार हो के वो ह इंहा ले ऊंहा, उहां ले इहां घूमे लगिस; अपन सुंदर बाल के कटे के पीड़ा ल भुला के। जिम बर सुंदर उपहार खरीदे बर वो ह कई ठन दुकान ल छान मारिस।
आखिर अंत म वोला मिलिच् गे। निश्चित रूप ले ये ह जिमेच् के खातिर बने रिहिस, कोनांे दूसर बर नहीं। अइसन जिनिस अउ कोनों दुकान म तो नइ रिहिस, वो ह बाहिर-भीतर, कतरो दुकान ल तो देख डरे हे। ये ह प्लेटिनम के बने जेबी चैन रिहिस, अकेला पदार्थ ह येकर कीमत के उचित घोषणा करत रिहिस, कलाकारी म बिलकुल सादा, अउ सती-जती मन के धारण करे के लाइक असली, वेश्या मन के नकली गहनागूठा जइसे नहीं। ये ह बिलकुल घड़ी के लाइक रिहिस। देखते सात वो ह जान गे कि ये ह जिमेच् के हरे। कीमत ल लेके दोनों संतुष्ट हो गें। वो डेला ले इक्कीस डालर लिस, डेला ह सत्यासी सेंट बचा के जल्दी-जल्दी घर वापिस आ गे। अपन घड़ी म ये चैन ल लगा के जिम ह अब पूरा इत्मिनान के साथ अपन संगी-साथी के बीच जा सकही। जतका सुंदर घड़ी, वोतका सुंदर ये; कभू-कभू वो ह चतुराई के संग चैन के जघा चमड़ा के पुराना पट्टा ल लगा के येला पहिर के देखय।
डेला जब घर पहुँचिस, वोकर (प्यार के ) नशा ह थोरिक उतरिस, तब वोकर मन म बुद्धिमत्ता अउ तर्कशीलता आइस। वो ह लोहा के छल्ला मन ल उतारिस, गैस जलाइस अउ अपन उदारता अउ प्रेम के कारण वोला जउन महान क्षति होय रिहिस, तेकर भरपाई करे म व्यस्त हो गे; जउन ह सदा बहुत कठिन (भयंकर अउ असाधारण) काम रिहिस; संगी हो! बहुत, बहुत कठिन (बहुत विशाल) काम।
चालीस मिनट के भीतर वोकर सिर ह छोटे-छोटे घुंघरालू बाल से ढंक गे अउ वो ह भगोड़ा विद्यार्थी मन सरीख बड़ा विचित्र रूप-रंग म दिखे लगिस। सावधानीपूर्वक अउ आलोचनात्मक भाव ले वो ह दर्पण के आगू म खड़ा हो के अपन प्रतिबिंब ल अबड़ देर ले देखिस।
’’पहिली नजर म, देखते सात यदि जिम ह मोला नइ मार डारही’’, वो ह अपन अप से किहिस – ’’तब वो ह जरूर इही कही कि मंय ह कोनी द्वीप के टूरी मन कस दिखत हंव। फेर एक डालर अउ सत्यासी सेंट म आखिर मंय ह अउ का कर सकतेंव।’’
सात बजे कॉफी बन गे अउ चोप्स तले खातिर स्टोव म कड़ाही तको चढ़ गे।
घर आय म जिम ह कभू देर नइ करय। डेला ह प्लेटिनम के जेबी चैन ल दुहरा के अपन हाथ म रख लिस, अउ मुहाटी कना, जिंहा ले हमेशा जिम ह प्रवेश करथे, टेबल के किनारा म बइठ गे; तभे वो ह पहिली मंजिल तक आने वाला सिढ़िया म वोकर कदम के आवाज सुनिस, थोरिक देर बर वोकर रंग ह फक पड़ गे, हर दिन सुखी हो, अइसन मौन प्रार्थना करे के वोकर रोज केे आदत रिहिस, फेर अभी वो ह मनेमन बुदबुदावत रिहिस – ’’हे ईश्वर! वोकर नजर म मंय ह अभी घला खूबसूरत दिखंव।’’
दरवाजा ह खुलिस, अउ जिम ह कदम रखिस अउ वोला बंद कर दिस। वो ह एकदम पतला-दुबला अउ उदास लगत रहय। बेचारा! अभी मात्र वो ह बाइस साल के हे अउ परिवार के बोझ वोकर कंधा म आ गे हे। वोला ओवरकोट के सख्त जरूरत हे अउ वोकर पास दास्ताना घला नइ हे।
जिम ह जइसने दरवाजा के अंदर कदम रखिस, वो ह एकदम जड़ हो गे, शिकार करे बर जइसे सेटर नाम के शिकारी कुकुर ह बटेर के ऊपर एकदम निशाना लगा के बइठ जाथे, वो ह टकटकी लगा के डेला ल देखे लगिस (वोकर निगाह मन डेला के ऊपर स्थिर हो गे), वोकर चेहरा म कुछ अइसन भाव रिहिस जउन ल डेला ह नइ पढ़ सकिस, जउन ल देख के वो ह कांप गे। वोकर चेहरा म न तो क्रोध के भाव रिहिस, न आश्चर्य के, न अस्वीकार के, न भय के, अउ न वो कोनों भाव जेकर बारे म डेला ह कभू सोचे रिहिस होही। अइसने सहजता के साथ बड़ा विचित्र भाव ले वो ह डेला कोती टकटकी लगा के देखत रहय।
डेला ह तड़प के टेबल से उठिस अउ वोकर पास गिस।
’’जिम! प्रिये’’ वो ह चीखिस – ’’मोला तंय अइसन झन देख, मंय ह अपन केश ल कँटवा के बेंच देय हंव, काबर कि क्रिसमस म तोला बिना उपहार देय मंय रहि नइ सकतेंव। ये ह फेर बढ़ जाही, तंय फिकर झन कर; तोला खराब लागत हे? मोला अइसन करेच् बर पड़ गे। मोर बाल मन आश्चर्यजनक ढंग ले तेजी से बढ़थें। ’क्रिसमस के बधाई हो!’ जिम, अब तो खुश हो जा। तंय नइ जानस कि मंय ह तोर खातिर कतका प्यारा, कतका सुंदर उपहार लाय हंव।’’
’’तंय ह अपन बाल ल कटवा देस?’’ बड़ मुश्किल से, जइसे ये खुला सत्य के ऊपर वोला अभी तक विश्वास नइ होवत होय; जइसे वो ह जबरदस्त मानसिक पीड़ा से उबरे होय, जोर लगा के जिम ह बोलिस।
’’कटवा देंव अउ बेंच देंव,’’ डेला ह किहिस – ’’जिम! का होइस, का अब तंय मोला पहिली जइसे नइ चाहस? बिना बाल के भी आखिर मंय विहिच तो आवंव, नहीं?’’
उत्सुकतापूर्वक जिम ह कमरा म येती-वोती देखिस। ’’तंय ह कहिथस, तोर बाल ह चल दिस?’’ आह भरिस अउ मूर्ति कस जड़ हो के वो ह किहिस।
’’वोला येती-वोती खोजे के जरूरत नइ हे,’’ डेला ह किहिस – ’’वो ह बेचा गे, मंय ह केहेंव न, बेंचा गे, चल दिस। आज क्रिसमस के तिहार हे, प्रिय! मोर संग अच्छा से रह, ये सब मंय तोरे खातिर तो करे हंव। हो सकथे मोर बाल के अंतिम समय आ गे रिहस होही।’’ बहुत प्यार से, गंभीरता से वो ह बोलत गिस – ’’फेर मंय तोला कतका प्रेम करथंव, कोई नइ जान सके, तोर प्रति मोर प्यार ह अनंत हे। जिम! का मंय चोप्स (खाना) परोस दंव?’’
जिम, जइसे अपन बेहोशी ले झकनका के जागिस। वो ह अपन प्यारी डेला ल कंस के पोटार लिस।
आवव! दस सेकंड बर हम कोई दूसर दुनिया म चलन अउ कुछ असंगत कथ्य मन के जांच करन। आठ डालर प्रति सप्ताह या एक करोड़ प्रति वर्ष – का फर्क पड़थे? एक गणितज्ञ या कोई बुद्धिमान आदमी ह आप ल गलत उत्तर दे सकथे, मेजाई मन अनमोल उपहार लाय रिहिन, काबर कि न तो वो मन गणितज्ञ रिहिन, न वो मन विद्वान रिहिन। ये बात आगू बिलकुल साफ हो जाही।
जिम ह अपन ओवरकोट के जेब ले एक ठन पाकिट निकालिस अउ वोला टेबल के ऊपर फेंक दिस।
’’डेल! मोर बारे म तंय गलत मत सोच।’’ जिम ह किहिस – ’’मंय नइ सोचंव बाई कि हेयर कट, या शेव, या शैम्पू के कारण तोर प्रति मोर प्रेम घट जाही। जब तंय ये पैकेट ल खोलबे, तंय छिन भर म सब बात ल समझ जाबे।’’
सफेद चंचल अंगरी मन धागा ल टोरिन अउ कागज ला फाड़िन। अउ तब आनंद के भावातिरेक म जोरदार ठहाका निकल गे; अउ तब हाय! छिन भर म आँसू अउ विलाप ले के वोकर अंदर नारी-सुलभ वो परिवर्तन आ गे; घर के मालिक ल सांत्वना अउ ताकत प्रदान करे बर जेकर सख्त अउ तुरंत जरूरत रिहिस।
काबर कि वोकर भीतर ठसाठस भरे पड़े रिहिस हे बहुत सारा कंघी; कंघी के पूरा सेट; डेला के कतरो दिन के साध ल पूरा करे खातिर। बहुत सुंदर कंघी, कछुआ के शुद्ध खोल केे बने, रत्नजटित किनारीदार; अदृश्य बाल म छाया के समान धारण करे के लाइक। ये मन बड़ा मंहगा कंघी हे, वो ह जानत रिहिस, अउ वोकर हिरदे के इही साध रिहिस, जेकर बर वो ह कब के तरसत रिहिस पर जउन ल पाय के वोकर जरा भी उम्मीद नइ रिहिस। अउ आज विही वोकर आघू म माड़े हे; फेर वोकर सुंदर बाल जउन ल संवारे अउ सजाय के इच्छा रिहिस, वो अब जा चुके हे।
पर अब वोला वो ह बड़ा प्यार से अपन छाती म लगा लिस, अउ थोरिक देर बाद डबडबाय (आँसू भरे) आँखी ले जिम कोती देख के अउ मुस्कुरा केे किहिस – ’’मोर बाल मन बहुत तेजी से बढ़थे, जिम।’’ अउ तब डेला ह मारे खुशी के छोटे चंचल बिलई कस उछल के चीखिस, ’’ओ, ओ।’’
जिम ह अभी तक वोकर सुंदर उपहार ल नइ देखे रिहिस। वो ह (डेला ह) बहुत अधीरता के साथ अपन हथेली ल खोल दिस जेमा प्लेटिनम के चैन ल रखे रिहिस। कीमती धातु के चमक ह डेला के खुशी के चमक के प्रतिबिंब म अउ जादा चमके लगिस। ’’का ये ह अपन आप म बेजोड़ नइ हे, जिम।’’ वो ह किहिस – ’’येकर तलाश म मंय ह पूरा शहर ल छान मारेंव। अब तंय दिन म सौ घांव समय देखे करबे। मोला अपन घड़ी ल दे। येमा वो ह कइसे दिखथे, मंय देखना चाहत हंव।’’
वोकर बात ल माने के बजाय जिम ह सोफा म ढलंग गे अउ दुनों हाथ ल अपन मुड़ी पीछू लगा के मुस्कुरा दिस। ’’डेला,’’ वो ह किहिस – ’’अभी कुछ दिन खातिर हम अपन क्रिसमस के उपहार मन ल रख देथन। वो मन ह अतका सुंदर हे कि तुरंत वोकर उपयोग करना अभी संभव नइ हे। तोर कंघी खरीदे बर मंय ह वो घड़ी ल बेच देय हंव। ला अब फटाफट पोप्स (खाना) लगा।’’
आप मन ल पता हे, मेजाई मन बहुत बुद्धिमान रिहिन हें, अपार बुद्धिमान; जउन मन शिशु (प्रभु यिशु) खातिर, जउन ह चारा के नांद म सोय रिहिस, उपहार ले के आय रिहिन।2 इही मन क्रिसमस उपहार देय के परंपरा के खोज करिन। बहुत बुद्धिमान रिहिन मेजाई मन, निसंदेह उंकर उपहार मन ह बहुत बुद्धिमता पूर्ण रिहिस हे। अउ इहाँ, आप मन कहि सकथव कि मंय ह एक फ्लैट म रहने वाले दू झन मूर्ख बच्चा मन के कहानी सुनाय हंव, जउन मन बड़ा मूर्खतापूर्वक अपन घर के सबले कीमती खजाना ल अपन नादानी म लुटा दिन। तब भी संगवारी हो, बुद्धिमान संगवारी हो! मंय ह आज कहि सकथंव कि इंकर उपहार मन सर्वाधिक बुद्धिमतापूर्ण रिहिन हे, अउ वो दुनो झन मन बहुत बुद्धिमान रिहिन हें। दुनिया म सबले जादा बुद्धिमान; काबर कि वो मन मेजाई दंपति रिहिन।
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रात्रि 09ः40
1- डालर, सेंट अउ पेनी ह अमेरिका के मुद्रा आवय, जइसे हमर भारत म रूपिया, आना अउ पइसा होथे।
2 – तीन आदमी जउन मन ज्योतिष विद्या के जानकार रिहिन, नक्षत्र-गति ले जान गें कि दुनिया के उद्धारकर्ता के जनम होने वाला हे। एक ठन नक्षत्र के गति के अनुसार वो मन चले के शुरू करिन अउ सात सौ किलोमीटर के रास्ता तय करे के बाद वो नक्षत्र ह एक जघा, जिहाँ प्रभु यिशु के जन्म होय रिहिस, ठहर गे। इही मन ल मेजाई कहे जाथे। मेजाई मन प्रभु बर उपहार ले के आय रिहिन। उंकर उपहार मन बहुत सुंदर अउ उपयोगी तो रिहिबेच्् रिहिन, फेर येमा भविष्य म घटने वाला घटना मन के संकेत अउ गूढ अर्थ घला छिपे रिहिस हे। पहला आदमी ह उपहार म सोना ष्ळवसकष् लाय रिहिस, सोना राजा-महाराजा मन ल भेट करे जाथे; येमा गुढ़ार्थ रिहिस कि जन्म लेने वाला शिशु ह भविष्य म राजा मन के राजा बनही। संगे-संग सोना के व्यवहारिक महत्व घला हे। दूसरा आदमी ह उपहार म लोबान ष्थ्तंदापदबमदेमष् ले के आय रिहिस। लोबान ह पवित्र अउ सुगंधित पदार्थ आय जेकर उपयोग पूजा म करे जाथे; अउ जउन ह खुद जल के खुशबू फैलाथे। येकर गुढ़ार्थ हे कि प्रभु यिशु ह सबसे बड़े पुरोहित के रूप म दुनिया के भलाई खातिर अपन आप के बलिदान करही। तीसरा आदमी ह उपहार म गंधरस ष्डलततीष् ले के आय रिहिस जउन ह इत्र हरे अउ जेकर उपयोग वो समय बदन के दर्द कम करे बर लेपन के रूप म घला करे जाय। ये ह दर्द अउ मृत्यु के प्रतीक आय। येकर गूढ़ार्थ ये हे कि प्रभु यिशु ह अपन जीवन म दर्द अउ मृत्यु सहि के दुनिया के उद्धार करही। संगी हो! ये तरह ले मेजाई मन के उपहार ह प्रतीकात्मक अउ व्यवहारिक महत्व के रिहिन हे, जेकर व्यवहारिक उपयोग तो रिहिबेच् रिहिस, येमा भविष्य के संकेत घला छिपे रिहिस हे कि प्रभु ह राजा, पुरोहित अउ उद्धारक के रूप म जनम लेय हे। (अनुवादक)
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कुबेर
राजनांदगाँव
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ई मेल kubersinghsahu@gmail.com

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