मोर मातृभाषा छत्तीसगढी हे : पालेश्‍वर शर्मा

छत्तीगसगढी मोर मातृभाषा आय । मोला अपन मातृभाषा उपर गर्व हे । मैं ये भाषा ल अपन महतारी के दूध संग पिये अउ पचाय हौं । मोर कान म जउन पहली सब्द परिस वो छत्तीहसगढी भाषा के रहिस । जब ले मोर महतारी जीयत रहिस हे तब ले मैं वोखर मुंह ले येही भाषा ल सुनेंव अउ गुनेंव । ये भाषा ल मोर पुरखा मन सैकडन बरिस ले बोलत आवत रहिन हें । मोला अपन पुरखा मन उपर गर्व हे, काबर के वोहू मन छत्‍तीसगढी भाषा ल गर्व के साथ बोलत रहिन हें ।

जउन भी अपन मातृभाषा म बोलथें वोखर उपर मोला गर्व होथे । जउन अपन मातृभाषा ल बोलब म लजाथे, संकोच करथे या हीन भावना के अनुभव करथे वोहर मातृद्रोही हे ओखर बर समाज म कोनो स्‍थान नई होना चाही । वोखर बहिष्‍कार होना चाही ।

महात्‍मा गांधी जी हर लिखे रहिस – ‘मेरी मातृभाषा में कितनी ही खामियां क्‍यों न हो, मैं उससे उसी तरह चिपटा रहूँगा, जिस तरह अपनी मॉं की छाती से । वही मुझे जीवनदायी दूध दे सकती है ।’ अपन मातृभाषा के प्रति हमर का दृष्टिकोण होना चाही, ये बात के शिक्षा हमला गांधी जी के कथन से सीखना चाही ।

कमी या खामी कोन भाषा म नई होवय ? जइसे हमर महतारी म कोनों बात के कमी या खामी हे तो का वोला हम छोड देबो ? हमर महतारी चाहे कतको गरीब हो, बीमार हो, वोला हम नई छोड सकन, वोकर सेवा से मुंह नई मोडे सकन, वइसनहे अपन मातृभाषा म कतको कमजोरी होवय, वोला नई छोडना चाही । बल्कि ये कोशिस करना चाही कि वोखर कमजोरी, कमी या खामी ह जलदी से जलदी दूर हो जाए । मातृभाषा के वोही दर्जा हे जउन महतारी के होथे । ते पाए के जइसे असली सपूत हर अपन महतारी के पूरा लगन अउ इमानदारी से सेवा करथे, वइसनहे हमला अपन मातृभाषा छत्‍तीसगढी के सेवा करना चाही । हमर मातृभाषा ल हमर सेवा के जरूरत हे ।

मोर महतारी के दूध के संग जउन संस्‍कार मोला मिले हे वोही संस्‍कार ल लेके मैं पले बढे हौं । मोर मातृभाषा छत्‍तीसगढी घलो वोही संस्‍कार के देन आय । बचपन म खेलत-खावत जउन भाषा ल बोलेंव अउ सुनेंव, वोह छत्‍तीसगढी च आय । आज मैं बडे हो गयेंव त का मोर मातृभाषा छोटे होगे ? चाहे मैं कतको बडे हो जांवव, अपन मातृभाषा के आघू छोटेच रहिहूं । महतारी के आघू वोखर लईका हर बुढुवा के होवत ले लइकाच रहिथे । अपन मातृभाषा के बडप्‍पन म हमर बडप्‍पन हे । जउन अपन मातृभाषा के बडप्‍पन ल नइ राखे सकै वोखर ले नीच कौन होही ?

हमर जतका भी संस्‍कार गीत हे, जम्‍मो हमर मातृभाषा म हे । ये संस्‍कार गीत हमला आने भाषा म थोरे मिलही ! हमर मातृभाषा हर ये संस्‍कार गीत मन ल हमर बर मोटरी म सकेल के बड जतन से राखे हवय । वोहर हमर थाती आय । हमर लोक-संस्‍कार हमर मातृभाषा के अंचरा म बंधाए हवय । अगर हम अपन मातृभाषा से विमुख होबो तो अपन लोक-परंपरा अउ लोक संस्‍कार से विमुख हो जाबो तो हमर का पहिचान रहि जाही ? हमर मातृभाषा के माध्‍यम से ही हमर पहिचान ह बाचें हे । मातृभाषा छत्‍तीसगढी के अस्तित्‍व उपर हमर पहिचान ह निर्भर हे । मातृभाषा छत्‍तीसगढी के अस्तित्‍व के उपर भारी संकट हे । वो संकट ल टारे बर हमला जुझारू बनके आघू बढना परही ।

हमला आने कोनों भाषा से विरोध या शिकायत नइये । सबला अपन-अपन बोली-भाखा बोले के अधिकार हे । हम सबो भाषा के आदर करथन, अतका उदारता हमर म हे । लेकिन, हम चाहथन कि हमरो मातृभाषा के उन आदर करंय । राख पत त रखा पत । दुनों हांथ म ताली बजथे । कोनो हमर मातृभाषा ल हीनैं अउ हम उंखर भाषा के गुन गावंन, ये नई हो सकय ।

जईसे सबला अपन मातृभाषा लिखे-बोले के अधिकार हे, वइसनहे हमू ला अपन मातृभाषा म लिखे अउ बोले के अधिकार हे । लेकिन ये अधिकार ल सार्वजनिक रूप म स्‍थापित करना परही । वोला सार्वजनिक रूप से मान्‍यता देवाय ल परही । हमला अधिकार पूर्वक अपन मातृभाषा ल सार्वजनिक रूप से लिखना अउ बोलना चाही । जब तक अइसे नई करबोन छत्‍तीसगढी भाषा के विकास नई होय सकय । जेखर मन म अपन मातृभाषा के प्रति प्रेम के भावना नई ये, वोखर जीवन पशु के समान हे, अइसन विद्वान मन के कहना हे ।

कोनों आर्थिक या भौतिक लाभ के सेती हम अपन मातृभाषा में लिखन या बोलन, अइसे नई होना चाही । का हम अपन महतारी से एकर बर मया करथन कि वोकर तीर गजब अकन गहना-गांठा अउ जमीन जायजाद हे ? वो अइसने हमला अपन मातृभाषा से घलो ‘फल के आसा’ छोड के मया अउ सेवा करना चाही । जइसे महतारी के दूध के रिन हर सपूत ल चुकाये बर परथे वइसनहे मातृभाषा के रिन ल घलो चुकाए बर परथे । ये रिन ल चुकाये बिना जउन जीयत हे, वोखर जीना हराम हे ।

पालेश्‍वर शर्मा

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8 comments

  • Paleshwara Babaa ye baat joun din Chhattisgarh ke aaj ke laika man janhi au apnahi vohi din kuchhu hohe, aapk ke goth ha Internet maa ais, bar neek lagis

  • गुरतुर गोठ मा आपके रचना रूपी फूल पहली बार आइस , मेकरा जाला में आप जइसन छत्तीसगढ़ के मनुज के सकल परतिभा ला आना चाही तभे छत्तीसगढ़, भाखा अउ हमार नवा पीढी के कल्याण होही. परनाम अउ सुआगत .

  • फ़ेर मुश्कील ये हे कि आजकल के ल‍इका मन ला अटक-अटक के अलकरहा अंग्रेजी बोले मा मानदिखथे अऊ छ्त्तीसगढी मा गोठीयायें मा हीनता दिखे लागथे !!

    अंग्रेजी समय के जरुरत हो सकत हे फ़ेर छ्त्त्तीसगढ अ‍उ छ्त्तीसगढी मा हमर नेरवा गडे हे !

  • jai johar kaka, abbadd sugghar lagish apan boli la pad ke au mola ek than gana”arpa pairi ke dhaar” chahiye tor tiran ho hi ta ehi ma dar debe…

  • Anonymous

    chhattisgarhi bhasha bar hamar hridya me abbad prem habe, haman kahu jaan , kakro se baat karan , apan chhattisgarhi bahasa ma gothiyana chahi , aaj kal ke laika
    man la ghalo bol hu ke chhatisgarhi goth me gothiyave , chhattisgarhi bhasha la apan dai dada ke barabar maanaye 🙂 , tum man apan kam la yuhi jaari rakhao , hamar kamana he ke tuman safal hohu

  • chhattisgarhi bhasha bar hamar hridya me abbad prem habe, haman kahu jaan , kakro se baat karan , apan chhattisgarhi bahasa ma gothiyana chahi , aaj kal ke laika
    man la ghalo bol hu ke chhatisgarhi goth me gothiyave , chhattisgarhi bhasha la apan dai dada ke barabar maanaye 🙂 , tum man apan kam la yuhi jaari rakhao , hamar kamana he ke tuman safal hohu

  • chhattisgarhiya sable badiya …ye asinhe nahi kahege ….ekhar vajah he aapman jaise theth chhatisgarhiya au ukhar atek ujjar-sughghar bichar , mahu la apan chhattisgarhiya hoy k adbad garab he …jai chhattisgarh

  • भैया जी जय जोहर …गुरतुर लेख ल पढ़ के मन म उमंग होईस … सुघर लेख ..

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