रहचुली

मेला म लगे हे रहचुली
तरी ऊपर घूमत सहेजे रहचुली
चेंवचेंव चेंव नरियावत हे रहचुली
बाबू, नोनी सबो ल बलावत हे रहचुली
पईसा म झूले बर बइठाए म रहचुली
आ रे टुरा झूल ले, कहिथे ये रहचुली
मीत-मयारू के मया ठउर ये रहचुली
आमा के ममहावत मऊर ये रहचुली
जिनगी के संसो-पीरा मेटाथे ये रहचुली
अंजरी भर खुसी बगराथे ये रहचुली
जिनगी घलो हावय एक ठन हमर रहचुली
मया, पीरा, लाली ओंठ देखाथे ये रहचुली
बिछरे संगी जंहुरिया मिलाथे ये रहचुली
गीत अऊ किलकारी सुनाथे ये रहचुली
आंखी के भाखा ल समझाथे ये रहचुली
गजब दिन होगे भूले रेहेन हमन रहचुली
सुरता नइ बिसरावय एको-कन रहचुली
आनंद तिवारी पौराणिक
श्रीराम टाकीज मार्ग
महासमुन्द

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  • सही मे गजब दिन होगे रइचुली झुले ।

  • संजीव भईया, मै हर लईका रेहेंव त अब्बड़ रह्चुल झूले हंव. पौराणिक जी के कबिता पढ़ के लईकापन के सुरता आगिस हवे…आप ल बधाई..पौराणिक जी ल घलौ गाडा-गाडा बधाई…छत्तीसगढ़ महतारी के जय होवे..

  • रह्चुली का मतलब नहीं समझ में आया. पर मिटटी की सोंधी खुशबू मिली.
    धन्यवाद.

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