राजभासा छत्तीसगढ़ी के फैइलाव बर कोसिस

GG Mini Logoबर अऊ पीपर के छोटकन बीजा म बड़का बर, अऊ पीपर रूख तियार हाे जाथे वइसने बोलियों हर आय। बोली एक बेरा म छोटकन जघा म बोले जाथे अऊ बोलईया मइनखे मन के संख्या ह बाढ़त चले जाथे, अऊ धीरे-धीरे भासा के रूप ले लेथे।
हिन्दी के महतारी अपभ्रंस हर आय वइसनहे छत्तीसगढ़ी के महतारी अर्द्ध मागधी अपभ्रंस आय जेला बाद म पूरवी हिंदी घलो कहे गईस। छत्तीसगढ़ी के जनम 1000 ई. म अर्द्धमागधी अपभ्रंस ले हाेइस तब ले छत्तीसगढ़ी बोले जावत हावय। अवधी अऊ बघेली ह छत्तीसगढ़ी के बहिनी आय येहु दुनो बहिनी मन घलो पूरबी हिंदी म सामिल हावय। भासा के जानबकार सर जार्ज ग्रियर्सन ह पस्चिम हिंदी अऊ पूरबी हिंदी ल हिंदी परिवार म सामिल करिन जेकर ले अवधी के विकास उहा हाइस, काबर कि अवध के बड़े भाम म अवधी के बोलईया अड़बड़ जन रहिन साहित्य के दिस्टी ले भी अवधी ह पोठ भासा आया गोस्वामी तुलसीदास जी के alt147रामचरित मानसalt148 अऊ मलिक मोहम्मद जायसी के alt147पद््मावतalt148 जइसनेहे महाकाव्य ल हिन्दी के महाकाव्य बोले जाथे। अवधी के आने कवि म नूर मोहम्मद, कुतुबन, मझनलाल दास, नाभादास अग्रदास मन ला माने जाथे। पूरवी हिन्दी के नानकुन नोनी छत्तीसगढ़ी के संग बैइसनेह बैवहार अऊ मान गऊन नई होइस, काबर की छत्तीसगढ़ी म बइसनहे साहित्य नई हावय? फेर परचार परसार के कमी के कारन नइ जानिन पत्र-पत्रिका, मीडिया म भी ऐकर चरचा नइ होवय। न लेखक कवि मन येकर चरचा समीक्षा करिन?
छत्तीसगढ़ी प्रथम काव्य कृति नरसिंह दास वैस्नव के ‘सिवायन’ ल माने जाथे। पंडित सुन्दरलाल सरमा, के ‘दानलीला’, पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय के ‘कालिकाल’, आचार्य मुकुटधर पाण्डेय के ‘कुररी’ के प्रति महाकवि कपिलनाथ कस्यप के alt147श्री रामकथा alt147श्री क्रिस्नकथा श्री महाभारत तीनों महाकाव्य आय, श्रीमद् भगवत गीता के (भावानुवाद छत्तीसगढ़ी) डॉ विनय कुमार पाठक, डॉ. बिमल कुमार पाठक, विद््याभूसन मिश्र द्वारिका प्रसाद तिवारी, विप्र, लखनलाल गुप्त जइसन कवि मन के रचना ह हमर छत्तीसगढ़ी काब्य के चिन्हारी आय व बैइसनहे कतको साहित्यकार मन के रचना हावय जेला पढ़ के कहे जा सकत हावय कि छत्तीसगढ़ी म कोई परकार के साहित्य के कमी नई हावय। छत्तीसगढ़ी ह अब राजभासा बन गय हावय छत्तीसगढ़ सासन 28 नवम्बर 2007 के दिन विधान सभा म ‘छत्तीसगढ़ी’ राज भासा विधेयक पारित कर देहे हावय, अगसत 2008 ले छत्तीसगढ़ सासन ह छत्तीसगढ़ी राजभासा आयोग बना देहे हावय। छत्तीसगढ़ी राज भासा ह छत्तीसगढ़ी के फैइलाव अऊ परचार परसार करे बर पहिली पइंत बड़का प्रांतीय सम्मेलन भिलाई, म दुसर सम्मेलन रायपुर म पूरा छत्तीसगढ़ अउ देस के बड़े-बड़े साहित्यकार कवि लेखक साहित्य परेमी मइनखे मन पहुँचे रहिन छत्तीसगढ़ी साहित्य के चरचा परिचरचा छत्तीसगढ़ी भासा के सरूप, कवि सम्मेलन नाच, गीत, संगीत अऊ छत्तीसगढ़ी खानपान, रीति-रिवाज छत्तीसगढ़ी के नदांवत सब्द, ये सब्बों के बारे मा खबिच चरचा होइस, छत्तीसगढ़ी भासा के परचार परसार अउ जाने बर साहित्यकार लेखक मनके पुस्तक के परदरसनी भी लगाय गय रहिस ऊहां महाकवि कपिलनाथ कस्यप जयंती समारोह समिति बिलासपुर ले छत्तीसगढ़ी साहित्य के परचार परसार करे बर पुस्तक के परदरसनी म जुरियाय परेमी मइनखे मन, सोध करैय्या विद््यार्थी मन खूब्बिच चिबिक लगाके देखिन पढ़िन गुनिन अऊ सहराइन अउ रियायत दर म उन मनलेइन। सम्मेलन म आय पहुना मन तारीफ करिन अऊ साहित्य के खरीदी करिन, अउ अच्छा परसाद मिलिस। महाकवि कपिलनाथ कस्यप जयंती समारोह समिति ह बिलासपुर म साहित्य के परचार परसार अउ पुस्तक के परकासन के जिम्मा घलो बांध लेहे हावय। लगातार 28 बरिस ले महाकवि कस्यप जी के जयंती ल समिति द्वारा मनाय जावत हावय ये हर हमर छत्तीसगढ़ी भासा ल पोठ बनाय बर अउ दुसर भासा साहित्य के बराबरी म करे बर बड़का कदम आय बरिस 2014 म कविवर कपिलनाथ जी के 108वीं जयंती म भाई पहुना डॉ. यतीन्द्र नाथ तिवारी कानपुर उ.प्र. डॉ. पालेस्वर शर्मा वरिस्ट साहित्यकार, भासाविद समीक्षक डॉ. विनय पाठक रहिन। जयंती के मउका म कवि कपिलनाथ जी लिखे ‘मोर आत्मकथा’ अऊ छत्तीसगढ़ी ‘गजरागीत’ संगरह के विमोचन होइस। छत्तीसगढ़ी भाा के परचार परसार अउ साहित्य के परकासन म महाकवि कपिल नाथ कस्यप जयंती समारोह समिति प.क्र. 3159 छ.ग. समिति के अध्यक्ष गणेस प्रसाद कस्यप जी अउ संगवारी मन जोमस होके लगे हावय।

अरविन्द कुमार कस्यप
पौना, जांजगीर

दैनिक भास्‍कर ले साभार

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3 comments

  • पोठनगहा जानकारी हे, बोली ले भासा बने के रददा अभी थोकिन बाकी जब तक आठवी सूची मा सामिल नइ हो जाये । आपके ये परयास हर निश्चित रूप ले उपयोगी हे । ऐखर बर गाडा गाडा बधाई अउ धन्यवाद

  • Nice Article sir, Keep Going on… I am really impressed by read this. Thanks for sharing with us. Latest Government Jobs.

  • शकुन्तला शर्मा

    सुन्दर प्रयास , सबो डहर ले होवत हावय । भाखा हर महतारी ए अऊ वोकर बर मन – प्रान लगा के , सबो झन ल भिड जाना हे , तभे सफलता मिलही ।

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