लोककथा :असली गहना

राजा रावन खिसिया के कथे अरे मूरख जेकर महल में देवता दिगपाल मन पानी भरथे, गोबर-कचरा डारथे तेला तेहा ‘कर’ मांगथस तोला लाज नई लागे! तब परजा ह विनती करथे आप मन मोर संग समुंदर तीर चलो, रावन ल डर तो रहय नहीं खिसिया के चल दिस। परजा ह लंका में जइसे चार ठन दरवाजा हे तइसन दरवाजा अउ हुबहु बालू में लंका बना दिस। अउ कथे अइसने हावे न लंका ह! रावन खुस होगे। कथे तैं तों बढ़िया कारीगर हावस जी। परजा कथे रावन धियान देके देख। रावन हंसे लगीस। ऐती बालू के एक हिस्सा गिरीस, उती लंका के एक हिस्सा बिखरगे।
एक झन चकववेन नाम के राजा रीहिस बड़ धरमात्मा रीहिस। राजा अउ रानी दुनो परानी खेती-बारी करे, खेती ले जतिक अनाज होय ओतकी म अपन गुजर बसर करें। राज्य के धन ल अपन काम म नई ले। परजा ले जोन कर मिले ओला परजा में खरचा कर दे। राजा रीहिस तब ले एक साधारन मोटा कपड़ा पहिरे अउ भोजन घलो साधारन करे।
एक दिन नगर में एक उत्सव होइस नगर भर के महिला मन रानी के पहिनावा ल देख के दंग रहिगे अउ रानी ल पूछिस! रानी दाई हमन बढ़िया-बढ़िया रेशमी कपड़ा पहिरे हावन अउ सोन- चांदी, हीरा-मोती पहिरे हन आप मन मालकिन हो अउ आरूग निचट कपड़ा पहिरे हो? रानी ल उंखर बात लग गे। रातकुन राजा ल कहिथे राजा साहब आज उत्सव में मोर गइंज बेइज्जती होइस। राजा कथे का होगे? रानी अपन दुखड़ा सुनइस कथे, हमर नगर के नारी मन बढ़िया-बढ़िया कपड़ा अउ गहना गुठा पहिरे रहिस अउ मेहा? राजा कथे रानी हमन खेती-बारी करके जीवनयापन करथन। जतिक पैदावार होथे ओतकी म जीथन जादा -जादा पैदावार होय नहीं त का करबो। तब ले तेंहा संसो झन कर गहना के बेवस्था कर देहूं। दुसर दिन राजा चकववेन ह अपन परजा ल कहिथे। जा लंकापति रावन ल ‘कर’ मांग के लाबे।
परजा ह रावन कर पहुंचथे। रावन पूछथे कइसे आय हस बे? परजा कहिथे, महाराज! चकववेन ह कर ले बर पठोय हे! रावन जोर से हांसथे अउ कहिथे देखो आज घलो संसार म मूरख आदमी जीयत हावे। जेन ह रावन ले कर मांगत हावे। ओखर मति मारे गेहे। कोई रावन ह कर दीही? परजा कहिथे आप ल कर दे बर परही। रावन धकिया के ओला खेद देथे अउ कथे तोर हिम्मत कइसे होइस रे मूरख?
रातकुन रावन ह मंदोदरी ल बताथे। आज मूरख चकववेन ह एक आदमी भेजे रीहिस। कर रूप म सोना-चांदी मांगे बर! मंदोदरी कथे कर देस के नहीं। रावन कथे तहूं ह आरूग पगली हस मोर महिमा जानथस की नहीं? मेहा रावन हरो। रावन कभु कर देथे? मंदोदरी कथे महाराज आप किरपा करके कर दे देव नहीं ते बात बिगड़ जाही मंदोदरी राजा चकववेन के परभाव ल जानत रीहिस। काबर के ओहा गियानी अउ पतिव्रता रीहिस। पतिव्रता के परभाव ले अतिक जानत रीहिस जतिक रावन नई जाने। बडे बिहनिया रावन ह उठ के कहूं जावत रीहिस। तब मंदोदरी ह रावन ल कहिथे महाराज तनिक ठहरो मेंहा आप मन ल तमासा देखाहूं। मंदोदरी ह रोज कबूतर मन ल दाना खवावे। दाना डारिस तहन कबूतर मन दाना खाए बर भिडत रीहिस तइसने म मंदोदरी ह कथे एको ठन दाना ल तुमन खाहू ते महाराजा धिराज रावन के किरिया हे। ओकर बात के कबूतर मन ल कोनो परभाव नई होइस अउ जेंव के तेंव खावत रीहिस। मंदोदरी कथे देखे महराज! आपके नाम के ये मन ल कोनो डर भाव नई हे। देखेव आपके परभाव?
रावन कथे ते पगली हस! ये चिरई-चिरगुन मन का जानही कि रावन कोन आय। मंदोदरी कथे अब देख महराज चकववेन के किरिया! मंदोदरी किहिस तहन जम्मो कबूतर मन दाना खाय बर छोड़ दिस। बस एक ठन कबूतर जेहा दूसर जगह ले आए रिहिस तेहा खा परीस। खाते भार ओकर मुड़ी ह शरीर ले अलग होगे। रावन कथे येमा कोनो जादू हे! मे नई मानो कहिके चल दीस। राजा रावन अपन दरबार म जाके बइठे रहय तइसने म राजा चकववेन के आदमी आके कथे रातकुन आप मन बिचार करे हो कि नहीं राजा रावन।
राजा रावन खिसिया के कथे अरे मूरख जेकर महल में देवता दिगपाल मन पानी भरथे, गोबर-कचरा डारथे तेला तेहा कर मांगथस तोला लाज नई लागे! तब परजा ह विनती करथे आप मन मोर संग समुंदर तीर चलो, रावन ल डर तो रहय नहीं खिसिया के चल दिस, परजा ह लंका में जइसे चार ठन दरवाजा हे तइसन दरवाजा अउ हुबहु बालू में लंका बना दिस। अउ कथे अइसने हावे न लंका ह! रावन खुस होगे। कथे तैं तों बढ़िया कारीगर हावस जी। परजा कथे रावन धियान देके देख महराज चकववेन के किरिया कहिके एक ठन दरवाजा ल हाथ में गिरा दिस। देख के रावन हांसे लगीस। ये डिहन बालू के एक हिसा गिरीस तहन सही के लंका के एक हिसा बिखरगे। अब कथे कर देवत हस की नही। रावन कांपगे ओहा चकववेन के परभाव ल जान डरीस। कथे तोला कर रूप म जतीक सोना-चांदी लेगना है ले जा। कर ले के परजा ह राजा चकववेन ल दे दीस। राजा ह रानी ल दे दीस। रानी समझ नई सकीस की रावन जइसे महाप्रतापी राजा ह कर करइसे दे दीस। जम्मो बात ल परजा बताइस तब रानी जानीस अउ मने मन कहत हे असली गहना मोर पति हे। गहना के सोभा पति के राहत ले हे। पति नई हे तब ये गहना के का मोल। राजा चकववेन के परभाव ले रावन जइसे महाप्रतापी कांपगे तब ये गहना के का मोल। रानी जम्मो गहना रावन कर भेज दीस अउ खबर भेज दीस के राजा चकववेन ले बढ़ के ये गहना के कोई मोल नई हे। असली गहना मोर राजा हे।

शेखचंद मेरिया
चरभंठिया

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