वन्देमातरम् : महूं पांवे परंव तोर भुँइया

जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मँइया
अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार
इँदिरावती हा पखारय तोर पइयां
महूं पांवे परंव तोर भुँइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मइया ।।
सोहय बिंदिया सहीं घाटे डोंगरी पहार
चंदा सुरूज बनय तोर नैना
सोनहा धाने के अंग लुगरा हरियर हे रंग
तोर बोली हावय सुग्घर बैना
अंचरा तोर डोला वय पुरवइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मइया
रयगढ़ हावय सुग्घर तोरे मउरे मुकुट
सरगुजा अउ बिलासपुर हे बंइया
रयपुर कनिहा सही घाते सुग्गर फबय
नांदगांव दुरूग करधनिया
अँचरा तोर डोलावय पुरवइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मँइया

डॉ
. नरेन्द्र देव वर्मा

Related posts:

2 comments

  • ये हर मोर मनपसंद कविता हरे !!आभार

  • ये सबो छत्तीसगढ़ीया के पसंदीदा हरे।
    येमा हमर पुरा छत्तीसगढ़ के वर्णन हवे। मोला बहुत अच्छा लागथे।
    नरेंद्र देव वर्मा ल शत शत नमन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *