संवैधानिक आजादी के सुख पहुंचय आम जनता तक

सिरिफ केन्द्र के राजधानी दिल्ली, प्रांत मन के राजधानी अउ जिला मन के राजमार्ग भर म हरेक साल भारी-भरकम के जुलुस निकाले भरले जनतंत्र नइ कहावय। या हरेक पांच साल म वोट डारे के तिहार मनाय ले गणतंत्र सुफल नइ होवय। जउन दिन हरेक जनता ल रोटी, कपड़ा, मकान, दवाई अउ सिक्छा के ठौरेटी मिल जाहय, जउन दिन आम जनता के मन भावना जागही के भारत देश हमार आय। सिरिफ अधिकारी, कर्मचारी, बेपारी साहूकार, पद लोलुप नेता मन के नेतागिरी चलाय भर बर जनतंत्र नोहय ये जागरूक जनता म आही।
हमर देस ल सुराज मिले 62 साल होगे अउ संवैधानिक आजादी मिली 60 साल होगे। फेर सुराज अउ संवैधानिक आजादी के सुख आम जनता तक नइ पहुंच पाय हवय। जनतंत्र के मतलब होथे- जनता के, जनता द्वारा अउ जनता खातिर फेर बेवहार म उल्टा दिखथे- जनता द्वारा तंत्र चलना चाही तब तंत्र द्वारा जनता चलत हवय। येकर सेती जनतंत्र बेवस्था ऊपर बनेच किसम ले विचारे ल पड़ही। सिरिफ केन्द्र के राजधानी दिल्ली, प्रांत मन के राजधानी अउ जिला मन के राजमार्ग भर म हरेक साल भारी-भरकम के जुलुस निकाले भरले जनतंत्र नइ कहावय या हरेक पांच साल म वोट डारे के तिहार मनाय ले गणतंत्र सुफल नइ होवय। जउन दिन हरेक जनता ल रोटी, कपड़ा, मकान, दवाई अउ सिक्छा के ठौरेटी मिल जाहय, जउन दिन आम जनता के मन भावना जागही के भारत देश हमार आय। सिरिफ अधिकारी, कर्मचारी, बेपारी साहूकार, पद लोलुप नेता मन के नेतागिरी चलाय भर बर जनतंत्र नोहय ये जागरूक जनता म आही। संगे-संग हरेक विभाग तंत्र म जनता के कसावट बढ़ही ओही दिन भारत म जनतंत्र स्थापित होही। पंद्रह अगस्त अउ 26 जनवरी के सिरिफ तिहार, जलसा मनाय, सड़क म जुलुस निकाले अउ नेता मन के भासन-बाजी ले गणतंत्र नइ आवय।
सबो झन ये बात ल जानत, समझत हवय के देस के 60 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा के खाल्हे जीवन बितावत हवय। करीबन 40 ले 50 प्रतिशत अनपढ़ हें। 50 प्रतिशत खातिर निरमल पानी, रहे बसे के लाइक मकान, तन ढांके बर कपड़ा अउ बिमारी ले बांचे बर दवाई सुलभ नइए। सरकारी आंकड़ा के मुताबिक 72 ले 78 प्रतिशत जनता सिरिफ 20 रुपिया भर म काम चलावत हवयं। लाखों-लाख लइका हर साल पेचिस म मरत हवंय। 5 करोड़ ले जादा बाल मजदूर हें। 62 साल के आजादी ले सिरिफ 25 से 30 प्रतिशत जनता ल ही योजना के लाभ मिले हवय। बाकी जनता के सुख-सुविधा खातिर विकास योजना कागज भर म गोदाय अउ सिमटे हवय। बीते 4 साल म जिहां खरब पति के संख्या 9 रिहिस ओहर अब 56 होय हवय। 62 साल के आजादी अउ विकास योजना लाय के बाद भी अमीरी-गरीबी मजदूर मन जिए खाये बर अपन जनम भूमि ले पलायन करहीं अउ पूंजीपति मन उनखर से जानवर अउ गुलाम कस बेवहार करही तब गरीब आदमी कइसे सोच सकत हे के ये देस ओकर अपन देस आय। जिंकर मन म अघोसित गुलामी बइठे हे तउन मन ये देस अउ जनतंत्र ल कइसे प्रेम कर सकहीं? ये बेवस्था खातिर ये हाना ह सोला आना खरा उतरथे के-घर-दुवार तोर, डेहरी म पांव झन देबे।
ये सब बात येकर सेती होवत हे, के अंगरेज मन हमर देस ल गुलाम बनाके राज करे के जउन कानून कायदा बनाय रिहिन वही तौर तरीका ह आज तक आजाद भारत म 62 बरिस बाद घलो चलत हवय। हमर देस के जतेक बड़े अधिकारी हवंय ओमन अपन आप ला अंगरेज के गद्दीदार समझ के उही तरीका ल अपनाय हवंय। तब जउन तरीका ले राज-काज करही तउने तरीका ले गणतंत्र आही। गुलामी के तरीका अपना के सरकार-दरबार चलाए ले गुलामी आही स्वतंत्रता नइ आवय। हमर देस म जतेक अधिकारी हवंय ते मन देस के कानून-कायदा ल ताक म रख के सिरिफ सत्ताधारी नेता अउ पूंजीपति मन के बात ल मानथें। तब अइसन म 80 प्रतिशत गरीब मन म राष्ट्रीय भावना कहां ले आही? एक ठन उदाहरण ले बात साफ हो जाही के गरीब मन के झोपड़ी बनाय बर सरकार ह पट्टा देबर आना-कानी करथे या बरसों लगा देथे। फेर पूंजीपति मन के कारखाना लगाय बर दरजनों गांव ल गांव वाला मन के बिना अनुमति सहमति के खाली करवा देथे। तब सोंचव के ये देस नेता अउ पूंजीपति मन के आय के आम जनता के। स्वतंत्रता के अइसन घिनौना बेरा म जनता मन ल सोसक अउ चाटुकार नेता मन के मुंह ताके के बजाय अपन अधिकार ल समझ के अपन पांव ऊपर खुद खड़ा होय बर परही। ओही दिन लोगन ल गणतंत्र के मतलब के गियान हो जाही। अभी तक जम्मो नेता अउ अधिकारी मन जतका करत हवय तेमा कोनो जन भावना, जन सेवा या जनता के भलाई नइ हे। ओमन अपन सुख अउ सुवारथ खातिर जनतंत्र के बखान करत हवंय।
आज न्याय विभाग के बात देखबो तब उहां घलो ये हालत हे के आज तारीख म करीबन 2 करोड़ ले जादा मुकदमा हे जेखर फैसला सुनाना बाकी है। ये मुकदमा म लाखन मुकदमा अइसन जेला 10 बरिस ले जादा होगे हे फेर फैसला सुनाना बाकी हे। कुछु फैसला 10 बरिस पहिली सुना दे गे होतिस तब मिले सजा घलो खतम होगे होतिस। येकरे सेती देस के सबले बड़े न्यायालय के न्यायाधीस पीएन भगवती ह कहे रिहिस के ये देस म न्याय व्यवस्था विनास के मुहाना म पहुंच गे हवय। वइसने राष्ट्रीय पुलिस कमीसन के पूर्व सदस्य केएफ रूस्तम जी कहे रिहिन के तुमन जेल के भीतरी कोती देखिहां तब पता चलही के जउन मन ल बाहिर होना चाही ओमन जेल के भीतर हें अउ जउन मन ल भीतर होना चाही ओमन खुल्ला बाहिर घुमत हें अउ अपराध करतेच जावत हें। काबर के हमर न्याय व्यवस्था ह ओमन ला अपराध करे के छूट देके रखे हवय।
ऊपर लिखाय जम्मो लेखा-जोखा ये बताथे के 62 बरिस तक हमर देस के नेता अउ बडे अधिकारी मन कुछू करिस हे त अपन कुरसी बर। टीवी म मेरा भारत महान के बेर-बेर परचार करे ले अउ पारटी के विज्ञापन अखबार मन म बेर-बेर छपवाय ले देस के जनता के गरीबी, बेकारी अउ सोसन के हालत नइ सुधरय। अब देस के जनता खोखला नारा, झूठा भरोसा के चक्कर म अवइया नइ हे। अभी चलो मैका हे के ये बरिस हमला बीते इतिहास ले सबक लेके दुखी जनता खातिर ठोस कदम उठाके मूलभूत जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान, दवाई, सिक्छा के गैरेटी देके जरूरत हवय। ऊंकर माली हालत सुधारना पड़ही। ये सिरिफ सरकारी फाइल अउ आंकड़ा बर नइ भलुक हकीकत म करना पड़ही। नइतो ओ दिन दूरिहा नइए के जब देस के जनता रोमानिया, पोलेण्ड, हंगरी, पूर्वी जर्मीनी, चीन अउ रसिया के जनता के समान लाठी गोली के चिंता छोड़ के जनविद्रोह करे बर सड़क म आके खड़ा हो जाही। आवव ये नौबत आय के पहिली सबो भेद-भाव ल भुलाके जनतंत्र के सुफलता के उदीम करिन। ये ही म जनता, जनतंत्र अउ देस के भलाई होही।
जागेश्वर प्रसाद
समाज सेवी पत्रकार
हांडीपारा रायपुर

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