सज्जन के संग : कोदूराम दलित के कुण्‍डलियॉं





सेवा दाई ददा के रोज करत तुम जाव
मानो उनकर बात ला अऊर सपूत कहाव
अऊर सपूत कहाव, बनो तुम सरबन साँही
पाहू आसिरवाद तुम्हर भला हो जाही
करथंय जे मन सेवा ते मन पाथंय मेवा
यही सोच के करौ ददा-दाई के सेवा।

धरती ला हथियाव झन, धरती सबके आय
ये महतारी हर कभू ककरो संग न जाय
ककरो संग न जाय, सबो ला धरती देवौ
करौ दान धरती के पुण्य कमा तुम लेवौ
देवौ येला भूमिहीन भाई-बहिनी ला
सिरजिस हे भगवान सबो खातिर धरती ला।

संगत सज्जन के करौ, सज्जन सूपा आय
दाना-दाना ला रखय, भूंसा देय उडा़य
भूंसा देय उडा़य असल दाना ला बाँटय
फून-फून के कनकी, कोंढा़ गोटी छांटय
छोडौ़ तुम कुसंग, बन जाहू अच्छा मनखे
सज्जन हितवा आय, करो संगत सज्जन के।

कोदूराम दलित



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