Sunday, November 23, 2008

हायकू

कुकुर कोरा
म घूमत हे, टूरा
ह रोवत हे ।

किरकेट के
चढे हसवै बुखार
ददा बेहाल ।

दोरदीर ले
भेंड कस झपाथे
बफे म खाथे ।

‘कालोनी’ रोग
गॉंव म हबरागे
जी दरर गे ।

माई-मूडी ह
बनगे कहूं आन
मरे बिहान ।

मनगरजी,
सियानी, नई बॉंचै
खपरा छान्‍ही ।

गोटियाय ल
जेन हर जानथे
तेने हर जानथे
तेने तानथे ।

हक के गोठ
जेनेच गोठियाथे
बनेच खाथे ।

सही बोलबे
तब परही डंडा
मार लबारी ।

पाछू रहे के
टकर, अगुवाथे
तेला पकड ।


नरेन्‍द्र वर्मा
सुभाष वार्ड, भाटापारा
07726 - 222461

1 आपमन के गोठ (comments):

दीपक November 26, 2008 3:42 PM  

झुठ लबारीच चलत हे संगी अऊ का कहे जाये !!

कालोनी’ रोग
गॉंव म हबरागे
जी दरर गे ।

हमरो जीव दरर गे हे !! धन्यवाद

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