Sunday, November 16, 2008

नरेन्‍द्र वर्मा के हाईकू

टूटगे आज
मरजादा के डोरी
लाज के होरी ।

पईसा सार
नता-गोता ह घलो
होगे बेपार ।

मन म मया
सिरावत हे, पैसा
हमावत हे ।

बढती देख
ऑंखी पँडरियागे
मया उडा गे ।

करथे तेन
मरथे, कोढियेच
मन फरथे ।

पैसा के खेल
ईमानदार मन
पेल-ढपेल ।

परबुधिया
बनके झन ठगा
ठेंगवा चटा ।

परगे पेट
म फोरा, मुसुवा ह
निकालै कोरा ।

पेट के सेती
शहर जाथे, उहें
पेट कटाथे ।

मया के गीत
मन गुदगुदाथे
फागुन आथे ।


नरेन्‍द्र वर्मा
सुभाष वार्ड, भाटापारा
07726 - 222461

1 आपमन के गोठ (comments):

दीपक November 16, 2008 10:58 PM  

बने हे वर्मा जी !!पढके मजा आइस !!

संगी मन अपन ब्‍लाग में 'गुरतुर गोठ' के लिंक लगा के छत्‍तीसगढी के परचार करैं

CG Blogखाल्‍हे म देहे कोड ल एचटीएमएल एड कर के अपन ब्‍लाग म लगाये के किरपा करहू

आपके रचना के सुवागत हे

छत्‍तीसगढी भाखा के जम्‍मो परेमी मन ला जय जोहार ! मेकराजाला के ये पतरा म छपवाये खातिर आप अपन अउ संगी-साथी के छत्‍तीसगढ़ी म लिखे रचना हमला tiwari.sanjeeva एट द gmail.com
या रचना के सीडी -
संजीव तिवारी
ए-40, खण्‍डेलवाल कालोनी,
दुर्ग (छ.ग.)
के पता मा पठो सकत हौ.

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP