छत्तीगसगढी मोर मातृभाषा आय । मोला अपन मातृभाषा उपर गर्व हे । मैं ये भाषा ल अपन महतारी के दूध संग पिये अउ पचाय हौं । मोर कान म जउन पहली सब्द परिस वो छत्तीसगढी भाषा के रहिस । जब ले मोर महतारी जीयत रहिस हे तब ले मैं वोखर मुंह ले येही भाषा ल सुनेंव अउ गुनेंव । ये भाषा ल मोर पुरखा मन सैकडन बरिस ले बोलत आवत रहिन हें । मोला अपन पुरखा मन उपर गर्व हे, काबर के वोहू मन छत्तीसगढी भाषा ल गर्व के साथ बोलत रहिन हें । आघू पढ़व .....
हमर मयारू मितान
छत्तीसगढ़ी व्याकरण के 125 बछर
जे मन आज घलोक छत्तीसगढ़ी ल संवैधानिक रूप ले भाखा के दरजा पाए के रद्दा म खंचका-डिपरा बनावत रहिथें, उंकर जानकारी खातिर ये बताना जरूरी होगे हवय के ए बछर ह छत्तीसगढ़ी व्याकरण बने के 125 वां बछर आय। आज ले ठउका 125 बछर पहिली हीरालाल चन्द्रनाहू "काव्योपाध्याय" ह सन् 1885 म छत्तीसगढ़ी ब्याकरण ल लिखित रूप म एक किताब के रूप दिए रिहीसे, जेला सन् 1890 म अंगरेजी भाखा के बड़का व्याकरणाचार्य सर जार्ज ग्रियर्सन ह अंगरेजी अनुवाद कर के छत्तीसगढ़ी-अंगरेजी के शमिलहा छपवाए रिहीसे। हीरालाल चन्द्रनाहू जी ल बंगाल सरकार द्वारा वो बखत उंकर भाखा अउ संगीत के क्षेत्र म विशेष योगदान खातिर "काव्योपाध्याय" के उपाधि घलोक दिए गे रिहीसे। ...... आघू पढव
छत्तीसगढी भाखा के जम्मो परेमी मन ला जय जोहार ! मेकराजाला के ये पतरा म छपवाये खातिर आप अपन अउ संगी-साथी के छत्तीसगढ़ी म लिखे रचना हमला tiwari.sanjeeva एट द gmail.com या रचना के सीडी - संजीव तिवारी ए-40, खण्डेलवाल कालोनी, दुर्ग (छ.ग.) के पता मा पठो सकत हौ.
1 आपमन के गोठ (comments):
बहुत बढिया।
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जादू की छड़ी चाहिए?
नाज्का रेखाएँ कौन सी बला हैं?
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