Wednesday, June 17, 2009

वन्देमातरम् : महूं पांवे परंव तोर भुँइया

जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मँइया
अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार
इँदिरावती हा पखारय तोर पइयां
महूं पांवे परंव तोर भुँइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मइया ।।
सोहय बिंदिया सहीं घाटे डोंगरी पहार
चंदा सुरूज बनय तोर नैना
सोनहा धाने के अंग लुगरा हरियर हे रंग
तोर बोली हावय सुग्घर बैना
अंचरा तोर डोला वय पुरवइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मइया
रयगढ़ हावय सुग्घर तोरे मउरे मुकुट
सरगुजा अउ बिलासपुर हे बंइया
रयपुर कनिहा सही घाते सुग्गर फबय
नांदगांव दुरूग करधनिया
अँचरा तोर डोलावय पुरवइया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मँइया

डॉ
. नरेन्द्र देव वर्मा

1 आपमन के गोठ (comments):

दीपक June 17, 2009 10:56 PM  

ये हर मोर मनपसंद कविता हरे !!आभार

संगी मन अपन ब्‍लाग में 'गुरतुर गोठ' के लिंक लगा के छत्‍तीसगढी के परचार करैं

CG Blogखाल्‍हे म देहे कोड ल एचटीएमएल एड कर के अपन ब्‍लाग म लगाये के किरपा करहू

आपके रचना के सुवागत हे

छत्‍तीसगढी भाखा के जम्‍मो परेमी मन ला जय जोहार ! मेकराजाला के ये पतरा म छपवाये खातिर आप अपन अउ संगी-साथी के छत्‍तीसगढ़ी म लिखे रचना हमला tiwari.sanjeeva एट द gmail.com
या रचना के सीडी -
संजीव तिवारी
ए-40, खण्‍डेलवाल कालोनी,
दुर्ग (छ.ग.)
के पता मा पठो सकत हौ.

  © Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP