मानसून

तैं आबे त बनही,मोर बात मानसून। मया करथों मैं तोला,रे घात मानसून। का पैरा भूँसा अउ का छेना लकड़ी। सबो चीज धरागे रीता होगे बखरी। झिपारी बँधागे , देवागे पँदोली। काँद काँटा हिटगे,चातर हे डोली। तोर नाम रटत रहिथों,दिन रात मानसून। तैं आबे त बनही,मोर बात मानसून—–। तावा कस तीपे हे,धरती के कोरा। फुतका उड़त हे , चलत हे बँरोड़ा। चितियाय पड़े हे,जीव जंतु बिरवा। कुँवा तरिया रोये,पानी हे निरवा। पियास मरत हे,डारपात मानसून। तैं आबे त बनही,मोर बात मानसून। झउँहा म जोरागेहे ,रापा कुदारी। बीज भात घलो,जोहे अपन बारी।…

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चिरई चिरगुन (फणीश्वरनाथ रेणु के कहानी आजाद परिन्दे)

जान चिन्हार – हरबोलवा – 10-11 साल के लइका फरजनवा – हरबोलवा के उमर के लइका सुदरसनवा – हरबोलवा के उमर के लइका डफाली – हरबोलवा के उमर के भालू के साही लइका भुजंगी – ठेलावाला हलमान – भाजीवाला करमा – गाड़ीवाला मौसी – हरबोलवा की मौसी हलधर – सुदरसनवा के ददा चार लइका – डफाली के संगीमन चार लइका – सुदरसनवा के संगीमन दिरिस्य: 1 खोर मा भुजंगी अउ हलमान लड़त हवंय, हरबोलवा देखत हवय। भुजंगी – साला तोर बहिनी ला धरों। हलमान – बोल साला, ठड़गी के डउका।…

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