सावन आगे

सावन आगे संगी मन भावन आगे। मन ल रिझाये बर फेर सावन आगे। चारो मुड़ा फेर करिया बदरा ह छा गे, हरियर-हरियर लुगरा म भुईया ह रंगा गे। सावन आगे संगी, फेर सावन आगे। रिमझिम-रिमझिम बरसत हे बादर , सब्बो मनखे के जीव ह जुड़ा गे। सुक्खा के अब दिन पहागे, सब्बो जगहा करिया बादर छा गे। सावन आगे संगी सुग्घर सावन आगे, मन ल मोहाय बर, अब सावन आगे। फुहर-फुहर बरसत हे बदरा, फेर सब के मन ल भिगोत हे। सावन के संग अब, मनखे के मन ल मोह…

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छंद : मदिरा सवैया

1–हे गणराज करौं बिनती ,सुन कष्ट हरो प्रभु दीनन के । रोग कलेश घिरे जग में,भय दूर करो सबके मन के । हाँथ पसारय द्वार खड़े भरदे घर ला प्रभु निर्धन के । तोर मिले बरदान तहाँ दुखिया चलथे सुखिया बनके। 2–राम रहीम धरे मुड़ रोवत नाम इँहा बदनाम करे । उज्जर उज्जर गोठ करे अउ काजर के कस काम करे । रावण के करनी करके मुख मा कपटी जय राम करे । त्याग दया तप नीति बतावय भोग उही दिन शाम करे । 3–काम करो अइसे जग मा सब…

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