दुसरो के बाढ़ ला देखना चाही : सियान मन के सीख

सियान मन के सीख ला माने मा ही भलाई हे।संगवारी हो तइहा के सियान मन कहय-बेटा! परेवा कस केवल अपनेच बाढ़ ला नई देखना चाही रे दुसरो के बाढ़ ला देख के खुश होना चाही। फेर हमन उॅखर बात ला बने ढंग ले समझ नई पाएन। ए दुनिया में अइसे बहुत कम मनखे हावय जउन मन ला दूसर के तरक्की बर्दाश्त होथे। देखे जाय तो हमन सहीं मनखे के अउ सहीं काम के जतका विरोध करथन ओतके विरोध कहूं गलत मनखे के अउ गलत काम के करन तब तो ये…

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