सरगुजिहा गीत

हाथे धरे बीड़ा, लगावत हो रोपा मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी मिले आबे…………… बेर उगते ही डसना उड़ासेन माया मिलाए के केलवा बनाएन खाएक आबे संगी तै सुन ले फरी फरी. मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी। तै हस संगी मोर हिरदे कर चैना, तै हस मोर सुगा मै हो तोर मैना, तोर सूरता संगी मोला आएल घरी घरी मिले आबे संगी तै खेतवा कर धरी। मधु गुप्ता ‘महक’

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हमर छत्तीसगढ़

गुरतुर हमर भाखा सिधवा हमर चाल हे। ऐ छत्तीसगढ़िया बड़ा कमाल हे…….2। अरपा पैरी हसदो के निरमल सुघ्घर पानी हे। महानदी हे पुण्य सलिला एहि हमर जिंदगानी हे। ये भुइयां के बात अलग हे…2 राम के इहाँ ननिहाल है मोर छत्तीसगढ़िया बड़ा कमाल के…2। नदिया नरवा झिरिया म देवता धामी बइठे है। रुख राई के पांव पखारेन सब म ईश्वर देखे हे। जम्मो कोती हे भाईचारा…2 नही कोई जंजाल हे मोर छत्तीसगढ़िया बड़ा कमाल के…2। घर म आइन पहूना पाठी मिलथे बड़ सम्मान जी ठेठरी खुरमी कडुवा पपची हमन के…

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